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बैक्टीरिया से बना जैल बन सकता है सीमेंट का विकल्प, पर्यावरण सुधरेगा, घर भी होंगे मजबूत
यह हाइड्रो जैल सीमेंट से कहीं ज्यादा टिकाऊ और लंबे समय तक चलने वाला है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्लीः सीमेंट-क्रंकीट से बनने वाली इमारतों से पर्यावरण पर भी काफी असर पड़ता है. ऐसे में इसके विकल्प के तौर पर वैज्ञानिकों ने एक बैक्टीरिया से बने हाइड्रो जैल को तैयार किया है, जिसके प्रयोग से घर बनाने में मजबूती आएगी और इसकी लागत भी सीमेंट से कम पड़ती है. यह हाइड्रो जैल सीमेंट से कहीं ज्यादा टिकाऊ और लंबे समय तक चलने वाला है.
सह सकेगा इतना भार
हाइड्रो जैल हर वर्ग सेंटीमीटर में 380 किलो तक का भार आसानी से झेल लेगा. सीमेंट और ईंट का प्रयोग किए बिना लोग जैल से बने घरों में अच्छे से रह सकते हैं. यह सीमेंट के साथ ही ईंट का भी काम करेगा, जिससे लागत काफी कम हो जाएगी. वहीं घरों में ध्वनि प्रदूषण भी कम होगा. इस जैल को बनाने में प्रदूषण नहीं होगा. हीट की बजाय बैक्टीरिया से फोटोसिंथेसिस, यानी प्रकाश की मदद से तैयार होता है. इस विधि से हाइड्रो जेल बनाने से कार्बन का उत्सर्जन होने की बजाय उसका अवशोषण होता है.
ऐसे बनेगा हाइड्रो जैल
सीमेंट बनाने की प्रक्रिया में चूना तोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाली हीट से कार्बन गैसों का उत्सर्जन होता है. इस बॉयोकंक्रीट को तैयार करने वाली कंपनी प्रोमेथस के लॉरेन बर्नेट ने बताया कि बैक्टीरिया को लाइट को उत्सर्जित करने वाले डायोड के जरिए पानी से भरे बायोरिएक्टर्स टैंक के जरिए तैयार किया जाता है.
एक घंटे में तैयार होता है जैल
टैंक को बुलबुलों से भरकर रखा जाता है, जिससे इन्हें कार्बन डाईऑक्साइड मिलती है. हर 4 से 6 घंटे में बैक्टीरिया दोगुने हो जाते हैं. इन्हें दूसरे टैंकों में डाल दिया जाता है. घंटे भर में क्रिस्टल से भरा हाइड्रो जेल तैयार हो जाता है.अगले साल इसका औद्योगिक उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है. बालू को अगर जैल के साथ मिला दिया जाए तो फिर सीमेंट जैसा पदार्थ तैयार हो जाएगा. बांस का लचीलापन स्टील से बहुत ज्यादा 28 हजार पाउंड प्रति वर्ग इंच है. इसे इमारतों की कॉलम, बीम, दीवार, छत और सीढ़ियों में सरिया की जगह लगा सकते हैं. स्विस फेडरल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी इमारतों में इस्तेमाल के लिए बांस की क्षमता बढ़ाने पर शोध कर रहा है.
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