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LIC के दम पर OFS से रिकॉर्ड फंड जुटाव, 2026 में अब तक 62,730 करोड़ रुपये आए

वर्ष 2026 में अब तक 23 OFS सौदों के जरिए 20 कंपनियों ने करीब 62,730 करोड़ रुपये जुटाए हैं. इस रिकॉर्ड जुटाव में LIC का योगदान सबसे अहम रहा है

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago

स्टॉक एक्सचेंजों के जरिए ऑफर फॉर सेल (OFS) से रकम जुटाने का सिलसिला वर्ष 2026 में नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया है. अब तक हुए 23 OFS सौदों के जरिए 20 कंपनियों ने करीब 62,730 करोड़ रुपये जुटाए हैं. आंकड़े उपलब्ध होने के बाद OFS के जरिए जुटाई गई यह सबसे बड़ी रकम बताई जा रही है. इस उपलब्धि में भारतीय जीवन बीमा निगम यानी LIC की हिस्सेदारी बिक्री का सबसे बड़ा योगदान रहा है.

सरकारी कंपनियों से आया सबसे ज्यादा पैसा

इस साल OFS के जरिए जुटाई गई कुल रकम में सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी 93 फीसदी से अधिक रही है. इन कंपनियों से करीब 58,425.12 करोड़ रुपये जुटाए गए. इस दौरान इंडियन रेलवे फाइनैंस कॉर्पोरेशन यानी IRFC, आंध्र सीमेंट्स और ईस्ट इंडिया ड्रम्स एंड बैरल्स ने दो-दो बार OFS का सहारा लिया.

LIC की हिस्सेदारी बिक्री बनी सबसे बड़ा फैक्टर

सरकार ने इस महीने की शुरुआत में LIC में OFS के जरिए बड़ी हिस्सेदारी बेची थी. विनिवेश से अब तक जुटाई गई कुल रकम में OFS का योगदान 98 फीसदी से अधिक रहा है. करीब 51,787.29 करोड़ रुपये OFS के जरिए जुटाए गए, जिसमें अकेले LIC का योगदान लगभग 31,514.89 करोड़ रुपये रहा. यही वजह है कि इस साल OFS से रिकॉर्ड फंड जुटाने में LIC की हिस्सेदारी बिक्री को अहम माना जा रहा है.

सफल OFS से बढ़ा सरकार का भरोसा

बाजार विश्लेषकों के मुताबिक मई में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और कोल इंडिया में हिस्सेदारी बिक्री की सफलता के बाद केंद्र सरकार का OFS के जरिए और फंड जुटाने का भरोसा बढ़ा. सरकार राजस्व बढ़ाने और विनिवेश लक्ष्य हासिल करने के लिए इस माध्यम का लगातार इस्तेमाल कर रही है.

कच्चे तेल की तेजी ने भी बढ़ाई फंड की जरूरत

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई. होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा. कच्चे तेल की महंगाई से भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के आयात बिल पर असर पड़ता है, जिससे सरकार के खर्च और राजकोषीय गणित पर भी दबाव बढ़ सकता है. ऐसे माहौल में हिस्सेदारी बिक्री के जरिए अतिरिक्त संसाधन जुटाना सरकार के लिए अहम हो गया.

विनिवेश लक्ष्य का दो-तिहाई हिस्सा हासिल

हिस्सेदारी बिक्री से केंद्र सरकार को अपने सालाना विनिवेश लक्ष्य का करीब दो-तिहाई हिस्सा हासिल करने में मदद मिली है. निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग यानी DIPAM के मुताबिक अब तक करीब 52,716.02 करोड़ रुपये जुटाए जा चुके हैं. वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने करीब 80,000 करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य रखा है.

2019 के बाद सबसे मजबूत प्रदर्शन

विनिवेश के जरिए फंड जुटाने के लिहाज से वित्त वर्ष 2026-27, वित्त वर्ष 2018-19 के बाद सबसे मजबूत वर्षों में शामिल हो गया है. वित्त वर्ष 2018-19 में विनिवेश से करीब 84,972 करोड़ रुपये जुटाए गए थे. मौजूदा वित्त वर्ष में अब तक के आंकड़े बताते हैं कि सरकार के विनिवेश कार्यक्रम में OFS सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है और LIC की हिस्सेदारी बिक्री ने इस रफ्तार को नई मजबूती दी है.
 


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