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आखिर क्यों स्टार्टअप्स के बाद अब बड़ी कंपनियों में बढ़ रहा है छंटनी का दौर
ट्विटर, मेटा और अमेजन जैसी कंपनियों में अब छंटनी की बयार चल रही है. इसके पहले स्टार्टअप्स में यह देखने को मिला था.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्लीः (सुगंध बहल) ट्विटर, मेटा और अमेजन जैसी कंपनियों में अब छंटनी की बयार चल रही है. इसके पहले स्टार्टअप्स में यह देखने को मिला था. हालांकि ऐसा करने से कंपनियां अपने खर्चों को तो कम कर लेंगी, लेकिन जो कर्मचारी यहां पर काम कर रहे थे, वो और उनका परिवार नौकरी से निकाले जाने के बाद काफी परेशान होंगे. मास ले-ऑफ से कंपनियों के अंदर काम के माहौल में काफी बदलाव देखने को मिल रहा है. हालांकि इससे कई सारे सवाल भी सामने निकल कर आ रहे हैं कि, क्या ऐसा करना सही है?
अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियां क्यों कर रही है छंटनी
दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, अमेरिका तकनीकी रूप से मंदी (दो निरंतर तिमाहियों के लिए नकारात्मक वृद्धि) में है, कारखानों के उत्पादन में कमी और नौकरियों में कटौती बढ़ रही है. ईलॉन मस्क द्वारा ट्विटर में छंटनी के बाद मेटा ने भी अपने कर्मचारियों की 13% की छंटनी की, जिसमें 11,000 कर्मचारी को निकाल दिया गया.
इन दोनों कंपनियों में छंटनी इसलिए करनी पड़ी क्योंकि कंपनियों का रेवेन्यू मिल नहीं रहा है और ऑपरेशन की कॉस्ट काफी बढ़ती जा रही है. मंदी की मार झेल रहीं कंपनियों के पास कॉस्ट कटिंग करने के लिए इससे बढ़िया विकल्प नहीं है, जहां वो कम से कम कर्मचारियों के साथ काम चलाएंगी.
भारत भी होगा इससे प्रभावित
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर दुनिया मंदी की चपेट में आई तो भारत भी इससे प्रभावित होगा.टीमलीज डिजिटल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनील सी के अनुसार, "एक कर्मचारी के दृष्टिकोण से, व्यक्ति को उस नौकरी से चिपके रहना चाहिए जिसमें वे वर्तमान में हैं और जितना संभव हो सके अपने योगदान को बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए.
यदि कर्मचारी अतिरिक्त जिम्मेदारियां/परियोजनाएं ले सकते हैं और उपयोग बढ़ाने के संगठन के एजेंडे में योगदान कर सकते हैं तो यह एक अतिरिक्त लाभ होगा और स्थिति में सुधार होने पर निश्चित रूप से पुरस्कृत होगा. नए नौकरी चाहने वालों को नौकरी लेनी चाहिए जहां उनका चयन हो और कई प्रस्तावों के साथ सौदेबाजी करने की कोशिश न करें क्योंकि वे नौकरी के बिना समाप्त हो सकते हैं. ”
छंटनी से बचने के ये हैं तरीके
आरपी यादव, सीएमडी, जीनियस कंसल्टेंट्स के अनुसार, बायजू में छंटनी चल रही मंदी का परिणाम नहीं है, यह हाल ही में बायजू में उसी क्षेत्र से हुए अधिग्रहण के कारण है. यादव ने कहा कि लागत को अन्य तरीकों से भी कम किया जा सकता है. उदाहरण के लिए बायजू क्रिकेट मैच को प्रायोजित करने में हजारों करोड़ रुपये खर्च करता है, इससे बचा जा सकता था.आईटी और सेवा-उन्मुख कंपनी के लिए सबसे बड़ी लागत कर्मचारी लागत है. उत्पादकता में सुधार उन उपायों में से एक होना चाहिए जो संगठनों को विवेकाधीन खर्चों में कटौती के अलावा अपनाना चाहिए.
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