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चीन को झटके पर झटका दे रहा भारत, ऐसा भी होगा; उसने सपने में भी नहीं सोचा होगा
दिवाली के मौके पर लाइटिंग या झालर की बिक्री काफी ज्यादा होती है. इस बार चीनी के बजाए देसी लाइटिंग अधिक पसंद की जा रही हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
दिवाली को रोशनी का त्यौहार कहा जाता है. इस मौके पर घर से लेकर दुकान तक सबकुछ जगमग नजर आता है. बीते कुछ सालों से दिवाली पर लाइटिंग का क्रेज काफी बढ़ा है. अलग-अलग किस्म की रंग-बिरंगी लाइटिंग बाजार में आने लगी हैं. हालांकि, अब तक इस बाजार पर चीनी कंपनियों का कब्ज़ा था. चीन का माल इसलिए सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है, क्योंकि वैरायटी के साथ-साथ वो काफी सस्ता भी होता है. हालांकि, इस बार की दिवाली चीनी कंपनियों के लिए ज्यादा खुशियां लेकर नहीं आई है. ऐसा इसलिए कि मार्केट में मेड इन इंडिया लाइटिंग या झालर की डिमांड काफी ज्यादा है.
ढीली हो रही पकड़
एक रिपोर्ट में बताया गया है कि लगभग 1000 करोड़ रुपए के इस बाजार पर अब तक चीनी प्रोडक्ट्स का कब्जा था. बीते दो सालों में कोरोना महामारी के चलते फेस्टिवल का जोश पहले जैसा नज़र नहीं आया. लेकिन अब जब स्थिति पूरी तरह सामान्य हो गई है, तो चीनी कंपनियों की बाजार पर ढीली होती पकड़ साफ तौर पर दिखाई दे रही है. बाजार में 30-40% देसी यानी मेड इन इंडिया झालर बिक रही हैं. ग्राहक चीनी के बजाए देश में बनी लाइटिंग की मांग कर रहे हैं.
वारंटी दे रहीं कंपनियां
सस्ते चीनी प्रोडक्ट्स का मुकाबला करने के लिए देसी कंपनियां वारंटी के साथ आई हैं. चीनी झालर पर जहां कोई वारंटी नहीं होती, वहीं स्थानीय झालरों पर 2 से 3 सीजन की वारंटी दी जा रही है. यह भी एक वजह है कि चीनी आइटम के ग्राहक भारतीय कंपनियों के प्रोडक्ट पर शिफ्ट हो रहे हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि इस साल डिजाइनर लाइटिंग की डिमांड ज्यादा है. घरेलू कंपनियां अच्छी क्वालिटी के साथ ही अलग-अलग प्रकार की झालरें लेकर आई हैं. इनमें दीए, गणपति बप्पा और स्वस्तिक जैसे डिजाइन शामिल हैं. इसके अलावा, कलर चेंजिंग, रिमोट कंट्रोल्ड, मोबाइल और लैपटॉप से नियंत्रित होने वाली लाइटिंग की भी डिमांड है. इन लाइटिंग को देश में ही असेंबल किया जा रहा है.
एनर्जी सेविंग लाइटिंग
इस दिवाली लोग एनर्जी सेविंग लाइटिंग भी पसंद कर रहे हैं, जिसमें बिजली की खपत कम होती है. रिपोर्ट में इलेक्ट्रिक लैम्प एंड कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के हवाले से बताया गया है कि देश कुल लाइटिंग में LED की हिस्सेदारी 92% तक है. जबकि इसका निर्माण बहुत कम है. इस वजह से अब भी LED के 65% कॉम्पोनेंट्स के लिए चीन और अन्य देशों पर निर्भरता है. हालांकि, प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के चलते लाइटिंग निर्माताओं के हौसले बुलंद हैं. खासकर फिनिश्ड प्रोडक्ट में चीन पर निर्भरता काफी कम हुई है और करीब 85% असेंबलिंग भारत में ही होने लगी है.
क्या है PLI स्कीम?
केंद्र सरकार ने घरेलू उत्पादन को बढ़ाने और आयात बिल कम करने के लिए मार्च 2020 में प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना की शुरुआत की थी. इसमें सरकार कंपनियों को भारत में बने प्रोडक्ट की बिक्री के आधार पर इंसेंटिव देती है. विदेशी कंपनियों को भारत में अपना कारोबार स्थापित करने के लिए आमंत्रित करने के साथ-साथ, इस योजना का उद्देश्य घरेलू कंपनियों को देश में अपना उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना है.
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