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BCG प्रमोटर सहित कई कंपनियों के खाते SEBI ने किए फ्रीज, क्या कुछ बड़ा होने की आशंका थी?

बाजार नियामक सेबी ने 2003 से 2022 तक 13 हजार से ज्यादा डीमैट खातों को फ्रीज किया है. NSDL की साइट पर इसकी जानकारी मौजूद है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी SEBI नियमों को लेकर बेहद सख्त है और उसके उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की जाती है. सेबी का मुख्य उद्देश्य निवेशकों को सुरक्षा प्रदान करना है. साथ ही, यह संस्था, ट्रेडर्स और निवेशकों को किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी और स्कैम के खिलाफ मदद भी प्रदान करती है. सत्यम जैसे बड़े घोटालों के बाद से सेबी की सख्ती और भी ज्यादा बढ़ गई है. SEBI की तरफ से समय-समय पर ऐसे डीमैट अकाउंट्स को फ्रीज करने के आदेश भी जारी किए जाते हैं, जो नियमों के उल्लंघन या फिर किसी किस्म की धोखाधड़ी में शामिल हैं. 

NDSL पर मौजूद है जानकारी 
SEBI ने BCG प्रमोटर सुरेश रेड्डी का अकाउंट फ्रीज कर दिया है. उनका खाता 21 नवंबर को फ्रीज हुआ है. इसके साथ ही कई दूसरी कंपनियों के खाते भी फ्रीज किए गए हैं. ऐसे में यह सवाल पूछा जा रहा है कि क्या कुछ बड़ा होने की आशंका के चलते ऐसा किया गया? सेबी 2003 से लेकर इस साल नवंबर तक 13 हजार से ज्यादा अकाउंट्स को फ्रीज कर चुका है. नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) ने अपनी वेबसाइट पर इसकी जानकारी दी है. NSDL ने बताया है कि सेबी के निर्देशानुसार कुछ डीमैट अकाउंट को फ्रीज किया गया है. वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के अनुसार 5 मई 2003 से लेकर 30 नवंबर 2022 तक कुल 13012 खाते फ्रीज किए गए हैं. NSDL ने फ्रीज अकाउंट होल्डर का नाम और पैन कार्ड के साथ सभी जानकारी वेबसाइट पर दी हुई है.

क्यों फ्रीज होते हैं खाते?
Demat अकाउंट दो तरह से फ्रीज होता है, पहला Voluntary Freeze और दूसरा Regulatory Freeze. पहली वाली स्थिति तब होती है, जब आप अपनी मर्जी से ऐसा करवाते हैं. कहने का मतलब है आप किसी अवधि तक खाता इस्तेमाल नहीं करना चाहते, तो आप खुद उसे फ्रीज करवा सकते हैं. ये डीमैट की सुरक्षा के लिए है. Regulatory Freeze तब होता है जब SEBI की तरफ से ऐसा आदेश दिया जाता है, जैसा कि इस मामले में है. खाता क्यों फ्रीज किया गया, इसके कई कारण होते हैं. धोखाधड़ी आदि की आशंका के साथ-साथ यदि आप अपने Demat अकाउंट को लंबे समय के लिए इनएक्टिव यानी निष्क्रिय छोड़ देते हैं, तो उसे फ्रीज कर दिया जाता है.    

इन पर भी रहती है नजर 
सेबी ऐसी संस्थाओं और लोगों पर भी नजर रखता है, जो नियमों का उल्लंघन कर निवेश संबंधी सलाह देते हैं. कुछ समय पहले सेबी ने हेवन रिसर्च सिक्योरिटी एडवाइजरी (HRSA) और उसके मालिक को छह महीने के लिए प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित कर दिया था. SEBI ने HRSA पर यह कार्रवाई बिना ऑथराइजेशन के निवेश सलाहकार सेवाएं प्रदान करने के लिए की थी. इतना ही नहीं सेबी ने अपने फाइनल ऑर्डर में कहा था कि कंपनी ने नवंबर 2016 से 2019 के दौरान अपने क्लाइंट्स से 19.50 लाख रुपए एकत्र किए थे, जो उसे तीन महीनों के अंदर रिफंड करने होंगे.

क्या है SEBI का नियम?
बाजार नियामक सेबी के नियमानुसार, कोई भी शख्स या कंपनी मनमानी तरीके से निवेश टिप्स नहीं दे सकती. इसके लिए उसे बकायदा SEBI से मंजूरी लेनी होती है और रजिस्ट्रेशन कराना होता है. इसी तरह, कुछ वक्त पहले मोमेंटम टिप्स (Momentum Tips) और उसके मालिक अजय कुमार मुखिया के खिलाफ भी कार्रवाई की गई थी. सेबी ने अनधिकृत तौर पर इंवेस्टमेंट सर्विसेज देने के लिए कंपनी और उसके मालिक को तीन साल के लिए सिक्योरिटीज मार्केट से प्रतिबंधित कर दिया था. सेबी की ऐसी कार्रवाई का मतलब साफ है कि कोई भी शख्स या कंपनी मनमानी तरीके से निवेश टिप्स नहीं दे सकती. इसके लिए उसे बकायदा SEBI से मंजूरी लेनी होती है और रजिस्ट्रेशन कराना होता है. 

क्या है NSDL?
अब यह भी समझ लेते हैं कि जिस नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) की वेबसाइट पर सेबी के निर्देशों के अनुसार खाते फ्रीज करने की जानकारी है, वो आखिर है क्या? NSDL देश की पहली डिपॉजिटरी फर्म है. इसकी स्थापना 1996 में हुई थी. NSDL नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE के लिए काम करती है. इसमें IDBI Bank, HDFC Bank सहित कुछ अन्य फर्म की भी हिस्सेदारी है. NSDL अपना आईपीओ लॉन्च कर सकती है. इस साल जून तक इस डिपॉजिटरी सर्विस फर्म में IDBI Bank की कुल हिस्सेदारी 26.1% थी. NSDL की तरह CDSL भी डिपॉजिटरी फर्म है.    

क्या होती हैं डिपॉजिटरी फर्म?
डिपॉजिटरी फर्म एक तरह से बैंक की भूमिका निभाती हैं. जिस तरह बैंक आम जनता के पैसों को सुरक्षित रखती है, ठीक वैसे ही डिपॉजिटरी फर्म काम करती हैं. ये आपके द्वारा खरीदे हुए शेयर, बांड, डिबेंचर या प्रतिभूतियां को इलेक्ट्रॉनिक रूप में सुरक्षित जमा रखती हैं. जिस तरह बैंक की सेवाओं का लाभ उठाने के लिए हमें Bank Account खुलवाना होता है, वैसे ही डिपॉजिटरी फर्म की सेवाओं के लिए डीमैट अकाउंट जरूरी है. इन संस्थाओं की स्थापना मुख्य उद्देश्य था कागजी कार्रवाई से होने वाली परेशानियों और खामियों से छुटकारा दिलाना. 


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