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फिर भी Paytm नुकसान में, Q2 में घाटा बढ़कर 571.5 करोड़ रुपये, रेवेन्यू में तेजी जारी
रेवेन्यू के मामले में कंपनी ने अच्छा प्रदर्शन किया है. दूसरी तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू पिछले साल इसी तिमाही से 76.2 परसेंट बढ़कर 1,914 करोड़ रुपये रहा है
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्ली: Paytm का घाटा बढ़ता ही जा रहा है, इस पेमेंट ऐप को चलाने वाली One 97 Communications ने अपने नतीजे जारी किए हैं. जिसमें कंपनी ने दूसरी तिमाही में 571.5 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड घाटा दिखाया है, जो कि पिछले वित्त वर्ष इसी तिमाही में 473.5 करोड़ रुपये था. हालांकि पिछली तिमाही से तुलना करें तो घाटा कम हुआ है, वित्त वर्ष 23 की पहली तिमाही में घाटा 645.4 करोड़ रुपये था. कंपनी ने बताया है कि कर्मचारियों के बेनेफिट्स और पेमेंट प्रोसेसिंग चार्जेस बढ़ने की वजह से घाटे में इजाफा हुआ है.
घाटा बढ़ा लेकिन रेवेन्यू में इजाफा
हालांकि रेवेन्यू के मामले में कंपनी ने अच्छा प्रदर्शन किया है. दूसरी तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू पिछले साल इसी तिमाही से 76.2 परसेंट बढ़कर 1,914 करोड़ रुपये रहा है. पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 1086 करोड़ रुपये रहा था. रेवेन्यू में ये बढ़ोतरी लोन ग्रोथ, मर्चेंट सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू, बिल पेमेंट्स में बढ़ोतरी की वजह से आई है. कंपनी ने अपनी फाइलिंग में बताया है कि उसकी पेमेंट सर्विसेज रेवेन्यू में सालाना आधार पर 56 परसेंट का इजाफा हुआ है, जो बढ़कर दूसरी तिमाही में 1173 करोड़ रुपये हो गया है.
Paytm का MTU बढ़ा
Paytm का पेमेंट मार्जिन या पेमेंट रेवेन्यू (प्रोसेसिंग कॉस्ट हटाकर) पिछली तिमाही के मुकाबले 15 परसेंट बढ़कर 443 करोड़ रुपये हो गया है. Paytm का औसत मंथली ट्रांजैक्टिंग यूजर्स पिछले साल के मुकाबले 39 परसेंट हो गया है. कंपनी का buy-now-pay-later, पर्सनल और मर्चेंट लोन 349 करोड़ रुपये हो गया है, जो कि पिछले की इसी तिमाही में 293 करोड़ रुपये रहा है, रेवेन्यू में ये इजाफा तिमाही आधार पर 29 परसेंट बढ़ा है.
लोन डिस्बर्समेंट भी बढ़ा
लोन डिस्बर्समेंट दूसरी तिमाही में पिछली तिमाही के मुकाबले 482 परसेंट बढ़कर 7313 करोड़ रुपये रहा है. लेंडिंग पार्टनर्स के जरिए कुल लोन डिस्बर्स 92 लाख रहा है, जो कि सालाना आधार पर 224 परसेंट और तिमाही आधार पर 8 परसेंट का इजाफा है. तिमाही आधार पर लोन डिस्बर्समेंट 32 परसेंट बढ़ा है. कंपनी ने बताया कि ऑफलाइन मर्चेंट्स से सब्सक्रिप्शन (और MDR) रेवेन्यू, डिवाइस बिजनेस और ऑनलाइन मर्चेंट्स से ऊंचे GMV से भी पेमेंट सर्विस के रेवेन्यू में इजाफा देखने को मिला है.
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