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YearEnder सतत प्रयास से आगे बढ़ रही है देश की अर्थव्‍यवस्‍था

सरकार नियमित रूप से विभिन्न उद्योग संघों और निर्यात संवर्धन परिषदों के साथ विचार-मंथन कर पालिसी बना रही है जिससे निर्यात को और तेजी से आगे बढ़ाया जा सके.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

कॉमर्स मंत्रालय ने वर्ष 2022 को लेकर अपने पूरे साल की उपलब्‍ध्यिों का खाका पेश किया है. मंत्रालय ने ये बताया है कि वर्ष 2022 उसके लिए कैसा रहा. कॉमर्स मंत्रालय के उसी लेखे जोखे का बीडब्‍ल्‍यू हिंदी के लिए समीक्षा कर रहे हैं संजय बुधिया जो कि CII की एक्जिम समिति के चेयरमैन हैं और पैटोन इंटरनेशनल लिमिटेड के एमडी हैं. उन्‍होंने सरकार के द्वावा अलग अलग क्षेत्रों में जो काम किए हैं उन सभी का देश की अर्थव्‍यवस्‍था पर क्‍या असर पड़ा है इसके बारे में उन्‍होंने विस्‍तार से जानकारी दी है.

Import-Exprot में हुई जबर्दस्‍त ग्रोथ 

संजय बुधिया के अनुसार वित्तीय वर्ष 2021-22 में, माल और सेवा निर्यात दोनों में शानदार वृद्धि के कारण भारत के विदेशी व्यापार में जबर्दस्‍त वृद्धि हुई. अगर मर्चेंडाइज एक्‍सपोर्टस की बात करें तो इसने $ 420 बिलियन को छुआ, जबकि सर्विस एक्सपोर्ट्स ने $ 250 बिलियन को छुआ और संयुक्त कुल निर्यात $ 670 बिलियन हो गया. सरकार की बेहतरीन नीतियों के कारण भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में कामयाब रहा. इससे विश्‍व स्‍तर पर ये कारोबार दुनिया में अपनी पहचान बनाने में भी कामयाब हुए हैं. अस्थिर वैश्विक अर्थव्यवस्था और विपरीत परिस्थितियों और कई अंतरराष्ट्रीय संधियों और ऑब्‍लिगेशन के बीच सरकार द्वारा बनाई गई नीतियों के कारण कई पथ-प्रदर्शक नीतिगत पॉलिसीज को लागू किया गया.

असमान वैश्विक व्‍यवस्‍था के बीच बेहतरीन प्रदर्शन 
वर्तमान में, वैश्विक अर्थव्यवस्था भू-राजनीतिक तनावों के कारण भारी उतार चढ़ाव से गुजर रही है और सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में मांग में कमी आई है, जिससे प्रतिकूल आर्थिक स्थितियां जैसे उच्च ब्याज दरें, ऋण मुद्दे आदि उत्पन्न हुए हैं. यही नहीं इसके बावजूद, सरकार ने न केवल हमें विपरीत विदेशी व्यापारिक स्थितियों से बचाने के लिए न सिर्फ आवश्यक कदम उठाए हैं बल्कि यह भी सुनिश्चित किया है कि हम सकारात्मक विकास पथ पर बने रहें. नवंबर 2022 में, मर्चेंडाइज और सर्विस सेक्‍टर का कुल निर्यात 58.22 बिलियन डॉलर था जबकि नवंबर 2021 में ये 52.46 बिलियन डॉलर रहा था. वहीं अगर ओवरऑल एक्‍सपोर्ट की बात करें तो अप्रैल-नवंबर 2022 में कुल निर्यात 499.67 बिलियन डॉलर था, जबकि अप्रैल-नवंबर 2021 में यह 424.45 बिलियन डॉलर था, जो एक जबरदस्त उपलब्धि है.

सरकार के कई प्रयासों से और बदले हालात 
सरकार ने हाल ही में वाणिज्य विभाग के साथ-साथ डीजीएफटी, सीमा शुल्क, आरबीआई, एक्जिम बैंक, ईसीजीसी आदि जैसे अन्य संगठनों और विभागों के साथ कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं जिसमें सरकार ने कई ट्रेड प्रमोशन प्रोग्राम और स्‍कीम जैसे रोडटेप, इंट्रेस्‍ट सबवेंशन स्‍कीम आदि व्‍यापार संवर्धन कार्यक्रम और योजनाएं लागू की हैं. हाल ही में रोडटेप स्‍कीम में इंजीनियरिंग और रसायन को शामिल करने से निर्यात को और बढ़ावा मिलेगा. यही नहीं सरकार के दवारा एक्‍सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए भी कई कार्यक्रम शुरु किए गए हैं. जिनमें सरकार जिलों की पहचान, करके वहां बनने वाले उत्‍पादों को को सपोट कर रही है उन्‍हें निर्यात हब बनाने के लिए राज्यों के साथ काम कर रही है, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर निर्यात को बढ़ावा देना, विनिर्माण और रोजगार सृजन करना है. सरकार ने भारतीय रुपये में अंतरराष्ट्रीय व्यापार की अनुमति दी है, यानी चालान, भुगतान और निर्यात और आयात का निपटान आरबीआई के मानदंडों के अनुरूप भारतीय रुपये में किया जा सकता है. 

मंत्रालय ने बदली अपनी भूमिका 
सरकार कस्‍टम के क्षेत्र में काम करते हुए रेग्‍यूलेटर बनने की बजाए सुविधाप्रदाताओं के रूप में काम कर रही है और सीमा शुल्क विभाग के माध्यम से प्रक्रियाओं के सरलीकरण, आधुनिकीकरण, सामंजस्य और स्वचालन पर केंद्रित पहल शुरू करने में सफल रही है. सरकार ने जिन प्रमुख फोकस क्षेत्रों में सुधार किया है, उनमें सिस्‍टम का डिजिटलीकरण फेसलेस असेसमेंट स्कीम और तुरंत सीमा शुल्क कार्यक्रम के माध्यम से हयूमन इंटरवेंशन को कम करने जैसे प्रयास शामिल हैं. यही नहीं सितंबर 2022 में घोषित हुई राष्ट्रीय लॉजिस्‍टिक पॉलिसी की नीतियां लॉजिस्टिक सेक्‍टर के लिए गेम चेंजर साबित होने जा रही हैं. 

FTA से और बढ़ेगा कारोबार 
 भारत-यूएई व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (सीईपीए) जो 1 मई 2022 को लागू हुआ इसके कारण यूएई को होने वाला कुल भारतीय निर्यात 90% डयूटी फ्री हो जाएगा. यही नहीं 29 दिसंबर से लागू हुआ भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौता (ईसीटीए) जिसके तहत ऑस्ट्रेलिया भारत से 100% टैरिफ लाइनों पर अपना सामान निर्यात करने जा रहा है. इससे हमारे कारोबारियों को काफी फायदा होगा. सरकार ब्रिटेन, कनाडा, यूरोपीय संघ, इस्राइल और खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के साथ द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर चर्चा में भी सक्रिय रूप से शामिल है और उम्‍मीद है जल्‍द ही इसमें भी कामयाबी मिलेगी. सरकार के प्रयासों के कारण विश्व बैंक की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रिपोर्ट में काफी सुधार हुआ है. आज भारत की रैंकिंग 68 तक पहुंच गई है जो 2017 में 146 हुआ करती थी. उद्योग जगत को पूरा भरोसा है कि इस साल भी सरकार के सहयोग से भारतीय निर्यात मजबूत प्रदर्शन करेगा और शानदार प्रदर्शन करेगा.


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