होम / बिजनेस / अब इस इंडस्ट्री में पैर जमाएंगे मुकेश अंबानी और शिव नादर, जानें क्या है योजना
अब इस इंडस्ट्री में पैर जमाएंगे मुकेश अंबानी और शिव नादर, जानें क्या है योजना
मुकेश अंबानी की रिलायंस और शिव नादर की एचसीएल ISMC एनालॉग में हिस्सेदारी के लिए 4000 करोड़ रुपए निवेश कर सकती हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
रिलायंस इंडस्ट्री के चेयरमैन मुकेश अंबानी को सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में मौजूद मुनाफे की संभावनाएं नजर आने लगी हैं. इसलिए अब उन्होंने इस इंडस्ट्री में पैर जमाने का फैसला लिया है. यदि सबकुछ ठीक रहा, तो रिलायंस भी इस इंडस्ट्री का हिस्सा हो जाएगी. वैसे, केवल रिलायंस ही नहीं दिग्गज IT कंपनी HCL भी इस फील्ड में उतरने का मन बना चुकी है. दरअसल, दोनों कंपनियां एक सेमीकंडक्टर कंपनी में हिस्सेदारी खरीदना चाहती हैं. बता दें कि अनिल अग्रवाल का वेदांता ग्रुप और ताइवान की कंपनी फॉक्सकॉन मिलकर गुजरात में सेमीकंडक्टर प्लांट लगा रहे हैं. ऐसे में रिलायंस और HCL के इस इंडस्ट्री में आने के बाद भारत का दबदबा बढ़ेगा.
दुनिया ने झेली है किल्लत
सेमीकंडक्टर का मार्केट बहुत बड़ा है और इसके लगातार बढ़ने की उम्मीद है. सेमीकंडक्टर चिप कार से लेकर मोबाइल तक अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में लगाई जाती है, इसलिए इसकी डिमांड लगातार बनी रहती है. कोरोना महामरी के चलते भारत सहित पूरी दुनिया को सेमीकंडक्टर की किल्लत का सामना करना पड़ा था. अब सरकार इस इंडस्ट्री को बढ़ावा देने की योजना पर काम कर रही है. ऐसे में इस सेक्टर में पैर जमाने वालों की भविष्य में तगड़ी कमाई होना तय है. यही वजह है कि मुकेश अंबानी की रिलायंस के साथ-साथ HCL ने भी इसमें दिलचस्पी दिखाई है
इस राज्य में लगेगा प्लांट
रिलायंस और एचसीएल ISMC एनालॉग में 30-30 फीसदी हिस्सेदारी खरीदना चाहती हैं. ISMC एनालॉग मुंबई स्थित नेक्स्ट ऑर्बिट वेंचर्स और इजराइली टेक कंपनी टॉवर सेमीकंडक्टर का एक वेंचर है. यह कंपनी केंद्र सरकार के 76,000 करोड़ रुपए के सेमीकॉनइंडिया प्रोग्राम के तहत सब्सिडी के लिए आवेदन करने वाली तीन कंपनियों में से एक है. ISMC एनालॉग की योजना कर्नाटक में मैसूर के पास प्लांट लगाने की है. माना जा रहा है कि मुकेश अंबानी की रिलायंस और शिव नादर की एचसीएल इस हिस्सेदारी के लिए 4000 करोड़ रुपए निवेश कर सकती हैं.
भारत को मिलेगा फायदा
रिलायंस के इस डील के जरिए सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन का ज्यादातर हिस्सा देश में तैयार करना चाहती है. भारत में इस इंडस्ट्री के ग्रोथ की बात करें तो यह 16-18 फीसदी की दर से बढ़ रहा है. इसमें खासतौर पर डिजिटल इकॉनमी के रफ्तार पकड़ने से तेजी आई है. एक रिपोर्ट बताती है कि भारत से बड़े पैमाने पर सेमीकंडक्टर के निर्यात की भी संभावना है, इसलिए इस क्षेत्र में निवेशकों की दिलचस्पी बन रही है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि भारत इस इंडस्ट्री को ऐसे समय में बढ़ावा दे रहा है, जब चीन और ताइवान के बीच तनाव बढ़ा है. लिहाजा, इसका फायदा उसे मिल सकता है. बता दें कि दुनिया की सबसे बड़ी चिप बनाने वाली कंपनी ताइवान की टीएसएमसी है.
क्या है सेमीकंडक्टर चिप?
आजकल सभी गाड़ियां लेटेस्ट टेक्नोलॉजी पर बन रही हैं, जिनमें तमाम तरह के आधुनिक फीचर्स होते हैं. गाड़ियों की पावर स्टीयरिंग, ब्रेक सेंसर, एंटरटेनमेंट सिस्टम, एयरबैग और पार्किंग कैमरों में सेमीकंडक्टर चिप इस्तेमाल होती है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक वाहन में 1,000 से अधिक सेमीकंडक्टर चिप्स लगाईं जाती हैं. ऐसे में इसकी कमी ने कंपनियों को परेशान कर दिया था. ऑटो सेक्टर के अलावा, स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक इंडस्ट्री में भी चिप बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होती है. भारत में चिप बनने से इसकी कमी दूर हो जाएगी.
टैग्स