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दिवाली की ‘खुशियों’ में शरीक होना चाहती थीं ब्रिटिश कंपनियां, लेकिन मिली मायूसी
ब्रिटेन की स्कॉच-व्हिस्की इंडस्ट्री को भी उम्मीद थी कि दिवाली पर वह बंपर मुनाफा कमाएगी, लेकिन उसकी उम्मीद टूट गई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
दिवाली के मौके पर भारत में शराब की बिक्री में ज़बरदस्त तेजी देखने को मिलती है. इस मौके को भुनाने के लिए कंपनियां पहले से ही तैयारी में जुट जाती हैं. ब्रिटेन की स्कॉच-व्हिस्की इंडस्ट्री को भी उम्मीद थी कि दिवाली पर वह बंपर मुनाफा कमाएगी, लेकिन उसकी उम्मीद टूट गई है. दरअसल, भारत और ब्रिटेन (India-UK) के बीच होने वाला फ्री ट्रेड एग्रिमेंट (FTA) फिलहाल अटक गया है. पहले माना जा रहा था कि दिवाली से पहले ये समझौता अमल में आ सकता है. यदि ऐसा होता, तो ब्रिटिश कंपनियां काफी मुनाफा कमा सकती थीं.
क्या कहना है सरकार का?
ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने भारत के साथ व्यापार समझौते के लिए दिवाली की समय सीमा निर्धारित की थी, लेकिन नई सरकार ने डेडलाइन तक ट्रेड डील साइन करने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई. हालांकि, ब्रिटेन की नई व्यापार सचिव केमी बैडेनोच की तरफ से कहा गया था कि ब्रिटेन डेडलाइन के बजाए समझौते पर ध्यान दे रहा है. भले ही ब्रिटिश सरकार को निर्धारित डेडलाइन पर एग्रीमेंट न होने से कोई फर्क न पड़े, लेकिन वहां की स्कॉच-व्हिस्की इंडस्ट्री को ज़रूर पड़ा है.
इस साल आईं इतनी बोतलें
भारत लिकर कंज़म्पशन के हिसाब से बड़ा मार्केट है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय व्हिस्की का उत्पादन स्कॉच व्हिस्की के प्रोडक्शन के मुकाबले ढाई गुना से अधिक है. 2021 में भारत स्कॉच व्हिस्की का 8वां सबसे बड़ा इंपोर्ट करने वाला बाजार था. इस दौरान, भारत ने 136 मिलियन स्कॉच व्हिस्की की बोतलों का आयात किया था. जबकि 2022 में ये आंकड़ा 95 मिलियन पहुंच गया था.
एसोसिएशन के सीईओ ने कही ये बात
स्कॉच-व्हिस्की एसोसिएशन के सीईओ मार्क केंट दोनों देशों के बीच फ्री ट्रेड एग्रिमेंट को ज़रूरी मानते हैं. उनका कहना है कि स्कॉच व्हिस्की पर 150 प्रतिशत टैरिफ को कम करने के लिए भारत के साथ डील हासिल करना इंडस्ट्री की प्राथमिकता है. बता दें कि दिवाली के मौके को भुनाने के लिए भारत में कारोबार करने वालीं कंपनियों ने भी खास तैयारी की है. आमतौर पर अक्टूबर से जनवरी के बीच शराब- बेवरेज कंपनियों का कारोबार काफी अच्छा होता है. एक रिपोर्ट में बताया गया है कि 'जिन' ब्रांड बनाने वाली Nao Spirits & Beverages को इस फेस्टिवल सीजन में दोगुनी बिक्री की उम्मीद है. पिछले साल कंपनी ने 53,000 केसेज बेचे थे, यानी इस बार उसे 1,06,000 केसेज की बिक्री की उम्मीद है. डियाजियो इंडिया समर्थित इस कंपनी का मानना है कि खासतौर पर महाराष्ट्र, दिल्ली और गोवा में अक्टूबर के बाद बिक्री में तेजी देखने को मिल सकती है.
क्या होता है मुक्त व्यापार समझौता?
मुक्त व्यापार समझौता (FTA) दो या दो से अधिक देशों के बीच आयात-निर्यात शुल्क (Import-Export Tariffs) को कम करने या समाप्त करने के लिए किया जाने वाला एक समझौता है. FTA के तहत, संबंधित देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार बेहद कम या बिना किसी टैरिफ बाधाओं के किया जा सकता है. दूसरे शब्दों में कहें तो यह व्यापार को उदार बनाता है. एफटीए तरजीही व्यापार समझौतों से अलग हैं, जो केवल एक निश्चित संख्या में टैरिफ को कम करते हैं. इसलिए ब्रिटिश स्कॉच-व्हिस्की इंडस्ट्री चाहती थी कि दिवाली से पहले UK और भारत के बीच समझौता हो जाए, ताकि वह आसानी अपने उत्पाद बेचकर मुनाफा कमा सकें.
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