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PTC India Mismanagement : राजीब मिश्रा, पवन सिंह पर गिरी सेबी की गाज

सेबी ने PTC India के एमडी पवन सिंह पर 2 साल के लिए 25 लाख रुपये का जुर्माना और चेयरमैन राजीब मिश्रा पर 6 महीने का प्रतिबंध और 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

पलक शाह

बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने पीटीसी इंडिया फाइनेंशियल सर्विसेज (PFS) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर को कंपनी में गंभीर कुप्रबंधन के आरोप में दोषी ठहराया है. इन दोनों पर प्रतिबंध लगाने के साथ लाखों रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.

प्रतिबंध और जुर्माना

सरकारी एनबीएफसी और पावर ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन की सहायक कंपनी पीटीसी इंडिया में कुप्रबंधन, घोटाले और गंभीर कॉर्पोरेट प्रशासन खामियों के आरोपों के बाद सेबी ने अब चेयरमैन राजीव मिश्रा को किसी भी कंपनी के बोर्ड से 6 महीने के लिए प्रतिबंधित कर दिया है और 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. वहीं, कंपनी के पूर्व एमडी पवन सिंह पर 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है और 2 साल के लिए किसी भी सूचीबद्ध कंपनी के बोर्ड में शामिल होने पर रोक लगा दी गई है. सेबी ने अपने हालिया आदेश में कहा कि एमडी और सीईओ होने के नाते पवन सिंह बोर्ड प्रक्रिया को बाधित और निराश करने में सबसे आगे थे. वहीं, राजीब मिश्रा ने भी इसमें उनका पूरा समर्थन प्रदान किया.

बैठक के मुद्दों और आईडी द्वारा उठाई चिंताओं पर नहीं किया गौर

राजीब मिश्रा और पवन सिंह के नेतृत्व में 6 स्वतंत्र निदेशकों (ID) ने 2022 में पीटीसी इंडिया बोर्ड से इस्तीफा दे दिया था. सेबी ने अपने कारण बताओ नोटिस (एससीएन) में आरोप लगाया था कि ऑडिट समिति के अध्यक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों को बैठक के मिनटों में सही ढंग से दर्ज नहीं किया गया था और इस्तीफा देने वाले आईडी द्वारा उठाई गई चिंताओं पर निष्पक्ष रूप से गौर करने में भी विफल रहे.

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कंपनी को हुआ नुकसान
सेबी ने कहा कि किसी भी सूचीबद्ध कंपनी में आईडी एक निगरानीकर्ता के रूप में कार्य करती हैं और प्रबंधन उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों का समाधान करने के लिए बाध्य है, लेकिन एमडी के रूप में पवन सिंह बार-बार आईडी के साथ टकराव की स्थिति में काम कर रहे थे और इसका पीएफएस के प्रदर्शन पर स्पष्ट प्रभाव पड़ा, जिससे वित्त वर्ष 2019 से वित्त वर्ष 23 की अवधि के दौरान पीएफएस की संपत्ति 13,193 करोड़ रुपये से गिरकर 7,634 करोड़ रुपये हो गई.

सेबी का कारण बताओ नोटिस
सेबी ने पाया कि एक आईडी जयंत गोखले ने ऑडिट समिति की बैठकों के मिनटों के मसौदे में संशोधन के विभिन्न उदाहरण भी प्रदान किए, जहां पीटीसी इंडिया के प्रबंधन द्वारा सावधानीपूर्वक परिवर्धन और चूक के साथ ऑडिट समिति के मिनटों में बदलाव करने का प्रयास किया गया था. वहीं, पवन सिंह और राजीब मिश्रा ने कथित तौर पर एक महत्वपूर्ण फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट के खुलासे में 2 साल की देरी की, जिसमें नागापट्टनम पावर एंड इंफ्राटेक या एनपीएल के ऋण खाते में धोखाधड़ी का खुलासा हुआ और पटेल दारा-झालावाड़ राजमार्ग को दिए गए ऋण की शर्तों में भी बोर्ड की मंजूरी से एकतरफा बदलाव किए गए. सेबी ने कहा है कि ऑडिट समिति द्वारा 'तीसरी तिमाही के परिणामों को न अपनाने और गैर-सिफारिशों' के लिए ऑडिट समिति के कारणों की जांच करने वाला उसका संचार 03 जून 2022 को ऑडिट समिति के समक्ष नहीं रखा गया था. सेबी द्वारा अनुवर्ती ईमेल जारी करने के बाद 28 जून, 2022 को सभी निदेशकों को इसकी जानकारी हुई. मिनट्स को इस तरह से तैयार किया गया था कि वास्तविक कार्यवाही को सटीक रूप से दर्ज नहीं किया जा सका और प्रारूपण में पूर्वाग्रह का पता चला. सेबी की विपरीत सलाह के बावजूद ऑडिट समिति के पुनर्गठन का प्रयास; और प्रबंधन द्वारा पहले उठाए गए रुख को सही ठहराने के लिए बाद में कई कानूनी राय मांगी गई.

कंपनी के statutory auditors को भी किया तलब
रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (ROC) नई दिल्ली के जांच अधिकारियों ने अपनी जांच के संबंध में पीटीसी इंडिया के वैधानिक लेखा परीक्षकों (statutory auditors) को भी तलब किया है. लोढ़ा एंड कंपनी के पार्टनर गौरव लोढ़ा को आरओसी ने तलब किया था, जिसमें कहा गया था कि उसने खातों में विभिन्न विसंगतियां, उल्लंघन और गैर-अनुपालन देखे हैं. पवन सिंह एमडी और सीईओ थे, जो फिलहाल फोर्स्ड लीव पर हैं, जबकि पूर्व चेयरमैन मिश्रा अब कंपनी के सीएमडी हैं. सेबी ने इन दोनों पर गंभीर कुप्रबंधन का आरोप लगाया है.

आरबीआई भी कर रहा जांच
सूत्रों का कहना है कि आरबीआई भी राजीब मिश्रा के आचरण की जांच कर रहा है. मिश्रा को सेबी के एक नोटिस में उन्हें और सिंह को कंपनी में स्टीयरिंग व्हील कहा गया था और उन्हें कॉर्पोरेट प्रशासन की विफलता के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था.


 


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