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एक और IPO को SEBI की मंजूरी, यह कंपनी जुटाएगी 750 करोड़ रुपये
SEBI ने इस कंपनी की भारतीय इकाई को IPO की मंजूरी दी है. इसके साथ ही यह भी जानिए कि आखिर ये IPO होता क्या है?
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
मुंबई: The Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने यूएस-सूचीबद्ध ऑनलाइन ट्रैवल एग्रीगेटर (OTA) Yatra Online की भारतीय शाखा को 750 करोड़ रुपये के IPO के लिए मंजूरी दे दी है. ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस फाइल करने के करीब आठ महीने बाद Yatra Online को मार्केट रेगुलेटर का फाइनल ऑब्जर्वेशन लेटर मिला. Yatra Online के IPO में 750 करोड़ रुपये के इक्विटी शेयरों का नया इश्यू शामिल होगा और साथ ही 93,28,358 इक्विटी शेयरों की बिक्री (OFS) की पेशकश शामिल होगी.
शेयरहोल्डर बेस का विस्तार करेगी Yatra
मार्च, 2022 में यह खबर आई थी कि Yatra Online सहायक कंपनी ट्रैवल होल्डिंग साइप्रस (THCL) के माध्यम से 88,96,998 इक्विटी शेयरों की पेशकश करेगा. Yatra को पूरी उम्मीद है कि वह भारतीय पूंजी बाजारों तक पहुंच बनाएगी और शेयर मार्केट में लिस्टिंग के जरिए अपने शेयरहोल्डर बेस का विस्तार करेगी.
क्या है Yatra India?
Yatra India एक ट्रैवल टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म है जो यूजर्स को डोमेस्टिक और इंटरनेशनल हवाई टिकटों की तुलना और बुकिंग करने की अनुमति देता है. यह भारत में बसों, ट्रेनों और टैक्सियों के साथ-साथ अन्य सहायक सेवाओं के लिए भी बुकिंग करने में मदद करता है. इसके अलावा आप इस प्लेटफॉर्म से देश भर के 1,400 शहरों और कस्बों में 93,500 से अधिक होटलों की बुकिंग भी कर सकते हैं. इसका दावा है कि इसके पास 700 बड़े कॉर्पोरेट कस्टमर्स और 46,000 से अधिक SME क्लाइंट्स हैं.
IPO क्या होता है
आइए, अब समझते हैं कि ये IPO क्या होता है? Initial Public Offer यानी IPO, जब कोई कंपनी इक्विटी मार्केट से यानी शेयर बाजार से पैसे जुटाना चाहती है तो उसके पास बहुत से तरीके होते हैं. उसी में से एक तरीका होता है IPO. जब कोई कंपनी पहली बार अपने शेयर पब्लिक में बेचने के लिए ऑफर करती है, तो उसे Initial Public Offer या IPO कहते हैं. ये शेयर BSE और NSE जैसे स्टॉक एक्सचेंज के जरिए निवेशकों की खरीद के लिए रखे जाते हैं. जब ये शेयर निवेशकों द्वारा खरीद लिए जाते हैं तो वो कंपनी स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट हो जाती है और प्राइवेट से पब्लिक लिस्टेड कंपनी बन जाती है.
IPO कंपनी क्यों लाती है
जब कोई कंपनी शुरू होती है तो उसके पास कई निवेशक होते हैं जो उसमें पैसा डालते हैं, लेकिन एक समय के बाद कंपनी को जब अपना विस्तार करना होता है तो उसे बहुत ज्यादा पैसों की जरूरत पड़ती है. पैसों की जरूरत को पूरा करने के लिए कंपनी के पास कई तरीके होते हैं, कंपनी चाहे तो बैंक से लोन भी ले सकती है, लेकिन ये तरीका कंपनी को थोड़ा महंगा पड़ता है क्योंकि इसमें कंपनी को ब्याज चुकाना होता है और समय पर लोन का भुगतान भी करना होता है. दूसरा तरीका IPO का है, जिसमें कंपनी अपना कुछ हिस्सा पब्लिक को बेचकर पैसा जुटाती है. इसमें कंपनियों को न तो कोई ब्याज देना होता है और न ही पैसे लौटाने होते हैं. लोगों को शेयर जारी करके वो कंपनी में उन्हें अपना हिस्सेदार बना लेती है. लेकिन IPO लाने के बाद कंपनियों की जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं. उन्हें कंपनी से जुड़े फैसलों के लिए शेयरधारकों की मंजूरियां लेनी होती हैं. वो कोई भी फैसला ऐसे नहीं कर सकतीं जिससे कंपनी के शेयरों में गिरावट आए और निवेशकों को नुकसान हो.
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