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जब इन कर्मचारियों के लिए भगवान बनकर आ गए रतन टाटा, जानते हैं क्या है पूरा मामला?
ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब उन्होंने कर्मचारियों के हितों के लिए ऐसा किया हो, इससे पहले कोरोना के समय भी उन्होंने कर्मचारियों को नौकरी से निकालने वालों की आलोचना की थी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
भारत में कारोबारी तो कई हैं लेकिन रतन टाटा की बात ही कुछ और है. ये बात हम नहीं बल्कि अक्सर रतन टाटा अपने व्यवहार से कुछ ऐसा करते रहते हैं जिससे वो सभी से अलग हो जाते हैं. कुछ ऐसा ही मामला टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेस में भी सामने आया है जहां उनके एक आदेश से 115 कर्मचारियों की नौकरी जाने से बच गई. इन 115 कर्मचारियों में 55 फैकल्टी मेंबर, 60 नॉन टीचिंग स्टॉफ के लोग शामिल हैं. 28 जून को उन्हें नोटिस थमा दिया गया था. लेकिन टाटा ट्रस्ट के अनुदान के फिर शुरू होने से अब 115 लोगों की नौकरी बच गई है.
टाटा एजुकेशन ट्रस्ट करता है इस इंस्टीट्यूट की फंडिंग
टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेस की देश में कई जगह ब्रांच हैं. इनमें मुंबई, तुलजापुर, हैदराबाद, और गुवाहाटी शामिल है. इन सभी 115 कर्मचारियों को यहीं से निकाला गया था. इन सभी 115 स्टॉफ में 55 फैकल्टी मेंबर और 60 नॉन टीचिंग स्टॉफ के लोग शामिल हैं. 28 तारीख को दिए नोटिस के बाद इन सभी का कांट्रैक्ट 30 जून को खत्म हो रहा था लेकिन रतन टाटा की जानकारी में ये मामला जैसे ही आया उन्होंने उसकी ग्रांट बढ़ाने का फैसला जारी रखा गया है और इन कर्मचारियों की नौकरी बच गई.
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इससे पहले भी रतन टाटा ने दिखाया है बड़ा दिल
ये पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी रतन टाटा के ऐसे मामले सामने आए हैं जब उन्होंने काम और कंपनी से ज्यादा इंसानियत को बड़ा समझा है. एक बार रतन टाटा के कर्म जब रतन टाटा ने कर्मचारियों के लिए बड़ा दिल दिखाया हो. एक बार का वाकया है जब रतन टाटा के एक कर्मचारी के लिए एयर एंबुलेंस का इंतजाम नहीं हो पा रहा था. लेकिन जैसे ही ये बात रतन टाटा को पता चली तो वो खुद विमान उड़ाने के लिए पहुंच गए. रतन टाटा एक पेशेवर पायलट भी हैं और उनके पास विमान उड़ाने का लाइसेंस भी है. उनके पास एक चार्टेड विमान भी है जिसकी कीमत 150 करोड़ रुपये है.
कोरोना में भी दिखी थी उनकी सहानुभूति
सिर्फ ये मामला ही नहीं बल्कि कोरोना के समय जब पूरी दुनिया में इस बीमारी का तांडव फैला था उस वक्त भी रतन टाटा ने कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की आलोचना की थी. रतन टाटा की ओर से कहा गया था कि जो कर्मचारी हमारे लिए विपरीत परिस्थितियों में काम करता है ऐसे समय में उसका साथ ना देना सही नहीं है. टाटा समूह की कंपनी टीसीएस से लेकर किसी भी दूसरी कंपनी के कर्मचारियों को नहीं निकाला था. उनके इसी व्यवहार को लेकर आए दिन उन्हें भारत रत्न देने की मांग होती रहती है.
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