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दूध और चीनी का जिक्र कर Vedanta के चेयरमैन ने बताई अपनी सफलता की कहानी
वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया है कि वो कैसे अपने बिजनेस को लगातार बढ़ा रहे हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
ताइवान की कंपनी फॉक्सकॉन के साथ मिलकर गुजरात में सेमीकंडक्टर प्लांट लगा रहे वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल की सफलता सभी को आकर्षित करती है. बीते कुछ सालों में उन्होंने कारोबारी दुनिया में अपनी एक अलग जगह बनाई है. लिहाजा, लोग यह जानने को उत्सुक रहते हैं कि वह लगातार अपना बिजनेस कैसे बढ़ा रहे हैं? अब उन्होंने खुद ही इसका जवाब दे दिया है. अनिल अग्रवाल ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में उदाहरण के साथ अपनी सफलता के मंत्र के बारे में बताया है.
अग्रवाल देते हैं ये दो सलाह
वेदांता ग्रुप के चेयरमैन ने अपनी Linkedin पोस्ट में लिखा है, 'अक्सर एंटरप्रेन्योर्स मुझसे पूछते हैं कि बिजनेस को कैसे आगे बढ़ाएं? मैं उन्हें केवल दो सलाह देता हूं. पहली - युवा टैलेंट को मौका दें और दूसरी - स्थानीय लोगों को बिजनेस चलाने की आजादी दें'. इस दौरान उन्होंने 1990 में एक दिवालिया कंपनी के अधिग्रहण और सफलता की कहानी का भी जिक्र किया है.
अंग्रेजी कमजोर, ज्ञान का अंबार
उन्होंने लिखा है, '1990 में मुझे ऑस्ट्रेलिया की एक कंपनी के दिवालिया होने के बारे में पता चला. जिसका नाम था कॉपर माइंस ऑफ तस्मानिया. मैं भी उस कंपनी को खरीदना चाहता था और इसलिए ऑस्ट्रेलिया पहुंच गया. हालांकि, मुझे सुझाव दिया गया कि ये सौदा जोखिम भरा हो सकता है, मगर मेरा भरोसा बहुत मजबूत था. इस डील को फाइनल करने के लिए मैं तस्मानिया के प्रधानमंत्री से भी मिला. मेरी अंग्रेजी ज्यादा अच्छी नहीं थी, लेकिन मेरे पास फुलप्रूफ प्लान था और मैं उन्हें अपनी बात समझाने में सफल रहा'.
युवा लड़के पर जताया भरोसा
अनिल अग्रवाल की योजना से प्रभावित होकर तस्मानिया के प्रधानमंत्री ने उन्हें यह प्लांट देने का फैसला किया और 25 लाख डॉलर में डील फाइनल हो गई. अग्रवाल ने अपनी पोस्ट में लिखा है - प्लांट खरीदने के बाद मैंने दो काम किए. पहला- प्लांट के जनरल मैनेजर को ही कंपनी का प्रमुख बनाया. क्योंकि मैं उस युवा लड़के को अपने तरीके से काम करने की आजादी देना चाहता था. जिस लगन और समर्पण के साथ उसने काम किया, वैसी लगन मुझे कंपनी के किसी भी टॉप अधिकारी में नजर नहीं आई थी. वह मेरे फैसले पर खरा उतरा और कंपनी को नई ऊंचाईयों पर ले गया. कंपनी ने 25 मिलियन डॉलर का मुनाफा कमाया और अगले 10 वर्षों तक लगातार मुनाफा कमाती रही.
ऐसे मिले बेहतर परिणाम
दूसरा- मैंने सीनियर लीडरशिप को केवल 3 लोगों तक सीमित करते हुए कंपनी का पूरा कामकाज स्थानीय लोगों को सौंप दिया. जैसे दूध में चीनी मिलाने पर उसकी मिठास बढ़ जाती है, बिल्कुल वैसे ही, जब आप अपने घर से दूर किसी दूसरे देश में व्यापार स्थापित करते हैं, तो आपको बेहतर परिणाम के लिए स्थानीय लोगों के साथ मिलकर काम करना होगा. अग्रवाल ने आगे कहा, 'हमने स्थानीय लोगों पर भरोसा किया और युवा प्रतिभाओं को अपने ढंग से काम करने की आजादी दी. ऑस्ट्रेलिया में हमारी सफलता ने आगे बढ़ने का रास्ता खोल दिया'.
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