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अमेरिकी टैरिफ से RMG सेक्टर को झटका, राजस्व वृद्धि घटकर 3-5% पर आने की आशंका

अमेरिकी बाजार में कम निर्यात से लाभ और क्रेडिट प्रोफाइल पर पड़ेगा असर, घरेलू मांग स्थिर बनी रह सकती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

भारत के रेडीमेड गारमेंट (RMG) उद्योग की राजस्व वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष में लगभग आधी होकर 3-5% रहने की संभावना है. इसका प्रमुख कारण अमेरिका द्वारा भारतीय वस्त्रों पर 50% आयात शुल्क (टैरिफ) लागू किया जाना है, जो 27 अगस्त 2025 से प्रभावी होगा. इससे लाभ में गिरावट और उद्योग की क्रेडिट प्रोफाइल पर भी असर पड़ने की आशंका है. इसका खुलासा रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (Crisil) द्वारा जारी एक रिपोर्ट में हुआ है. 

क्रिसिल रेटिंग्स द्वारा रेट की गई 120 से अधिक RMG कंपनियों (कुल अनुमानित सालाना राजस्व ₹45,000 करोड़) के विश्लेषण से यह संकेत मिलते हैं कि कई कंपनियां अपनी कुल आय का 40% से भी अधिक अमेरिका से अर्जित करती हैं.

RMG निर्यात वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग \$16 बिलियन रहा था, जो इस सेक्टर की कुल आय का करीब 27% था. इनमें से एक-तिहाई निर्यात अकेले अमेरिका को किया गया. अब 50% टैरिफ लागू होने के बाद भारत चीन, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले स्पष्ट रूप से कमजोर स्थिति में आ जाएगा.

क्रिसिल रेटिंग्स के डिप्टी चीफ रेटिंग ऑफिसर मनीष गुप्ता ने कहा कि अगर यह टैरिफ बना रहता है तो अमेरिका को होने वाला RMG निर्यात तेजी से घटेगा. चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत का कुल RMG निर्यात 10% बढ़कर $4 बिलियन तक पहुंचा, जिसमें अमेरिका को निर्यात 14% बढ़ा. यह रुझान 26 अगस्त तक बना रह सकता है, लेकिन 50% टैरिफ के बाद अमेरिकी निर्यात लगभग शून्य हो सकता है, भले ही प्रतिस्पर्धी देशों में वैल्यू-ऐडेड गारमेंट्स की सीमित उत्पादन क्षमता हो. इस वित्त वर्ष में अमेरिका की हिस्सेदारी 33% से घटकर 20-25% रह सकती है.

अब भारतीय निर्यातकों को अपना ध्यान यूरोपीय संघ (EU), यूनाइटेड किंगडम (UK) और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे अन्य बड़े बाजारों पर केंद्रित करना होगा, जो मिलाकर भारत के कुल गारमेंट निर्यात का लगभग 45% हिस्सा हैं. हाल ही में भारत और ब्रिटेन के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से उम्मीद है कि वित्त वर्ष के अंत तक ब्रिटेन को होने वाला निर्यात बढ़ेगा और यह उद्योग को कुछ राहत देगा.

क्रिसिल रेटिंग्स के निदेशक गौतम शाह ने बताया कि घरेलू बाजार, जो RMG सेक्टर के कुल राजस्व का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा रखता है, इस साल 8-10% की स्थिर वृद्धि दर्ज करेगा. आर्थिक विकास, ब्याज दरों में कटौती और कर में छूट जैसे कारकों से यह संभव होगा. यही घरेलू मांग, अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को आंशिक रूप से संतुलित करेगी.

मुनाफे के मोर्चे पर भी चुनौतियां सामने आ सकती हैं. अमेरिकी बाजार पर निर्भर निर्यातकों की लाभप्रदता में 300 से 500 आधार अंकों की गिरावट हो सकती है. घरेलू बाजार में संभावित ओवरसप्लाई से मार्जिन पर भी असर पड़ सकता है. पूरे उद्योग स्तर पर 50 से 150 आधार अंकों की गिरावट लाभप्रदता में आ सकती है.

इससे कंपनियों के क्रेडिट मेट्रिक्स भी प्रभावित होंगे. इंटरेस्ट कवरेज रेश्यो पिछले साल के 3.9 गुना से घटकर इस साल 3.5–3.7 गुना तक जा सकता है. फाइनेंशियल लीवरेज (कर्ज/EBITDA अनुपात) 2.78 से बढ़कर 3–3.1 गुना हो सकता है. जिन कंपनियों का अमेरिका में 40% से अधिक निर्यात है, उनके लिए यह गिरावट और भी तेज हो सकती है.

यदि अमेरिका द्वारा लागू किया गया टैरिफ 50% से घटकर पूर्व निर्धारित 25% स्तर पर आ जाता है, तो भारत की प्रतिस्पर्धा क्षमता फिर से बेहतर हो सकती है. खासकर क्योंकि भारत वैल्यू-ऐडेड गारमेंट्स के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धी देशों से आगे है. इससे अमेरिका को होने वाले निर्यात में गिरावट सीमित रह सकती है.

आने वाले महीनों में भारत के गारमेंट उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा, टैरिफ, अमेरिकी बाजार में मांग में संभावित गिरावट और कपास की कीमतों जैसे कई मोर्चों पर नजर रखनी होगी. सरकार और उद्योग के सामने चुनौती यह होगी कि कैसे नए बाजारों में निर्यात को बढ़ावा दिया जाए और घरेलू मांग को बनाए रखा जाए.

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