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खाद्य पदार्थों की कमी से हो सकता है भयावह अकाल

प्रमुख व्यक्तियों को और फौज को हमेशा, हर मामले में प्राथमिकता दी जाती है. इस वक्त देश में खाद्य पदार्थों की सप्लाई आवश्यक मानवीय जरूरतों से भी कम है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

उत्तरी कोरिया में लम्बे समय से चल रही खाद्यान्न की कमी से भुखमरी का संकट पैदा हो गया है जिससे देश के नागरिकों पर जानलेवा संकट मंडरा रहा है. एक्सपर्ट्स की मानें तो इस वक्त देश में खाद्य पदार्थों की सप्लाई मानवीय जरूरतों से भी कम है. फिलहाल देश 1990 के अकाल के बाद से अब तक का सबसे खराब दौर देख रहा है. उत्तरी कोरिया में वर्ष 1990 में पड़े भयंकर अकाल को “Arduous March” के नाम से जाना जाता है. इस दौरान भुखमरी की वजह से लाखों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी.
 

बहुत गंभीर है खाद्य पदार्थों की कमी का मामला 
विभिन्न प्रकार के डाटा, सैटेलाईट फोटोज, संयुक्त राष्ट्र द्वारा की गयी जांच और दक्षिण कोरियाई संस्थाओं द्वारा की गयी जांच के आधार पर कहा जा सकता है कि, उत्तरी कोरिया में खाद्य पदार्थों की सप्लाई न्यूनतम मानवीय जरूरतों को पूरा करने की मात्रा से भी नीचे जा पहुंची है. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो, अगर खाद्यान्न को बराबर रूप में बांटा भी जाए तो भी खाद्यान्न की कमी से मौतें जरूर होंगी क्योंकि उत्तरी कोरिया में प्रमुख व्यक्तियों को और फौज को हमेशा, हर मामले में प्राथमिकता दी जाती है. कुछ दक्षिण कोरियाई संस्थाओं और अधिकारियों की मानें तो देश के कुछ भागों में खाद्य पदार्थों की वजह से मृत्यु होने का सिलसिला शुरू भी हो चुका है. 
 

आखिर क्यों कम पड़ रहा है खाद्यान्न? 
संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संस्थान के अनुसार, कोविड-19 महामारी से पहले उत्तरी कोरिया की लगभग आधी आबादी पोषण की कमी से जूझ रही थी. लगभग तीन सालों तक देश की सीमायें बंद रहने और घरों में लोगों के बंद रहने से हालत केवल और खराब हुए हैं. सरकार की तटस्थ नीतियों और पिछले एक साल के दौरान किये गए रिकॉर्ड मिसाइल टेस्ट्स की वजह से बहुत से एक्सपर्ट्स खाद्यान्न में हुई इस कमी के पीछे उत्तरी कोरिया के तानाशाह नेता, किम-जोंग-उन (Kim Jong Un) और प्योंग्यांग (Pyongang) को वजह मानते हैं. 
 

अगर ये नहीं किया तो और खराब हो सकते हैं हालात
अमेरिका द्वारा मानवीय अधिकारों की रक्षा के लिए शुरू किये गए प्रोग्राम, ‘Human Rights Watch’ में वरिष्ठ रिसर्चर लीना यून का मानना है कि, उत्तरी कोरिया को अपने बॉर्डर को खोल देना चाहिए और व्यापार की फिर से शुरुआत करनी चाहिए. इसके साथ-साथ कृषि के क्षेत्र को बेहतर बनाने के लिए उन्हें वस्तुएं इकठ्ठा करनी चाहिए क्योंकि लोगों को खिलाने के लिए उन्हें खाद्य पदार्थों की जरूरत है. लेकिन इस वक्त उत्तरी कोरिया आइजोलेशन को बढ़ावा दे रहा है जिससे जनता पर दबाव बढ़ रहा है. 
खराब मौसम और बाढ़ के चलते पिछले साल उत्तरी कोरिया की फसल की उपज 2021 में पैदा हुई फसल के मुकाबले 4% तक कम थी. इन प्रभावों के मिश्रण और सरकार की गलत इकनोमिक रणनीतियों के चलते पहले से ही परेशानियों का सामना कर रही जनसंख्या पर बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ेगा. 

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