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अब हमें भारत से बाहर रीजनल स्तर पर सोचने की जरूरत है- नवीन कुंडु
ईबिक्स कैश के प्रबंध निदेशक नवीन कुंडु ने कहा कि हम भारत में क्या कर रहे हैं, आज हमारी सरकार दुनिया को एक अलग भारत दिखा रही हैं। हम इंडिया में जी 20 करने जा रहे हैं।
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
बिजनेस वर्ल्ड के समिट में बताते हुए ईबिक्स कैश के प्रबंध निदेशक नवीन कुंडु ने कहा कि हम भारत में क्या कर रहे हैं, आज हमारी सरकार दुनिया को एक अलग भारत दिखा रही हैं. हम इंडिया में जी 20 करने जा रहे हैं.नवीन कुंडु ने कहा कि आज हमारे साथी समित गर्ग ने एक डाटा पेश किया जो बहुत ही सकारात्मक है. मुझे लगता है कि भारत की कंपनियों को हम क्षेत्रीय स्तर पर सोचने की जरूरत है न कि सिर्फ देश के स्तर पर सोचने की जरूरत है. जब दुनिया प्लान करती है तो वो क्षेत्रीय स्तर पर सोचते हैं. भारत की कंपनियों को भारत से बाहर निकलना चाहिए. जब दुनिया की कंपनियां ऐसा सोच सकती है और कर सकती है तो हम क्यों नहीं कर सकते हैं.हम अपने मेक इन इंडिया के जरिए क्या ये नहीं कर सकते हैं.नवीन कुंडु ने ये बात इस सवाल पर कही कि क्या भारतीय इवेंट कंपनियां ग्लोबल नहीं हो सकती.
क्या भारत ग्लोबल हो सकता है
ईमा के पूर्व प्रेसीडेंट शाबास जोसेफ ने इस मामले पर बोलते हुए कहा कि अभी हम ग्लोबल होने के लिए तैयार नहीं है. न तो हमारे पास अभी तकनीक है और न ही मेन पावर है और न ही फाइनेंशियल बैकअप है कि हम सस्टेन कर पाए. हमें ट्रांसफार्म होने की जरूरत है. हमें एक-दूसरे से सीखने की जरूरत है. हमें सिंगल होकर ग्लोबल नहीं जाना चाहिए हमें ग्रुप में ग्लोबल होकर जाना चाहिए. और आप देंखेंगे की तब रिसोर्स उस लक्ष्य को पाने के लिए पर्याप्त हो रहे हैं.
फ्रीबीज की आदत को छोड़ना होगा
इस मामले पर अपनी बात कहते हुए देवराज सान्याल यूनीवर्सल म्यूजिक के एमडी ने कहा कि समस्या ये है कि क्या भारत ग्लोबल हो सकता है. क्यों नहीं हो सकता है.ग्लोबली इवेंट होते हैं क्योंकि टिकट बिकती है क्योंकि वहां स्पोंसर आसानी से मिलते हैं. मैंने इस बिजनेस में 15 से 20 साल बिताए हैं . मेरे पास रोज सुबह इतने मैसेज होते हैं जिसमें फ्री टिकट के लिए कहा होता है. मैं उन्हें कहता हूं भूल जाओ फ्री टिकट. मैं कहता हू कि अगर भारत की इवेंट इंडस्ट्री को ग्लोबल हब होना है तो आपको पे करना होगा, फ्री बीज को भूलना होगा. पैसा वास्तविक होता है.
क्या एटीट्यूड चेंज होना चाहिए
इमा के प्रेसीडेंट समित गर्ग ने कहा कि ये बात सही है कि हमारे अंदर बहुत सारे इंटरनल करेक्शन की जरूरत है. और ये हमारे दिमाग में सोचने से होगा. हमें बड़ा सोचने की जरूरत है. हमें एक रुपये दस रुपये 100 रुपये की बात छोड़कर 1000 रुपये की बात सोचनी होगी. प्रशासन के स्तर पर बड़े बदलाव की जरूरत है. कोई और नहीं करने वाला है हमें ही करना होगा. कोविड के बाद जी 20 को होस्ट कर रहा है हमने हाल ही में एससीओ को भी होस्ट किया है. चीजें सही दिशा में जा रही हैं. जब हम गंभीर कारोबार में के बारे में सोचते हैं तो हम देखते हैं कि सरकार जब कुछ अच्छा कर रही है तो इससे सभी को प्रेरणा मिलता है. हम तैयार नहीं हैं लेकिन हम इसके लिए कैपेबल हैं. हमें सरकार के साथ मिलकर इस काम को करना होगा. पिछले कुछ समय में ब्यूरोक्रेसी अगल तरीके से बात करने लगी है वो कहते हैं नए आइडिया लाइये.
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