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रूस के इस पैंतरे से दुनिया में मची खलबली! दाने दाने के लिये हो सकते हैं मोहताज
यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा कि रूस के इस कदम के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र और G-20 देशो को एक मजबूत जवाब देना चाहिए.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्ली: यूक्रेन आर रूस की जंग में रूस ने पश्चिमी देशों के लिए एक नई मुसीबत खड़ी कर दी है, और वो मुसीबत ऐसी है कि अमेरिका और यूरोपीय देशों के खाने के लाले पड़ सकते हैं. रूस ने 'यूएन ब्रोकर्ड ब्लैक सी ग्रेन डील' तोड़ दी है. जिसकी वजह से अनाज की आसमान छूती कीमतों पर लगाम लगाने की संयुक्त राष्ट्र की कोशिशों को धक्का लगेगा. संयुक्त राष्ट्र ने रूस से इस डील को नहीं तोड़ने की अपील की है.
रूस ने यूक्रेन पर लगाया आरोप
रूस ने यूक्रेन पर आरोप लगाया है कि ब्लैक सी पर मौजूद उसके नौसेना बेड़े पर यूक्रेन ने ड्रोन से हमला किया है, रूस के रक्षा मंत्रालय ने क्रीमिया शहर सेवस्तोपो के पास रूस के काला सागर बेड़े पर हमले को "आतंकवादी" हमला करार दिया. इस हमले में रूस के पोत को नुकसान हुआ है. रूस ने कहा कि यूरोपीय देश ब्रिटेन की मदद से यूक्रेन ने इस घटना को अंजाम दिया है जिसकी वजह से हमने इस डील से अपने हाथ खींच लिए हैं. ड्रोन हमलों से दो रूसी नौसैनिक जहाजों को "मामूली नुकसान पहुंचा है, जो दोनों यूक्रेनी अनाज शिपमेंट की रक्षा में शामिल हैं. रूस ने कहा कि ब्लैक सी बेड़े के जहाज पर जो हमले किए गए, वे जहाज यूक्रेनी बंदरगाहों से अनाजों निर्यात के लिए एक अंतरराष्ट्रीय पहल के हिस्से के रूप में 'अनाज गलियारे' के तहत काम कर रहे थे. रूस की डील रद्द करने के ऐलान पर यूक्रेन का कहना है कि रूस झूठ बोल रहा है, उसने ऐसा कोई हमला नहीं किया है. यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा कि रूस के इस कदम के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र और G-20 देशो को एक मजबूत जवाब देना चाहिए.
क्या है ब्लैक सी ग्रेन डील
वैश्विक खाद्य संकट को कम करने की कोशिशों के लिये एक बहुत बड़ा झटका है. जुलाई में संयुक्त राष्ट्र समर्थित एक सौदे ने रूस की नौसैनिक नाकाबंदी को आसान बना दिया और तीन प्रमुख यूक्रेनी बंदरगाहों को फिर से खोल दिया. पहला जहाज 1 अगस्त को यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से 26,000 मीट्रिक टन से ज्यादा मकई की खेप लेकर रवाना हुआ था. चूंकि रूस और यूक्रेन ने 22 जुलाई को तुर्की में संयुक्त राष्ट्र समर्थित ब्लैक सी ग्रेन पहल पर हस्ताक्षर किए हैं, इसलिए 90 लाख टन से अधिक मक्का, गेहूं, सूरजमुखी के उत्पाद, जौ, रेपसीड और सोया का निर्यात किया गया है. जो 24 फरवरी को रूस के आक्रमण करने पर रुक गया था. यूक्रेन निर्यात सौदे पर शुरू में 120 दिनों के लिए सहमति बनी थी. संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व वाली पहल का उद्देश्य वैश्विक खाद्य कीमतों को स्थिर करना और बाद में कम करना है, ताकि लोगों को सस्ती कीमत पर खाना मिल सके.
रूस से डील वापस करने की अपील
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक के साथ इस अनाज डील को फिर से शुरू करने के संबंध में संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने शनिवार को रूसी अधिकारियों से संपर्क किया और कहा कि यह सौदा एक "महत्वपूर्ण मानवीय प्रयास है जिसका सकारात्मक असर दिख रहा है. यूक्रेनी ग्रेन एसोसिएशन के अनुसार, फरवरी में पुतिन द्वारा आक्रमण शुरू करने से पहले यूक्रेन हर महीने देश के बाहर 60 लाख टन अनाज भेज रहा था. इसका निर्यात मार्च में 3 लाख टन और अप्रैल में लगभग 10 लाख टन और मई में 17 लाख टन तक गिर गया. इधर, यूरोपीय संघ ने रविवार को रूस से संयुक्त इस डील से बाहर निकलने के अपने फैसले को वापस लेने की अपील की, ये एक ऐसा कदम है जिससे वैश्विक खाद्य संकट को कम करने की कोशिशों को झटका लगा है. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इस कदम को "विशुद्ध रूप से बेरहम" कहा. बाइडेन ने कहा कि इससे भुखमरी बढ़ेगी, जबकि विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने मॉस्को पर भोजन को हथियार बनाने का आरोप लगाया. रविवार को, वॉशिंगटन में रूस के राजदूत ने कहा, अमेरिकी प्रतिक्रिया "अपमानजनक" थी और मास्को के कदम के बारे में झूठे दावे किए.
हालांकि रूस ने अबतक इन अपीलों का कोई जवाब नहीं दिया है, अगर रूस इस डील को दोबारा नहीं करता है, तो आने वाले दिनों में अनाजों की कीमतें नए आसमान पर पहुंच जाएंगी, जो कि पहले ही युद्ध की वजह से बढ़ी हुई हैं.
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