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बेफिक्र रहें, दिसंबर तक पेट्रोल-डीजल के दामों में नहीं होगा इजाफा!
तेल कंपनियां प्रति लीटर घाटे का हवाला देते हुए दाम बढ़ाना चाहती हैं, लेकिन फिलहाल ऐसा नहीं कर सकेंगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
तेल कंपनियां पिछले कुछ वक्त से घाटे का हवाला दे रही हैं. उनका कहना है कि बाजार मूल्य से कम में पेट्रोल-डीजल बेचने से उन्हें प्रति लीटर घाटा उठाना पड़ रहा है. ऐसे में यह आशंका लगातार बनी हुई है कि पहले से आसमान पर पहुंच चुकी पेट्रोल-डीजल की कीमतें फिर बढ़ सकती हैं. हालांकि, ये बढ़ोत्तरी दिसंबर से पहले मुमकिन नजर नहीं आती. ऐसा इसलिए नहीं कि मोदी सरकार को आम आदमी का दर्द दिखाई दे रहा है या दिसंबर तक वो महंगाई को नीचे लाने के लिए कोई कारगर कदम उठाने जा रही है. दरअसल, इसकी वजह कुछ और नहीं, चुनावी मौसम है.
सरकार करेगी भरपाई
हिमाचल प्रदेश में कल यानी 12 नवंबर को विधानसभा चुनाव होने हैं और दिसंबर में गुजरात चुनावी दौर से गुजरेगा. ऐसे में कंपनियां तेल के दाम बढ़ाकर सरकार को नाराज करने का रिस्क मोल लेना नहीं चाहतीं. वैसे, खबर ये भी है कि सरकार ऑयल कंपनियों को पेट्रोल-डीजल की रिटेल बिक्री पर होने वाले नुकसान की भरपाई कर सकती है. एक मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि नुकसान की भरपाई जून से दिसंबर की अवधि तक के लिए दी जाएगी. पेट्रोलियम मंत्रालय ने नुकसान का आकलन करना भी शुरू कर दिया है. दिसंबर के बाद यानी गुजरात इलेक्शन पूरे होने के बाद कंपनियों को दाम बढ़ाने की इजाजत होगी.
जनता को नहीं मिला फायदा
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल पर है. यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद यह 139 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई थी, जो 2008 के बाद इसका उच्चतम स्तर था. कच्चे तेल में इजाफे के साथ तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के दामों में लगभग हर रोज बढ़ोत्तरी की थी, जिसकी वजह से पेट्रोल 100 रुपए प्रति लीटर के पार चला गया है. हालांकि, जब कच्चा तेल नीचे गिरा, तब इसका फायदा जनता को नहीं दिया गया. कंपनियों ने तर्क दिया कि उन्हें पुराना घाटना पाटना है और सरकार भी खामोशी से जनता की जेब कटती देखती रही.
अप्रैल से नहीं बदले दाम
तेल कंपनियों ने छह अप्रैल के बाद से पेट्रोल-डीजल के रिटेल दामों में कोई बदलाव नहीं किया है. लिहाजा, उनका कहना है कि इससे उन्हें प्रति लीटर 10 रुपए के आसपास घाटा हो रहा है. रिपोर्ट में बताया गया है कि इसके बावजूद कंपनियां दाम नहीं बढ़ाएंगी, क्योंकि चुनाव हैं. हालांकि, इसके बाद वह नुकसान की भरपाई के लिए कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं और इस अवधि यानी दिसंबर तक उनके नुकसान की भरपाई सरकार कर सकती है.
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