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म्यूचुअल फंड निवेशक जरा ध्यान दें! SEBI ने लगाया 15 लाख का जुर्माना, समझिये क्या है मामला
सेबी को पता चला है कि ने Deutsche Mutual Fund (DMF) और उसके पैरेंट्स ने DMF के ऑर्डर्स को फ्रंट रन करने के लिए एक साजिश रची थी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्ली: मार्केट रेगुलेटर SEBI ने Deutsche Mutual Fund से जुड़े एक फ्रंट रनिंग के मामले में 15 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. Deutsche Mutual Fund को अब डीएचएफएल प्रामेरिका म्यूचुअल फंड (DHFL Pramerica Mutual Fund) के नाम से जाना जाता है.
SEBI का 6 लोगों पर जुर्माना
SEBI ने सेबी ने जिन लोगों को दंडित किया है, उनमें कंचन जेना, हेमलता दे जेना, मालती लता जेना, जयंत छपारिया, अभिषेक छपारिया और प्रोग्रेसिव शेयर ब्रोकर्स शामिल हैं. मार्केट रेगुलेटर ने शुक्रवार को जारी दो अपने दो आदेशों में कहा है कि जुर्माने की राशि 45 दिन के भीतर जमा करानी होगी.
फ्रंट रनिंग की साजिश रची गई
सेबी को पता चला है कि Deutsche Mutual Fund (DMF) और उसके पैरेंट्स ने DMF के ऑर्डर्स को 'फ्रंट रन' करने के लिए एक साजिश रची थी. वो योजना के शुरू होने से लेकर ट्रेड खत्म होने तक उसका गलत तरीके से लाभ लेने तक हर कदम पर शामिल रहे. तीन बहनों - कंचन जेना, हेमलता देई जेना, मालती लता जेना - जयंत छपारिया, अभिषेक छपारिया ने उन्हें सितंबर 2014 और मई 2015 की जांच अवधि के दौरान फ्रंट-रनिंग ट्रेड्स को अंजाम देने में मदद की.
मार्केट रेगुलेटर SEBI ने PFUTP (धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार प्रथाओं का निषेध) मानदंड का उल्लंघन करने के लिए जेना बहनों पर 5 लाख रुपये के साथ-साथ छपरिया पर 5 लाख रुपये और शेयर दलालों के नियम का उल्लंघन करने के लिए Progressive Share Brokers पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया. दिसंबर 2021 में, Deutsche Mutual Fund के फंड मैनेजर और उनके पैरेंट्स ने सेबी के साथ लगभग 5 करोड़ रुपये का भुगतान करके मामला सुलझाया. सितंबर 2014 से मई 2015 के दौरान कुछ संस्थाओं की ओर से कई कंपनियों के शेयरों में Deutsche Mutual Fund के बिक्री/खरीद ट्रेड्स के संदिग्ध फ्रंट रनिंग मामलों की जांच के लिए रेगुलेटर की ओर से जांच के आदेश दिये गये.
क्या होती है फ्रंट रनिंग?
आसान भाषा में समझें तो स्टॉक मार्केट में Front Running का मतलब ये है मार्केट से आगे रन करना, ये सेबी के नियमों के हिसाब से गैरकानूनी होता है.
ब्रोकरों के पास निवेशकों के ऑर्डर्स से संबंधित जानकारी पहले से ही होती है, अगर वो इसका इस्तेमाल अपने निजी खाते पर मुनाफा हासिल करने के लिये करते हैं, यानी सिक्योरिटीज में व्यापार करने के लिए इस जानकारी का अवैध रूप से इस्तेमाल करते हैं तो इसको फ्रंट रनिंग कहा जाता है. ब्रोकर्स के पास कई संवेदनशील और जरूरी जानकारियां पहले से मौजूद होती हैं, जैसे -मान लीजिये कि किसी ब्रोकर को किसी कंपनी के बड़ी संख्या में शेयरों की खरीद के आदेश के बारे में पता है और वह अपने लिये भी निजी तौर पर उसी कंपनी के कुछ शेयर भी खरीदता है, तो यह फ्रंट रनिंग का मामला है.
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