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क्या कम होगी ECONOMY की ग्रोथ रेट, जानिए क्या कह रहे हैं अर्थशास्त्री
बजट आने से पहले आई इस तरह की खबरों को लेकर अर्थशास्त्रियों की राय बंटी हुई है कुछ का मानना है कि ये सच हो सकता है जबकि कुछ ऐसा नहीं मानते हैं .
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
केन्द्र सरकार ने अर्थव्यवस्था की ग्रोथ रेट 7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है लेकिन इसे लेकर चिंता पैदा करने वाली खबर सामने आई है. मीडिया रिपोर्टस का कहना है कि आने वाले समय में ग्रोथ रेट में कमी दर्ज हो सकती है. जिस ग्रोथ रेट के 7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है उसमें आने वाले दिनों .5 प्रतिशत की कमी हो सकती है. हायर इंटरेस्ट रेट और दुनिया में पैदा हुए वैश्विक हालातों को इसका जिम्मेदार बताया गया है. अब जबकि आने वाले समय में बजट आने वाला है और सरकार इकोनामिक सर्वे भी पेश करेगी. लेकिन उससे पहले आई ये खबर परेशान करने वाली है. हमने इसे लेकर देश के जाने माने अर्थशास्त्रियों से बात की और जानना चाहा कि आखिर उनका क्या अनुमान है.
जाने माने अर्थशास्त्री आलोक पुराणिक कहते हैं, “ .5 का जो आंकड़ा है उसे लेकर ये नहीं कह सकते हैं कि 6.5 हो जाए या ये 7.5 हो जाए. अभी अर्थव्यवस्था के जो हालात दिखाई दे रहे हैं उसमें कमी के आसार नहीं दिखाई दे रहे हैं. अगर आप जीएसटी कलेक्शन की बात करें तो वो इस वक्त की मौजूदा स्थितियों को देखते हुए ऐसी नजर नहीं आती है. एक ओर सरकार के पास जीएसटी का पैसा पहले के मुकाबले ज्यादा आ रहा है. अभी मैं हाल ही में रेवन्यू सचिव का इंटरव्यू देख रहा था, जिसमें वो कई बातें बता रहे थे. कच्चे तेल से लेकर दूसरी चीजों के दाम भी देखे जाएं तो मुझे कोई ऐसा फैक्टर नजर आ नहीं रहा है कि ये कम हो जाए. बाकी 6.5 हो जाए या 7.5 हो जाए तो उसका कुछ नहीं कह सकते हैं.
वहीं सीनियर अर्थशास्त्री प्रो अरुण कुमार कहते हैं ,“ मुझे ये बात सही नजर आती है कि ज्यादा ब्याज दरों का असर तो पड़ेगा, इसी तरह महंगाई का भी असर पड़ेगा ही. ऐसी भी खबरें आ रही हैं कि इस बार त्योहारों में उतने लोग दुकानों पर नहीं गए जितने लोगों का अनुमान लगाया गया था. डिमांड तो कम हुई ही है लेकिन असंगठित क्षेत्र की डिमांड ज्यादा कम हुई है. इसका असर तो हुआ ही है. मुझे लगता है कि ये कमी और ज्यादा होगी और ये कमी बढ़ती चली जाएगी “ .
वहीं दिल्ली यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर जनमेजय खूटियां कहते हैं कि ये एक तरह के मिड टर्म प्रोजेक्शन हैं. जब भी हम अर्थव्यवस्था की ग्रोथ का प्रोजेक्शन करते हैं तो हम मौजूदा हालातों को देखते हुए करते हैं. कोई भी पॉलिसी को लेकर हम बात कर रहे हैं या उसमें किसी तरह का चेंज हुआ है तो ऐसी स्थिति में जो चेंज होंगें उसका बाद में पता चलेगा. ये बात सही है कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी से निवेश पर असर आता है और लोन लेने की क्षमता में कमी आ जाती है. उसी तरह से असर तो महंगाई का भी आता है लेकिन इसका कितना असर होगा इसका सटीक नंबर तो कोई नहीं बता पाता है. लेकिन लग तो हमें भी रहा है कि ये कम हो सकता है लेकिन ये रिकवरी भी हो सकता है. हम इस वक्त ऐसे महीने में खड़े हैं जहां से दो महीने बाद बजट आना है. ऐसे में बदलाव आते हैं ऐसे में हम ग्रोथ रेट को बहुत ज्यादा प्रोजेक्ट करते नहीं हैं. देखना होगा कि सरकार आने वाले समय में क्या कुछ लाने जा रही है तो ऐसे में बदलाव हो रहे हैं. हमारे लिये मिडटर्म ग्रोथ ज्यादा मायने नहीं रखती है. मुझे नहीं लगता है कि कोई कमी होगी. मैं इस अनुमान से सहमत नहीं हूं.
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