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2026 में Retail Industry 1.03 ट्रिलियन की इकोनॉमी क्रॉस करेगे: अरविंद मेहंदीरत्ता
अरविंद मेहंदीरत्ता ने कहा कि ये सच है कि पेंडेमिक के बाद ट्रेडीशनल ट्रेड और बढ़ गया है, जबकि मॉर्डन ट्रेड का शेयर कम हुआ है. एक रिटेलर के लिए फैक्ट बहुत जरूरी है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
राजधानी दिल्ली में हो रहे BW रिटेल वर्ल्ड ग्रुप के रिटेल लीडरशिप समिट के कीनोट सेशन को संबोधित करते हुए मेट्रो कैश एंड कैरी इंडिया के एमडी और सीईओ,अरविंद मेहंदीरत्ता ने कहा कि आज कस्टमर के व्यवहार को कोई नहीं जान सकता है. वो कहां से शॉपिंग करेगा ये वो ही तय करता है. आज रिटेल सेक्टर में इतने तरीके मौजूद हैं कि आप दिन से लेकर रात तक कभी भी शॉपिंग कर सकते हैं.
ग्राहक के व्यवहार को कोई नहीं जान सकता
ग्राहक के व्यवहार को समझना आसान काम नहीं है. ये कोई नहीं जान सकता कि आखिर वो कैसे शॉपिंग करेगा किस माध्यम से शॉपिंग करेगा. आज मौजूदा दौर में शॉपिंग आवर सीमित नहीं है बल्कि असीमित हो गए हैं लोग देर रात को भी शॉपिंग करते हैं और वो अपने ऑफिस से भी शॉपिंग कर लेते हैं. आज उन्हें हर चीज आसानी से मिल रही है, जल्दी डिलिवरी हो रही है. हर तरह की समस्याओं के लिए लोग वन स्टॉप शॉप की तरह देख रहे हैं. इसी का नतीजा है कि टाटा अपने एप के साथ आया है.
2026 तक एक ट्रिलियन की हो जाएगी इकोनॉमी
अरविंद मेहंदीरत्ता ने कहा कि पायनियर वो लोग होते हैं जो फ्यूचर ट्रेंड को पहले देख पाते हैं. मेरे मित्र अनुराग इसके बारे में पहले ही बता चुके हैं. पूरी इंडस्ट्री का साइज मौजूदा समय में 810 मिलियन डॉलर है. अगर हम बहुत ही सुरक्षित तरीके से सोचते हुए इसकी ग्रोथ को नौ प्रतिशत भी आंकते हैं तो 2026 तक ये 1.03 ट्रिलियन की इकोनॉमी हो जाएगी. अगर हम इसमें कृषि को भी जोड़ देते हैं तो ये और बड़ी हो जाती है. हमारे देश में कई तरह के स्टोर काम कर रहे हैं जो अलग-अलग तरह के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. हमारे देश के पारंपरिक ट्रेड पर नजर डालें तो साल2022 83 प्रतिशत है. मॉडर्न ट्रेड 9.8 प्रतिशत ई कॉमर्स 7.2 प्रतिशत है. आने वाले समय में ई कॉमर्स मॉर्डन मार्केट सेक्टर से आगे निकल जाएगा. जबकि ट्रेडीशनल ट्रेड पहले की तरह होता रहेगा. अब तक बी टू सी बिजनेस टू कस्टमर और बी टू बी यानी बिजनेस टू बिजनेस के बारे में और कई तरह के दूसरे ट्रेड के बारे में सुना है.
डिजिटाइलेशन ऑफ इकोनॉमी
अरविंद मेहंदीरत्ता ने कहा कि अर्थव्यवस्था का डिजिटाइलाइजेशन होना चाहिए, फॅार्मलाइसजेशन ऑफ इकोनोमी, जिसमें हम देख रहे हैं कि जीएसटी का कलेक्शन लगातार बढ़ रहा है. रिस्क कैपिटल को आसानी से मुहैया होना चाहिए. आज हमारे देश में बहुत से यूनीकॉर्न हैं, स्टार्टअप हैं जो काम कर रहे है. कई कंपनियों ने अपने आईपीओ को लाने में देरी कर दी है. क्योंकि उन्हें लगता है कि वो सस्टेन नहीं कर पाएंगें. आज हम भले ही हमारे देश में कई तरह के शॉपिंग मॉल देख रहे हों या दूसरी चीजें लेकिन महामारी के दौर में उन्होंने बहुत कुछ देखा है.
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