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फ्रीबीज को लेकर निर्मला सीतारमण ने दिया अहम बयान, जानिए उन्‍होंने क्‍या कहा

वित्‍त मंत्री ने कहा कि आज आपको एक बात तो ये माननी पड़ेगी कि कोई भी, किसी भी बैंक को किसी हवाला देकर ये फोन नहीं कर सकता है कि उसे लोन दे दो,भले ही वो योग्‍य हो या न हो.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण आने वाली 1 फरवरी को देश का बजट पेश करने जा रही हैं. सभी की नजरें इस पर लगी हैं कि आखिर वो बजट में मध्‍यम वर्ग से लेकर दूसरे तबकों के लिए क्‍या नए घोषणाएं करती हैं. लेकिन उससे पहले उन्‍होंने एक टॉक शो में देश में चल रहे कई मामलों को लेकर अहम बयान दिया है। इसमें फ्रीबीज और एनपीए जैसे दूसरे कई अहम विषय हैं. 


वित्‍त मंत्री ने बताया कि कैसे कम हो रहा है एनपीए 
वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण, पांचजन्‍य के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्‍य में आयोजित कार्यक्रम "भारत की बात" में संपादक हितेश शंकर और कंसल्‍टेंट एडिटर तृप्ति श्रीवास्‍तव के साथ बातचीत करते हुए उन्‍होंने कहा कि पिछली सरकार और मौजूदा सरकार को एक विषय में हम अलग कर सकते हैं. पिछली सरकार के एक बैंक को ट्रीट करने का तरीका वर्सेस हमारी सरकार के बैंक को ट्रीट करने का तरीका, इन दोनों में जमीन आसमान का फर्क है. इसमें आईडियोलॉजिकली फर्क भी है.  बैंक का देश की आर्थिक व्यवस्था में बड़ा योगदान है वह अपने प्रोफेशनल तरीके से काम कर सके ऐसी उन्हें फ्रीडम देनी चाहिए. 

यह हमारी सरकार की अप्रोच है जबकि पिछली सरकार का एप्रोच था कि बैंक के द्वारा हमारी पार्टी के कार्यकर्ता, हमारे नेता, भाई, भतीजा जो लीगल नहीं है वो बैंक से कैसे बेनिफिट ले सकते हैं. 2014 से हमने इसे कैसे सुधारा इसे अगर देखें तो एक्चुअली ऐसेट क्वालिटी परफॉर्मेंस में हमारी सरकार ने पहचाना कि 4 ऐसे कदम उठाने की जरूरत है. पहले बैंक को यह रिकॉग्नाइज करना पड़ेगा कि एनपीए एक प्रॉब्लम है. वह भी एक कठिन काम है, क्योंकि हर एक अकाउंट में देखना पड़ता था, कितना दिया गया है, कितना बैलेंस है, कितना एनपीए है. 

इसका क्या असर पड़ेगा फिर उसके बाद अगला चरण है उसको सॉल्व करना. तीसरा बैंक को डिकैपिटलाइज करना, बैंक को कितना पैसा मिला और नहीं मिला यह करने के लिए बैंक को फिर से पैसा दो सरकार से पैसा दो. यह सब करने के बाद उसके बाद बैंक को रिफॉर्म करो. इतना तो जरूर है कि मोदी जी की सरकार में कोई किसी बैंक को फोन करके यह नहीं कह सकता कि उनकी सिक्योरिटी है या नहीं आप उन्हें लोन दे दो. अब बैंकों को ऐसे फोन कॉल नहीं जाते हैं. जो बैंक का पैसा है उसे उनके पीछे लग कर वापस लो यह रिफॉर्म भी हमारी सरकार ने उठाए हैं.

देखिए वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पांचजन्‍य के कार्यक्रम में क्‍या कहा-

फ्रीबीज पर क्‍या बोली वित्‍त मंत्री 
वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि फ्रीबीज के विषय पर सब लोग भाग ले रहे हैं और सब लोग चर्चा कर रहे हैं. लेकिन दरअसल चर्चा ये हो रही है कि वो फ्रीबीज है या नहीं. ये फ्रीबीज है या नहीं. इस चर्चा को एक दूसरे पर आरोप लगाने के लिए किया जा रहा है. लेकिन मेरा मानना है कि विषय वह नहीं है. विषय यह है कि आप चुनाव के समय एक वादा करते हैं और सरकार में आने के बाद अपने बजट का आंकलन करते हैं कि आपके राज्‍य की हालत अच्‍छी है या नहीं. मान लीजिए आप ने चुनाव में कहा कि हम फ्री बिजली देंगे. 

लेकिन सरकार में आने के बाद और राज्य की व्यवस्था देखने के बाद आप उसे कर पाएंगे या नहीं कर पाएंगे सच्चाई का पता चलता है. राज्य की वित्‍त व्यवस्थाएं अच्छी हैं और वो सरकार बिजली फ्री देने का फैसला करती है तो आपको उसके लिए बजट की व्यवस्था करनी चाहिए और साल के अंत में उसका हिसाब किताब देना चाहिए. अगर आप ऐसा करते हैं तो वह फ्रीबीज नहीं है. अपने वादे को आप राज्‍य के बजट के अनुरूप दे सकते हैं तो जरूर देना चाहिए. 

लेकिन कई राज्यों में हम देख रहे हैं कि वादा कर दिया, बिजली दे दी लेकिन जब पेमेंट देने की बारी आई तो कह दिया जाता है कि मोदी जी देंगे. वोटर से वादा आपने किया, राजनीति आपने की, लेकिन जब देने की बारी आई तो आप देख लो यह बर्डन हमारा नहीं है. उसके बाद वो बकाया बढ़ता चला जाता है और पता नहीं उसे कौन पेमेंट करेगा. पावर सेक्टर में आज ही दिक्कत है जो डिस्कम्स राज्य सरकार के अंतर्गत हैं उन्हें पेमेंट दिया नहीं जाता है और वह जो बिजली पैदा करने वाले हैं उन्हें पेमेंट नहीं देते. ऐसे में बिजली पैदा करने वाले उत्पादन करते रहे लेकिन उन्हें पैसा ना मिले तो ऐसे में कैसे काम चलेगा. मुफ्त की बिजली की जिम्मेदारी लेने के लिए कोई तैयार नहीं है. यही सर दर्द है, अगर आपके स्टेट के पास पैसा है तो उसे पेमेंट करना चाहिए 


गरीब कल्‍याण आज भी पहली प्राथमिकता 
वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि चैरिटी के लिए सोशल स्‍कीम जो पहले चलाई जाती थी वो आज भी लगातार जारी हैं. उस पर कोई कटौती नहीं हुई है, क्योंकि अगर उससे गरीबों को उसका फायदा मिल रहा है तो वह सरकार करती रहेगी. उन्‍होंने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए हम कैपिटल एक्सपेंडिचर को लगातार बढ़ा रहे हैं. हमने एक ही साल में 35% बढ़ा दिया. इस बात में सभी अर्थशास्त्री एक राय होंगे कि रिवेन्यू एक्सपेंडिचर में अगर हम ₹1 खर्च करते हैं तो 40 पैसे का फायदा होता है लेकिन अगर हम इंफ्रास्ट्रक्चर में ₹1 खर्च करते हैं तो लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म में ₹3 से ज्‍यादा का फायदा होता है. जब उनसे पूछा गया कि आपके लिए सबसे ज्‍यादा चुनौतीपूर्ण बजट कौन सा था तो इस पर उन्‍होंने कहा कि मैं इसका कोई रोचक जवाब नहीं देने जा रही हूं. लेकिन हर बजट अपने आप में चुनौतीपूर्ण ही होता है.


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