होम / बिजनेस / अब इस मुद्रा में हो सकेगा अंतर्राष्ट्रीय कारोबार, सरकार ने दी इजाजत
अब इस मुद्रा में हो सकेगा अंतर्राष्ट्रीय कारोबार, सरकार ने दी इजाजत
कॉमर्स मंत्रालय की ओर से दी गई इस जानकारी के अनुसार अब एक्सपोर्ट और इंम्पोर्ट से जुड़ा कारोबार रुपये में हो सकेगा. इससे कारोबारियों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
भारत सरकार ने एक्सपोर्ट और इंपोर्ट से जुड़े कारोबारियों के लिए एक और राहत दी है. कॉमर्स मंत्रालय की ओर से दी गई इस जानकारी के अनुसार अब एक्सपोर्ट और इंम्पोर्ट से जुड़ा कारोबार रुपये में हो सकेगा. जानकारों का मानना है कि इससे एक्सपोर्ट और इंम्पोर्ट से जुड़े कारोबारियों को ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा और पैसा उन्हें सीधे अपने अकाउंट में ही मिल सकेगा. आरबीआई इसकी इजाजत जुलाई में ही दे चुका है. इसे भारत की ट्रेड पॉलिसी में बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है.
क्या होगा इसका फायदा
कॉमर्स मंत्रालय के इस फैसले के फायदे के बारे में बताते हुए अर्थशास्त्री एस पी शर्मा कहते हैं कि सरकार के इस फैसले से हमारी करेंसी मजबूत होगी. अब तक हम हमारे कारोबारी अगर व्यापार करते थे तो उन्हें भुगतान डॉलर में होता था. लेकिन अब उन्हें सीधे रुपये में भुगतान मिल पाएगा. वो कहते हैं कि इससे हमारी करेंसी तो मजबूत होगी ही साथ ही हमारी करेंसी को डॉलर के मुकाबले ज्यादा ताकत भी मिल पाएगी. क्या डॉलर की बढ़ती कीमत और रुपये घटती कीमत के दुष्प्रभाव को भी रोकेगा तो वो कहते हैं बिल्कुल ये तो होगा ही लेकिन हमारी करेंसी को और ज्यादा ताकत मिलेगी.
आरबीआई पहले ही दे चुका है अनुमति
आरबीआई जुलाई के महीने में ही इसे अनुमति दे चुका है. आरबीआई ने इस बाबत अपना एक सर्कुलर भी जारी किया था. जिसमें वो बैंकों को इस बाबत काम करने के निर्देश दे चुका है. आरबीआई ने ये व्यवस्था मौजूदा फोरेन ट्रेड पॉलिसी में एक पैराग्राफ जोड़ते हुए पैराग्राफ 2.52 (डी) को अधिसूचित किया है. इसके बाद अब आयात-निर्यात के सौदे निपटाने, बिल बनवाने, और भुगतान की अनुमति देता है. इसके लिए देश के अधिकृत डीलर बैंकों द्वारा विशेष वोस्ट्रो खाते खोलने जरूरी होंगे.
क्या आयातकों को नुकसान नहीं होगा
इस सवाल के जवाब में अर्थशास्त्री एस पी शर्मा कहते हैं कि आयातकों को फायदा तब होता है जब डॉलर और रुपये में स्टेबिलिटी बनी हुई हो. लेकिन मौजूदा माहौल में और विश्व अर्थव्यवस्था और हमारी मुद्रा के दूरगामी फायदों को देखकर ऐसा नहीं होगा. इस निर्णय से हमारे कारोबारियों को फायदा ही होगा.
टैग्स