होम / बिजनेस / जब इंटरनेट हो जाए बंद, तब भारत के हमेशा ऑनलाइन रहने वाले ब्रांड्स पर क्या असर पड़ता है?

जब इंटरनेट हो जाए बंद, तब भारत के हमेशा ऑनलाइन रहने वाले ब्रांड्स पर क्या असर पड़ता है?

केंद्रीय दिल्ली के कुछ हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बाधित होने की रिपोर्टों ने मार्केटर्स के सामने एक बार फिर एक असहज सवाल खड़ा कर दिया है. अगर उपभोक्ता अचानक ऑफलाइन हो जाएं, तो हमेशा ऑनलाइन रहने वाली डिजिटल अर्थव्यवस्था का क्या होता है?

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 20 hours ago

भारत की आधुनिक उपभोक्ता अर्थव्यवस्था लगातार इंटरनेट कनेक्टिविटी पर आधारित है. विज्ञापन, डिजिटल भुगतान, फूड डिलीवरी, मोबिलिटी, ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स और ग्राहक सेवाएं, ये सभी इस धारणा पर निर्भर हैं कि उपभोक्ता और व्यवसाय लगातार ऑनलाइन बने रहेंगे.

इस धारणा की एक बार फिर 20 जुलाई को परीक्षा हुई, जब "चलो संसद" विरोध मार्च के दौरान केंद्रीय दिल्ली के कुछ हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बाधित होने की खबरें सामने आईं. इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन ने सोशल मीडिया पोस्ट में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं के निलंबन की निंदा की और कहा कि उसके बयान जारी करने तक कोई आधिकारिक निलंबन आदेश सार्वजनिक नहीं किया गया था. प्रदर्शन के आयोजकों ने भी कनेक्टिविटी बाधित होने का आरोप लगाया, जबकि केंद्रीय दिल्ली के कुछ इलाकों में सुरक्षा बढ़ाने, यातायात प्रतिबंध और कुछ मेट्रो स्टेशनों के अस्थायी रूप से बंद किए जाने की भी खबरें आईं.

हालांकि, मार्केटर्स के लिए बड़ा सवाल तत्काल राजनीतिक घटनाक्रम से कहीं आगे का है. इंटरनेट अब केवल एक और मीडिया चैनल नहीं रह गया है. यह अब वह बुनियादी ढांचा बन चुका है जो उपभोक्ता तक पहुंच, विज्ञापन, लेनदेन, डिलीवरी और ग्राहक जुड़ाव को आपस में जोड़ता है.

ऐसे में किसी एक भौगोलिक क्षेत्र में इंटरनेट कनेक्टिविटी बाधित होने का असर केवल विज्ञापन देखने वालों की संख्या तक सीमित नहीं रहता.

जब कनेक्टिविटी बन जाती है कारोबारी जोखिम

परफॉर्मेंस मार्केटिंग अभियान अचानक अपने लक्षित उपभोक्ताओं तक पहुंचने में विफल हो सकते हैं. उपभोक्ता ऑफर्स का जवाब नहीं दे पाते, विज्ञापनों पर क्लिक नहीं कर पाते और खरीदारी पूरी नहीं कर पाते. लोकेशन-आधारित विज्ञापनों की उपयोगिता कम हो सकती है. डिजिटल-फर्स्ट कंपनियों की वेबसाइट या ऐप पर ट्रैफिक अचानक घट सकता है, जबकि इसकी वजह उपभोक्ता मांग में कमी नहीं बल्कि इंटरनेट ढांचे में आई बाधा होती है. इससे प्रदर्शन के आकलन की चुनौती भी पैदा होती है.

आज अधिकांश मार्केटिंग टीमें रियल-टाइम में अपने अभियानों के प्रदर्शन की निगरानी करती हैं. लेकिन यदि किसी बाजार में अस्थायी रूप से इंटरनेट सेवाएं बंद हो जाएं, तो घटती ग्राहक सहभागिता को गलत तरीके से उपभोक्ता व्यवहार में बदलाव मान लिया जा सकता है, जब तक कि प्लेटफॉर्म और मार्केटर्स वास्तविक कारण की पहचान न कर लें.

इसका असर ई-कॉमर्स और डिजिटल कारोबार पर और भी सीधे तौर पर पड़ता है.

इंटरनेट कनेक्टिविटी न होने पर उपभोक्ता न तो ऑर्डर कर सकता है और न ही डिजिटल भुगतान कर सकता है. डिलीवरी पार्टनर और मोबिलिटी सेवाओं से जुड़े कर्मचारी बुकिंग या नेविगेशन निर्देश प्राप्त करने में कठिनाई का सामना कर सकते हैं. डिजिटल भुगतान पर निर्भर व्यापारी अपने ग्राहकों तक पहुंच खो सकते हैं.

भारत में इंटरनेट शटडाउन का व्यापक अनुभव इस चिंता को केवल एक काल्पनिक स्थिति नहीं रहने देता. Access Now के अनुसार, वर्ष 2023 में भारत में कम-से-कम 116 इंटरनेट शटडाउन दर्ज किए गए, जिनमें अधिकांश मामलों में केवल मोबाइल नेटवर्क को निशाना बनाया गया. संगठन लगातार यह तर्क देता रहा है कि ऐसे शटडाउन केवल संचार को ही नहीं, बल्कि लोगों की आजीविका और व्यावसायिक गतिविधियों को भी प्रभावित करते हैं.

इसका एक ब्रांड सेफ्टी से जुड़ा पहलू भी है.

ब्रांड सेफ्टी और बिजनेस कंटिन्यूटी का नया सवाल

इंटरनेट शटडाउन अक्सर विरोध-प्रदर्शनों, सुरक्षा संबंधी घटनाओं या सार्वजनिक तनाव के दौर में होते हैं. लेकिन आज अधिकांश ब्रांड कम्युनिकेशन स्वचालित (ऑटोमेटेड) हो चुके हैं. ऐसे में प्रमोशनल पोस्ट, पुश नोटिफिकेशन और लोकेशन-आधारित अभियान बिना मौजूदा परिस्थितियों को समझे जारी रह सकते हैं.

इससे ब्रांड्स के सामने बिजनेस कंटिन्यूटी से जुड़ा एक नया सवाल खड़ा होता है. क्या अब संकट प्रबंधन (क्राइसिस प्रोटोकॉल) में इंटरनेट कनेक्टिविटी बाधित होने की पहचान करने और स्वचालित संचार को रोकने या दूसरी दिशा में मोड़ने की क्षमता भी शामिल होनी चाहिए?

केंद्रीय दिल्ली में इंटरनेट सेवाओं के बाधित होने की रिपोर्ट वाला घटनाक्रम अभी भी विकसित हो रहा है और किसी भी संभावित निलंबन की वास्तविक सीमा तथा उसके आधिकारिक आधार की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है. लेकिन मार्केटिंग जगत के लिए इससे जुड़ा बड़ा सवाल बिल्कुल स्पष्ट है.

भारत दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल रूप से जुड़ी उपभोक्ता अर्थव्यवस्थाओं में से एक का निर्माण कर रहा है. जैसे-जैसे यह निर्भरता बढ़ेगी, इंटरनेट शटडाउन केवल संचार सेवाओं में बाधा नहीं रहेगा, बल्कि पूरे उपभोक्ता सफर (कंज्यूमर जर्नी) में अस्थायी व्यवधान का कारण बन सकता है.

मार्केटिंग उद्योग के लिए चुनौती अब केवल इंटरनेट से जुड़े उपभोक्ता तक पहुंचने की नहीं रह गई है. चुनौती अब उस स्थिति के लिए भी तैयार रहने की है, जब यह इंटरनेट कनेक्शन अचानक खत्म हो जाए.
 


टैग्स
सम्बंधित खबरें

अब बिना इंटरनेट भी होगा UPI पेमेंट, NPCI ला रहा NFC आधारित 'Tap-to-Pay' फीचर

रिपोर्ट के अनुसार, ऑफलाइन UPI भुगतान स्वीकार करने के लिए POS टर्मिनल बनाने वाली कंपनियों को NPCI से सर्टिफिकेशन लेना होगा.

3 hours ago

CDSL की साइबर सुरक्षा में बड़ी चूक, SEBI ने ठोका ₹1 करोड़ का जुर्माना

जांच में पता चला कि सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही के कारण हमलावर करीब एक साल तक सिस्टम में मौजूद रहे और इससे शेयर बाजार की अहम सेवाएं कई घंटों तक प्रभावित हुईं.

4 hours ago

पश्चिम एशिया तनाव से बढ़ा दबाव, आज इन बड़े ट्रिगर्स पर रहेगी बाजार की नजर

सोमवार को BSE सेंसेक्स 442.93 अंक (0.57%) की गिरावट के साथ 77,708.52 पर बंद हुआ. वहीं, NSE निफ्टी 95.80 अंक (0.39%) फिसलकर 24,238.50 के स्तर पर आ गया.

4 hours ago

LTCG Tax पर सरकार का बड़ा अपडेट, शेयर निवेशकों को नहीं मिलेगी राहत; टैक्स हटाने का कोई प्रस्ताव नहीं

सरकार को इक्विटी ट्रांजैक्शन पर LTCG टैक्स से बड़ी आय हुई है. वित्त वर्ष 2023-24 से जुड़े असेसमेंट ईयर 2024-25 में LTCG कलेक्शन 72,249 करोड़ रुपये रहा था.

19 hours ago

भारत के कंज्यूमर सेक्टर में डील गतिविधियां धीमी, लेकिन निवेश मूल्य में बनी मजबूती: रिपोर्ट

रिपोर्ट के अनुसार, सार्वजनिक बाजारों में गतिविधियां भी सीमित रहीं. तिमाही के दौरान केवल एक IPO के जरिए 47 मिलियन डॉलर और एक QIP के जरिए 16 मिलियन डॉलर जुटाए गए.

19 hours ago


बड़ी खबरें

नौवीं अनुसूची पर उठे सवाल: "कानूनी है, लेकिन जवाबदेह नहीं", 75 साल बाद पहले संविधान संशोधन की समीक्षा

पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश, एएसजी समेत पैनल के सदस्यों ने बेंगलुरु में आयोजित गोलमेज चर्चा में 1951 के उस संशोधन पर विचार किया, जिसने कानूनों को न्यायिक समीक्षा से सुरक्षा प्रदान की थी.

1 hour ago

पेटीएम की दमदार वापसी, मुनाफा 79% बढ़कर ₹220 करोड़ पहुंचा; आय में भी तेज उछाल

वन97 कम्युनिकेशंस का परिचालन राजस्व 28% बढ़ा, पेमेंट और फाइनेंशियल सर्विसेज बिजनेस में मजबूत ग्रोथ से मिली रफ्तार

17 minutes ago

FTCCI के अध्यक्ष बने केके माहेश्वरी, श्रीनिवास गरिमेला को मिली वरिष्ठ उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी

109 साल पुराने फेडरेशन ऑफ तेलंगाना चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FTCCI) ने नई नेतृत्व टीम का किया चुनाव

53 minutes ago

NPCIL और ECIL की साझेदारी, भारत में विकसित होंगी स्वदेशी परमाणु तकनीकें

परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को मजबूती देने के लिए दोनों कंपनियों ने किया MoU पर हस्ताक्षर, कंट्रोल एंड इंस्ट्रूमेंटेशन सिस्टम से लेकर साइबर सिक्योरिटी समाधान तक विकसित किए जाएंगे.

1 hour ago

प्रो. सौगत रे बने NMIMS के नए VC, 30 साल से अधिक के अनुभव के साथ संभाली कमान

प्रो. सौगत रे के नेतृत्व में NMIMS शोध, अंतरविषयक शिक्षा, उद्यमिता, उद्योगों के साथ साझेदारी, वैश्विक सहयोग और AI-सक्षम शिक्षा को और मजबूत करने पर विशेष ध्यान देगा.

22 hours ago