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चूल्हा-चौका से बाहर निकली महिलाएं, बिजनेस लीडर्स बनकर यूएस-यूके जैसे देशों को पछाड़ा
देश भर में महिला उद्यमियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. 21वीं सदी में महिलाओं के प्रति समाज की बदलती मानसिकता देखी गई है और शिक्षा इसमें प्रमुख कारक है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्लीः देश भर में महिला उद्यमियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. पहले के समय जहां महिलाएं घर से बाहर नहीं निकलती थीं, वहीं अब ये उद्यमी महिलाएं देश और दुनिया में अपनी कंपनियों के जरिए झंडा गाढ़ रही हैं. आज भारतीय महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में उद्यमियों के विश्व मंचों पर अपने शहरों और देशों का प्रतिनिधित्व कर रही हैं.
महिलाओं को सरकार कर रही है प्रोत्साहित
देश में केंद्र व राज्य सरकारें भी महिला उद्यमियों को व्यापार खोलने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं. एडलगिव फाउंडेशन की रिपोर्ट के अनुसार, जहां संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) और यूनाइटेड किंगडम (यूके) में इसी तरह के व्यवसायों की की वृद्धि दर क्रमशः 50 प्रतिशत और 24 प्रतिशत है, वहीं तुलना में भारत में महिलाओं के स्वामित्व वाले व्यवसायों में पांच वर्षों में 90 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है.
सामाजिक बुनियादी ढांचे का विकास
21वीं सदी में महिलाओं के प्रति समाज की बदलती मानसिकता देखी गई है और शिक्षा इसमें प्रमुख कारक है. सरकारी अधिकारियों द्वारा हर स्तर पर लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है साथ ही भारतीय परिवारों ने लड़कियों की शिक्षा को स्वीकार करना शुरू कर दिया है. सामाजिक बुनियादी ढांचे के विकास ने महिलाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए बुनियादी सहायता प्रदान की है.
राष्ट्रपति ने महिला स्टार्टअप्स को दिया बढ़ावा
अक्टूबर में, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उद्यमशीलता के क्षेत्र में महिलाओं की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए 'herSTART' कार्यक्रम शुरू किया. herSTART गुजरात यूनिवर्सिटी स्टार्टअप एंड एंटरप्रेन्योरशिप काउंसिल (GUSEC) की एक पहल है, जिसका उद्देश्य महिलाओं के नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स का समर्थन करना है. कार्यक्रम में मुर्मू ने स्टार्टअप्स के क्षेत्र में भारत के अग्रणी स्थान को रेखांकित किया.
मिल रहा है 10 लाख तक का लोन
मुद्रा योजना महत्वाकांक्षी महिला उद्यमियों की यात्रा में सभी रिक्तियों को भरने के लिए केंद्र सरकार का एक और प्रमुख कार्यक्रम है. मुद्रा योजना के माध्यम से महिला उद्यमी 50,000 रुपये से 10 लाख रुपये तक के लोन के लिए आवेदन कर सकती हैं. MYS के लिए, प्रधान मंत्री ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य "अनफंडेड को फंडिंग" करना है.
20 फीसदी एसएमएमई की मालिक महिलाएं
इंडियन ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन (आईबीईएफ) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 20.37 प्रतिशत महिलाएं एमएसएमई मालिक हैं, जो श्रम शक्ति का 23.3 प्रतिशत है. इन्हें अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है. मैकिन्से ग्लोबल के अनुसार, श्रम बल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाकर भारत संभावित रूप से वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 700 बिलियन अमेरीकी डॉलर जोड़ सकता है.
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