होम / बिजनेस / अमेरिका में ब्याज दरें पहुंची 15 साल की ऊंचाई पर, लेकिन इसमें एक राहत की बात भी है
अमेरिका में ब्याज दरें पहुंची 15 साल की ऊंचाई पर, लेकिन इसमें एक राहत की बात भी है
फेड की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि वो आने वाले महीनों में इकोनॉमी पर ब्याज दरों में इन बड़ी बढ़ोतरियों का असर देखेगा
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्ली: जैसी उम्मीद थी, वहीं हुआ. अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में लगातार चौथी बार 0.75% की बढ़ोतरी कर दी है. फेड चेयरमैन जेरोमी पॉवेल महंगाई को अपनी सीमा रेखा में लाने के लिए ब्याज दरों में ताबड़तोड़ इजाफा कर रहे हैं. लेकिन इस बार पॉलिसीमेकर्स ने इस बात के भी संकेत दिए हैं कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी अब अपने अंतिम चरण में है. मतलब, हो सकता है कि आने वाले समय में ब्याज दरों में कोई बड़ा इजाफा देखने को ना मिले.
2008 के बाद सबसे ऊंची ब्याज दरें
फेड के ब्याज दरों में 0.75% इजाफे के बाद अमेरिका में अब शॉर्ट टर्म रेट 3.75-4% की रेंज में आ गई हैं, जो कि अमेरिका के 15 सालों के इतिहास में सबसे ज्यादा है. फेडरल रिजर्व ने इस साल अबतक 6 बार ब्याज दरों में इजाफा किया है. ब्याज दरों में बढ़ोतरी के चलते अमेरिका में कंज्यूमर, बिजनेस लगातार महंगे हो रहे हैं, जिससे डिमांड में कमी आने से मंदी की भी आशंका बढ़ गई है. वॉशिंगटन में दो दिनों तक चली फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया कि ब्याज दरों में जारी बढ़ोतरी महंगाई को समय के साथ 2% तक सीमित करने के लिये जरूरी होगी.
लेकिन फेड ने दिया राहत का संकेत
फेड की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि वो आने वाले महीनों में इकोनॉमी पर ब्याज दरों में इन बड़ी बढ़ोतरियों का असर देखेगा, फेड ने कहा कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी का महंगाई और ग्रोथ पर पूरी तरह से असर दिखने में समय लगता है. फेड ने आगे कहा कि "भविष्य में होने वाली बढ़ोतरियों की रफ्तार तय करने में कमेटी मॉनिटरी पॉलिसी के संचयी कड़ेपन का ध्यान रखेगी, जिसके साथ मॉनिटरी पॉलिसी आर्थिक गतिविधि और महंगाई पर असर डालती है साथ ही आर्थिक और वित्तीय विकास को भी प्रभावित करती है. अपने बयान ने पॉलिसीमेकर्स महंगाई को रोकने में पूरी तरह से प्रतिबद्ध नजर आते हैं, लेकिन वो ये भी मानते हैं कि ये बढ़ोतरी एक समय अंतराल के साथ ही काम करती है.
साल 2024 से कटौती!
अब फेड चेयरमैन के इस बयान संकेत देते हैं कि पॉलिसीमेकर्स ये सोच रहे हैं कि कर्ज बहुत ज्यादा महंगा होने से महंगाई तो थम जाएगी लेकिन इकोनॉमी सुस्त हो जाएगी, अगर ऐसा है तो शायद आने वाले दिनों में अब इतनी एग्रेसिव रेट बढ़ोतरी न देखने को मिले. यही वजह है कि निवेशक उन्हें इस बात पर चर्चा करने के लिए देख रहे हैं कि क्या फेड दिसंबर में अपनी अगली बैठक में दरों में वृद्धि की गति को धीमा कर देगा. फेड जिस रफ्तार से ब्याज दरों में इजाफा कर रहा है, अगर दिसंबर में 0.75% की बढ़ोतरी नहीं करके 0.50% की बढ़ोतरी करता है, तो भी एक औसत अनुमान है कि इस साल तक ब्याज दरें 4.4% हो जाएंगी और अगले साल तक ये 4.6% और साल 2024 से इसमें कटौती की शुरुआत होगी.
VIDEO: iPhone 14 Pro का स्टॉक खत्म, केंद्रीय मंत्री ने की Apple से बात
टैग्स