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Tata Steel Q3 Results: कंपनी ने उठाया नुकसान, अंगुल एनर्जी के साथ मर्जर को मिली मंजूरी

जहां बहुत सी कंपनियों के तीसरे क्वार्टर के रिजल्ट्स काफी अच्छे और शानदार रहे हैं, वहीं टाटा स्टील को इस क्वार्टर में 2224 करोड़ रुपयों का नुक्सान उठाना पड़ा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

34 मिलियन टन की क्रूड स्टील कैपेसिटी के साथ टाटा स्टील विश्व की सबसे बड़ी स्टील कंपनियों में से एक है. सोमवार को टाटा स्टील ने एक स्टेटमेंट द्वारा वित्त वर्ष 2023 के तीसरे क्वार्टर के अपने रिजल्ट्स को जारी किया. बहुत सी भारतीय कंपनियों और बैंकों के लिए 31 दिसंबर को ख़त्म हुआ यह क्वार्टर काफी अच्छा रहा था. लेकिन टाटा स्टील को वित्त वर्ष 2023 के तीसरे क्वार्टर में 2224 करोड़ रुपयों का नेट लॉस उठाना पड़ा है.

प्रॉफिट मिलने के लगाए गए थे अनुमान

पिछले वर्ष कंपनी को 9572 करोड़ रुपयों का प्रॉफिट हुआ था. वहीँ अगर पिछले क्वार्टर की बात करें तो कंपनी को 1514 करोड़ रुपयों का प्रॉफिट देखने को मिला था. वित्त वर्ष 2023 के तीसरे क्वार्टर में कंपनी को ऑपरेशंस से मिलने वाले रेवेन्यु में सालाना आधार पर 6% की गिरावट दर्ज की गयी है. ज्यादातर एनालिस्टों द्वारा कंपनी को तीसरे क्वार्टर में प्रॉफिट मिलने के अनुमान लगाए जा रहे थे. इस क्वार्टर के दौरान कंपनी का कुल EBITDA (अर्निंग्स बिफोर इंटरेस्ट टैक्स डेप्रिसिएशन एंड अमोर्टाइजेशन) 7% मार्जिन के साथ 4154 करोड़ रुपये रहा. यूरोप में चल रही स्थिति को कंपनी के प्रॉफिट में हुई इस गिरावट के लिए ज़िम्मेदार माना जा रहा है.

इस वजह से पड़ा परफॉरमेंस पर असर

टाटा स्टील के CEO और MD टी वी नरेन्द्रन ने कहा - विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भी टाटा स्टील ने इंडिया में लगातार स्थिर रूप से ग्रोथ की है. वित्त वर्ष 2023 के पहले नौ महीनों में घरेलु डिलीवरी 13.7 मिलियन टन रही जो पिछले साल के मुकाबले 4 प्रतिशत ज्यादा है. कंपनी के अधिकतर भागों में विस्तृत रूप से बढ़त देखने को मिली है. कंपनी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर कौशिक चटर्जी ने कहा -  इस वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में इकॉनोमिक स्लो-डाउन और इन्फ्लेशन के प्रेशर के बावजूद ग्लोबल स्टील की कीमतें संतुलित रही हैं. इंडिया में स्टील की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ जबकि रॉ मैटेरियल की कीमत भी पहले से कम हुई है.

इंडियन मार्किट में प्रॉफिट तो यूरोप में हुआ नुकसान

इंडियन मार्किट में कंपनी ने 1918 करोड़ रुपये के प्रॉफिट के साथ 32325 करोड़ रुपये का रेवेन्यु कमाया है. हालाँकि भारत में कंपनी की डिलीवरीज सालाना आधार पर 7% बढ़कर 4.74 मिलियन टन रही. टी वी नरेन्द्रन ने बताया कि – मांग कम होने की वजह से वित्त वर्ष 2023 के पहले नौ महीनों में यूरोप में हमारी डिलीवरीज कम रही हैं. रिसेशन को लेकर चिंता की वजह से स्टील की कीमतों पर दबाव बढ़ने और बढ़ी हुई एनर्जी कॉस्ट्स की वजह से हमारी परफॉरमेंस पर काफी असर पड़ा है.

कंपनी ने इस क्वार्टर के दौरान कैपेक्स (कैपिटल एक्सपेंडिचर) के रूप में 3632 करोड़ रुपये खर्च किये. वहीँ अगर बात कंपनी के नेट डेब्ट की करें तो यह 71706 करोड़ रुपयों पर स्थिर रहा. कंपनी द्वारा क्वार्टर में जेनरेट किया गया फ्री कैश फ्लो 1588 करोड़ रुपये रहा जिसकी वजह वर्किंग कैपिटल में मनचाही मूवमेंट को माना जा रहा है. साथ ही कंपनी के बोर्ड ने टाटा स्टील के साथ अंगुल एनर्जी के मर्जर को मंज़ूर कर दिया है.

यह भी पढ़ें: एक बार फिर गिरा भारतीय रुपया, क्या बढ़ जायेगी महंगाई?


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