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आज से शुरू हो रही RBI की बैठक पर सबकी निगाहें, क्या फिर से बढ़ेंगी ब्याज दरें?
RBI की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक आज से शुरू हो रही है. इस बैठक में रेपो रेट में बढ़ोत्तरी का फैसला लिया जा सकता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
महंगाई आंकड़ों में नरम पड़ने लगी है. ऐसे में यह सवाल लाजमी हो गया है कि क्या भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) फिर से नीतिगत दरों में इजाफा करेगा? अब तक महंगाई को नियंत्रित करने के नाम पर RBI कई बार रेपो रेट में इजाफा कर चुका है, जिसके चलते महंगाई की मार झेल रहे लोगों के लिए कर्ज भी महंगा हो गया है. आज यानी सोमवार से RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक हो रही है. तीन दिवसीय इस बैठक के नतीजे 7 दिसंबर को जारी किए जाएंगे और पूरी संभावना है कि रेपो रेट में 0.25 से 0.35 फीसदी की बढ़ोतरी हो जाए.
अब तक हुआ इतजा इजाफा
रिजर्व बैंक इस साल मई से अब तक रेपो रेट में 1.90% की वृद्धि कर चुका है. इसके बावजूद खुदरा महंगाई जनवरी से ही 6% के संतोषजनक स्तर से ऊपर बनी हुई है. इतिहास में पहली बार RBI को सरकार को स्पष्टीकरण भी देना पड़ा है कि वो महंगाई रोकने में क्यों नाकाम रहा. बता दें कि घरेलू कारकों के अलावा आरबीआई नीतिगत दर में इजाफे को लेकर अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व को भी फॉलो करता है. दुनिया भर में पिछले कुछ वक्त में महंगाई नरम पड़ती नजर आई है. इससे लगता है कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में आक्रामक वृद्धि से बच सकता है और इसी राह पर चलते RBI भी ब्याज दरों में मामूली इजाफे की घोषणा कर सकता है.
फरवरी में भी बढ़ोत्तरी संभव
एक रिपोर्ट में बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस के हवाले से बताया गया है कि इस बार ब्याज दरों में 0.25 से 0.35 फीसदी तक की ही वृद्धि हो सकती है. अनुमान है कि रेपो रेट इस वित्त वर्ष में 6.5% पर पहुंच जाएगी. यानी फरवरी में एक और इजाफा देखने को मिल सकता है. वहीं, कोटक महिंद्रा बैंक के शांति एकंबरम का मानना है कि RBI फेडरल रिजर्व जैसा नरम रुख अपना सकता है. गौरतलब है कि RBI ने 3 नवंबर को मौद्रिक नीति समिति (MPC) की एक अतिरिक्त बैठक बुलाई थी. इस बैठक में सरकार को दिए जाने वाले जवाब पर चर्चा हुई थी. केंद्रीय बैंक ने सरकार को बताया है कि उसके प्रयासों के बावजूद आखिर महंगाई 6% के संतोषजनक स्तर से नीचे क्यों नहीं आई.
सार्वजनिक नही हुई रिपोर्ट
RBI ने सरकार महंगाई को नियंत्रित करने में अपनी नाकामी के क्या कारण बताए, इसकी जानकारी किसी को नहीं है. RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास ने उस समय ही स्पष्ट कर दिया था कि सरकार को भेजी जाने वाली रिपोर्ट का ब्योरा तुरंत सार्वजनिक नहीं किया जाएगा. दास ने कहा था कि महंगाई को लेकर RBI सरकार को जो जवाब देगी, उसे इसलिए पब्लिक नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह अधिकार RBI के पास नहीं है. कानून में RBI को ऐसा कोई अधिकार नहीं मिला है, जिसके आधार पर वह सरकार को अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक कर सके.
क्या कहता है RBI का नियम?
रिजर्व बैंक अधिनियम के तहत अगर महंगाई के लिए तय लक्ष्य को लगातार तीन तिमाहियों तक हासिल नहीं किया जाता, तो RBI को केंद्र सरकार के समक्ष स्पष्टीकरण देना होता है. उसे बताना होता है कि महंगाई नीचे नहीं आने के क्या कारण हैं और उसने अब तक क्या कदम उठाए हैं. हालांकि, मौद्रिक नीति रूपरेखा के 2016 में प्रभाव में आने के बाद से यह पहली बार हुआ है जब RBI को इस संबंध में केंद्र को रिपोर्ट भेजनी पड़ी. दरअसल, आरबीआई को केंद्र की तरफ से खुदरा महंगाई दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर बनाए रखने की जिम्मेदारी मिली हुई है, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद आरबीआई मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने में नाकाम रहा है.
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