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रूस के तेल निर्यात पर लगे कैप से क्या भारत में महंगा होगा तेल, जानिए जवाब
रूस के तेल पर 60 डॉलर का कैप लगाने के बाद भारत में तेल के दाम मामूली तौर पर बढ़ने की सम्भावना है. क्यूंकि भारत में जिस शिपिंग सेक्टर और दूसरे साधनो से तेल आता है उसके दामों में बढ़ोतरी हों सकती है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
G7 और यूरोपीय यूनियन ने यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे युद्ध में रूस के तेल बाजार को बड़ा झटका दिया है. इन दोनों संगठनों ने रूस के तेल निर्यात पर $60 प्रति बैरल का कैप लगा दिया है, जिसके जिसके बाद माना जा रहा है कि तेल के दामों में बढ़ोतरी हो सकती है. लेकिन हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या इस कैप का असर भारत पर भी पढ़ने जा रहा है क्या भारत जो कि पिछले लंबे समय से रूस से तेल खरीद रहा है क्या अब भारत को भी इस कैप के कारण महंगा तेल खरीदना पड़ेगा इन सभी सवालों के जवाब तलाशने के लिए हमने बात की है ऑइल एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा से....
आखिर क्या है $60 का कैप
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध लगातार जारी है इस बीच रूस पर आर्थिक प्रतिबंधों को और मजबूत करते हुए अब G7 और यूरोपीय संघ ने दो दिन पूर्व रूस से निर्यात होने वाले तेल पर $60 प्रति बैरल का कैप लगाने का फैसला किया था, जिसके बाद रूस से निकलने वाला तेल महंगा हो जाएगा इन दोनों संगठनों ने यह फैसला प्रतिबंधों को और मजबूत बनाते हुए किया था, हालांकि यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इससे रूस को कोई बहुत बड़ा नुकसान नहीं होगा. वहीं दूसरी और रूस ने इन प्रतिबंधों को मानने से इनकार कर दिया.
क्या भारत में महंगा हो जाएगा तेल
G7 और यूरोपीय संघ के प्रतिबंध का क्या असर पड़ेगा
नरेंद्र तनेजा कहते हैं कि हमें यह समझना पड़ेगा कि इसका मामूली असर कैसे पड़ेगा. वह बताते हैं मौजूदा समय में जिन टैंकरों से तेल आयात होता है और जिन कंपनियों का इंश्योरेंस करती है उनमें ज्यादातर कंपनियां इन्हीं देशों की है जो देश G7 और यूरोपीय संघ में शामिल है दुनिया भर में इन्हीं देशों की कंपनियां तेल का इंश्योरेंस करती है और तेल को एक जगह से दूसरी जगह लाने और ले जाने के लिए टैंकर मुहैया कराती है. अब $60 प्रति बैरल का कैप बढ़ने के बाद इंश्योरेंस और शिपिंग 2 सेक्टरों के दामों में बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका मामूली असर तेल के दाम पर होता है. हालांकि भारत में तेल के दाम ना तो सरकार के हाथ में है और ना ही किसी एजेंसी के हाथ में इन दामों को बाजार तय करता है.
क्या हो सकता है इसका समाधान
ऊर्जा विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा कहते हैं की मौजूदा समय में भारत, रूस से 65 से $70 प्रति बैरल के हिसाब से तेल खरीद रहा है. इसका एक समाधान यह हो सकता है कि भारतीय कंपनियां रूप से कहें कि वह तेल के दाम को $60 प्रति बैरल पर लेकर आए जिससे उन्हें जो महंगी कीमत का सामना करना पड़ रहा है उसकी क्षतिपूर्ति हो सके.
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