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आखिर Reliance Capital की राह में Credit Suisse क्यों बन रहा है बाधा? जानें पूरा मामला  

क्रेडिट सुइस के नोटिस में कहा गया है कि यदि रिजॉल्यूशन प्लान को अंतिम रूप दिया जाता है, तो ये नियमों के खिलाफ होगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

अनिल अंबानी की दिवालिया हो चुकी कंपनी रिलायंस कैपिटल (Reliance Capital) की राह में एक और अड़चन आ गई है. स्विट्जरलैंड के कंगाल बैंक क्रेडिट सुइस (Credit Suisse) ने कंपनी को लीगल नोटिस भेजा है. उसका कहना है कि रिलायंस कैपिटल के रिजॉल्यूशन प्लान को लागू नहीं किया जा सकता, क्योंकि इससे कंपनी से जुड़ा एक मामला अभी भी नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में पेंडिंग है.

लंबी हो गई प्रक्रिया
कर्ज ने डूबी रिलायंस कैपिटल दिवाला प्रक्रिया या इनसॉल्वेंसी प्रॉसिडिंग से गुजर रही है. यह प्रक्रिया उम्मीद से ज्यादा लंबी हो गई है, क्योंकि कई बार मामला कानूनी दांवपेंच में उलझ चुका है. हाल में दूसरे दौर की नीलामी हुई थी, जिसमें हिंदूजा ग्रुप की कंपनी इंडसइंड इंटरनेशनल होल्डिंग्स (IndusInd International Holdings) ने इसके लिए 9,650 करोड़ रुपए की बोली लगाई थी. अब क्रेडिट सुइस ने पिछले लोन और एक मामला NCLT में लंबित होने का हवाला देते हुए दिवाला प्रक्रिया रोकने को कहा है. 

खारिज हो गया था दावा 
आर्थिक बदहाली के चलते डूबने के कगार पर पहुंचे क्रेडिट सुइस को हाल में स्विट्जरलैंड के ही यूबीएस बैंक ने खरीदा है. इस बैंक ने अपने वकीलों के माध्यम से रिलायंस कैपिटल के एडमिनिस्ट्रेटर नागेश्वर राव को लीगल नोटिस भेजा है. जिसमें कहा गया है कि उसका रिलायंस कैपिटल पर 660 करोड़ रुपए का कर्ज बकाया है. चूंकि, उसके दावे को खारिज कर दिया गया था. इसलिए उसने पिछले साल एनसीएलटी का दरवाजा खटखटाया था. लिहाजा जब तक उसकी याचिका पर फैसला नहीं आ जाता, रिजॉल्यूशन प्लान को लागू नहीं किया जा सकता.

क्या चाहता है बैंक?
बैंक का दावा है कि वह इस मामले में सिक्योर्ड क्रेडिटर है. नोटिस में कहा गया है कि यदि रिजॉल्यूशन प्लान को अंतिम रूप दिया जाता है, तो ये नियमों के खिलाफ होगा. दरअसल, Credit Suisse चाहता है कि रिलायंस कैपिटल को बेचकर जो पैसा आता है, उससे उसके कर्ज का भी भुगतान किया जाए. लेकिन लेंडर्स ने उसके दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि वो रिलायंस कैपिटल का डायरेक्ट लेंडर नहीं है. इसके बाद Credit Suisse ने NCLT से गुहार लगाई थी, जिस पर फैसला आना अभी बाकी है. 

कोर्ट में है मामला
रिलायंस कैपिटल के बोर्ड को RBI ने 30 नवंबर 2021 को भंग कर दिया था और इसके खिलाफ इनसॉल्वेंसी प्रॉसिडिंग शुरू की थी. RBI ने नागेश्वर राव को कंपनी का एडमिनिस्ट्रेटर बनाया था. रिलायंस कैपिटल की पहले दौर की नीलामी में टॉरेंट ग्रुप ने 8,640 करोड़ की सबसे बड़ी बोली लगाई थी, लेकिन हिंदूजा ने नीलामी के बाद अपनी बोली बढ़ाकर 9,400 करोड़ कर दी थी. इसके खिलाफ टॉरेंट ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. हालांकि, इसके बावजूद NCLT द्वारा दूसरे दौर की नीलामी की अनुमति दी गई. इस अनुमति के खिलाफ भी टॉरेंट सुप्रीम कोर्ट गई है.


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