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डेटा प्रोटक्शन बिल आने के बाद बदल जाएगा मोबाइल एप की सहमति का तरीका
सरकार की कोशिश है कि किसी भी आम आदमी के डेटा का कोई भी कंपनी या संस्थान उसका गलत इस्तेमाल न करे.अगर वो ऐसा करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
केंद्र सरकार ने डिजिटल डेटा प्रोटक्शन बिल पर राय के लिए जनता के सामने रख दिया है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार डेटा प्रोटक्शन बिल आने के बाद अलग-अलग ऐप द्वारा ली जाने वाली सहमति का तरीका बदल जाएगा. सरकार इस बिल के पास होने के बाद ऐसे नए तरीकों पर विचार कर रही है, जिसके अनुसार कोई भी मोबाइल एप केवल उतनी ही जानकारी ले सकेगा जितनी उसके एप के लिए जरूरी होगी.
मौजूदा समय में क्या है प्रावधान
मौजूदा समय में हम जब भी कोई एप प्ले स्टोर से डाउनलोड करते हैं तो ऐसे में उस एप के द्वारा कई तरह की जानकारी मांगी जाती हैं, जिसमें कई बार ऐसा भी होता है कि अगर आप कोई जानकारी नहीं देना चाहते तो वो एप काम नहीं करता है. ऐसे में मजबूरन उपभोक्ता को वो परमिशन ना चाहते हुए भी देनी पड़ती है. ऐसे में अब सरकार ने सरकार ने अब प्रावधान कर दिया है कि अगर कोई भी मोबाइल एप जरूरत से ज्यादा डेटा की मांग करते है तो उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकेगी. सरकार उनके द्वारा ली जाने वाली सहमति के तरीकों को बदलने पर भी विचार कर रही है। ऐसे तरीकों को लाने पर विचार किया जा रहा है जो आसान हो.
माता-पिता की सहमति का फार्मेट होगा तय
सरकार ने इस डेटा प्रोटेक्शन बिल में ये प्रावधान किया है कि अगर किसी भी बच्चे की जानकारी लेने से पहले उसके माता पिता की सहमति होना आवश्यक है. लेकिन इस प्रावधान में सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर ये कैसे तय होगा कि जो परमिशन दी गई है उसमें माता पिता की सहमति शामिल है. ऐसे मे सूत्र ये भी बता रहे हैं सहमति देने का तरीका क्या होगा इसका फॉरमेट बिल आने के बाद तय किया जाएगा.
बढ़ाई भी जा सकती है जुर्माने की राशि
डेटा प्रोटेक्शन बिल के जरिए सरकार ने अलग अलग तरह के डेटा की गोपनीयता का उल्लंघन करने पर अलग अलग किस्म की जुर्माने का प्रावधान किया गया है. लेकिन सूत्रों का कहना है कि सरकार आने वाने दिनों में अगर जरूरत महसूस हुई तो इस जुर्माने की राशि को मौजूदा 250 करोड़ से 500 करोड़ तक जो तय की गई है उसे और बढ़ाया जा सकता है. इस जुर्माने के जरिए सरकार का मकसद है कि किसी भी स्थिति में डेटा का प्रोटेक्शन किया जाए, जिससे आम आदमी के गोपनीय डेटा की रक्षा कर सके.
मोबाइल नंबर से नहीं किया जा सकता गलत इस्तेमाल
मौजूदा समय में अगर आप किसी रेस्टोरेंट या खाने की साइड से या शॉपिंग ब्रांड से शॉपिंग करते हैं तो उसे आप अपना मोबाइल नंबर देते हैं. अभी ये होता है कि जैसे ही आप उसे अपना नंबर देते हैं आने वाले दिनों में आपके मोबाइल पर वहां से अलग अलग तरह के मार्केटिंग मैसेज आने शुरू हो जाते हैं. जो कई बार इतने ज्यादा होते हैं कि आम आदमी परेशान हो जाता है. इस बिल के आने के बाद वो सब भी डेटा प्रोटेक्शन में आएगा. ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी.
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