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सहारा ग्रुप को 15 दिन में जमा करने होंगे 1000 करोड़, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया ये फैसला!
Supreme Court ने सहारा ग्रुप की कंपनियों को मुंबई में एंबी वैली प्रोजेक्ट सहित अन्य के लिए ज्वाइंट वेंचर करने की अनुमति दे दी है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सहारा ग्रुप (Sahara Group) को 15 दिन के अंदर एक अलग एस्क्रो अकाउंट में 1,000 करोड़ रुपये जमा कराने का आदेश दिया है. इसके साथ कोर्ट ने ग्रुप की कंपनी सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉरपोरेशन लिमिटेड (SIRECL) और सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (SHICL) को मुंबई के वर्सोवा में अपनी जमीन के विकास के लिए एक ज्वाइंट वेंचर (जेवी) में प्रवेश करने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी दे दी है. तो आइए जानते हैं एस्क्रो अकाउंट क्या है और कोर्ट ने इस पूरे मामले में क्या टिप्पणी की है?
ज्वाइंट वेंचर को मिली मंजूरी
सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह की कंपनियों- सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एसआईआरईसीएल) और सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एसएचआईसीएल) को मुंबई में एंबी वैली परियोजना सहित अन्य संपत्तियों के विकास के लिए ज्वाइंट वेंचर एग्रीमेंट को हरी झंडी दे दी है, जिसका उद्देश्य 10 हजार करोड़ रुपये की राशि एकत्र करना है. दरअसल, 2012 के आदेश के अनुपालन में निवेशकों का पैसा लौटाने के लिए 10,000 करोड़ रुपये की राशि सेबी-सहारा रिफंड खाते में जमा की जानी है. सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने बीते 31 अगस्त, 2012 को जारी अपने निर्देश में साफ कहा था कि सहारा ग्रुप की कंपनियां SIRECL और SHICL इंडिविजुअल इन्वेस्टर्स या निवेशकों के समूह से जुटाई गई रकम को 15 फीसदी सालाना ब्याज के साथ सेबी को वापस करेंगी
15 दिन के अंदर नहीं हुआ ज्वाइंट वेंचर, तो बेच दी जाएगी जमीन
कोर्ट में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने कहा कि अगर ज्वाइंट वेंचर 15 दिन के अंदर अदालत में दाखिल नहीं किया जाता है, तो वह वर्सोवा में 1.21 करोड़ वर्ग फुट जमीन जहां है जैसी है के आधार पर बेच देगी.
अगले महीने होगी सुनवाई
कोर्ट ने सहारा समूह को 15 दिनों की समय सीमा के भीतर एक एस्क्रो खाते में 1000 करोड़ रुपये जमा करने का आदेश दिया. कोर्ट ने कहा है कि अगर ज्वाइंट वेंचर समझौते के लिए अदालत द्वारा अनुमति नहीं दी जाती है, तो राशि तीसरे पक्ष को वापस कर दी जाएगी. अदालत ने मामले को एक महीने बाद आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया. आपको बता दें, एस्क्रो अकाउंट एक ऐसा अकाउंट है, जिसमें दो या दो से अधिक पार्टियों द्वारा ट्रस्ट में धनराशि का लेनदेन किया जाता है. इसका मतलब है कि एक भरोसेमंद तीसरा पक्ष धन सुरक्षित रखेगा.
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