✕

होम / बिजनेस / जानिए डिजिटल करेंसी और पेमेंट्स एप में अंतर, क्‍या कहते हैं जानकार

जानिए डिजिटल करेंसी और पेमेंट्स एप में अंतर, क्‍या कहते हैं जानकार

डिजिटल करेंसी को इस्‍तेमाल करने के लिए 8 बैंकों को तय किया गया है.  इसके इस्‍तेमाल के लिए आपको वॉलेट को एक्टिवेट करना बेहद जरूरी है. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक ने डिजिटल करेंसी लॉन्‍च की है. सेंट्रल बैंक द्वारा जारी की गई यह डिजिटल करेंसी एक तरह का कानूनी दस्‍तावेज है. डिजिटल करेंसी एक तरह की सामान्य करेंसी की तरह ही है और इसे एक दूसरे को ट्रांसफर भी किया जा सकता है. डिजिटल करेंसी भी ठीक उसी तरह काम करती है जैसे हम नोट या फिर अलग-अलग तरह की सिक्कों को इस्तेमाल करते हैं. लेकिन सवाल यह खड़ा होता है कि अगर डिजिटल करेंसी वैसी ही है तो फिर ये यूपीआई UPI, आरटीजीएस RTGS और नेफ्ट NEFT  से कैसे अलग है.


आखिर क्‍या है डिजिटल करेंसी
रिटेल डिजिटल करेंसी एक तरह का डिजिटल टोकन है, जिसे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने जारी किया है. रिजर्व बैंक ने इस मुद्रा के परिचालन के लिए 2 फेस में 8 बैंकों को इसकी जिम्मेदारी दी है. इन बैंकों में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया SBI, आईसीआईसीआई बैंक ICICI Bank, यस बैंक YES Bank, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक IDFC First Bank, यह चार बैंक ऐसे हैं जो इसके फर्स्ट फेस में काम कर रहे हैं. आरबीआई ने सेकंड फेस के लिए भी बैंकों का चयन कर लिया है, जिसमें बैंक ऑफ बड़ौदा BOB, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया UBI, एचडीएफसी बैंक HDFC Bank, कोटक महिंद्रा बैंक Kotak Mahindra, 2nd फेज में इस डिजिटल करेंसी के लेनदेन में शामिल होंगे. 


कैसे काम करेगी ये करेंसी 
डिजिटल करेंसी एक तरह से मौजूदा करेंसी की ही तरह काम करेगी, जिसमें आपके पास डिजिटल नोट करेंसी और डिजिटल कॉइन करेंसी शामिल होंगे. इसके इस्‍तेमाल के लिए ग्राहकों को बैंकों के द्वारा एक वॉलेट दिया जाएगा, जिसके जरिए इस डिजिटल करेंसी का लेनदेन हो सकेगा. इस डिजिटल वॉलेट को आप अपने एंड्रॉयड स्मार्टफोन से इस्तेमाल कर सकते हैं. मौजूदा समय में पहले चरण के चार बैंकों के साथ ग्राहक इन बैंकों द्वारा दिए गए डिजिटल वॉलेट के जरिए क्लोज यूजर ग्रुप, जिसमें कि कस्टमर और मर्चेंट दोनों शामिल हैं वो कुछ ही शहरों में इस्तेमाल कर पाएंगें. इसमें मुंबई, नई दिल्ली, बेंगलुरु, भुवनेश्वर जैसे शहर शामिल हैं. आप अगर इन शहरों में रहते हैं तो इन 4 बैंकों के जरिए ही डिजिटल करेंसी के लिए वॉलेट को लिंक कर सकते हैं और उसी के जरिए आप उस डिजिटल रूपी को अलग-अलग मरचेंट्स पर इस्तेमाल कर सकते हैं.  डिजिटल करेंसी के लेनदेन के लिए वॉलेट कंपलसरी है.


कैसे अलग है ये मौजूदा पेमेंट एप से 
जानकार बताते हैं कि डिजिटल करेंसी के परिचालन के लिए ना तो किसी तरह के बैंक सिस्टम की जरूरत होगी और ना ही इसके लिए आरबीआई को करेंसी छापनी पड़ेगी. मसलन नोट्स या फिर सिक्कों को नहीं छापना पड़ेगा.  इससे पैसों का इंस्‍टेंट ट्रांसफर भी हो जाएगा और आदमी को जल्दी से सुविधा भी मिलेगी.


आखिर UPI, RTGS और दूसरे पेमेंट ऑप्शन से कैसे अलग है डिजिटल करेंसी
जानकार कहते हैं कि डिजिटल करेंसी एक तरह से भारत की करेंसी है, जिसे आप सीधे इस्तेमाल कर सकते हैं. जबकि यूपीआई के तहत अलग-अलग एप्लीकेशंस का इस्तेमाल करना पड़ता है, जिसमें गूगल पे, फोन पे, नेफ्ट, और आरटीजीएस जैसे पेमेंट एप शामिल हैं. अलग-अलग तरीके से पेमेंट ट्रांसफर के लिए इस्तेमाल होते हैं सबसे बड़ा अंतर यह है कि यूपीआई ट्रांजैक्शन करने के लिए आपके खाते में पैसे होने जरूरी हैं जबकि डिजिटल करेंसी एक तरह का लीगल टेंडर है, जिसे आप सीधे इस्‍तेमाल कर सकते हैं. 
जानकार कहते हैं डिजिटल करेंसी केवल पेमेंट एप तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह एक तरह की करेंसी है. डिजिटल रुपया एक तरह से आप की स्टोर वैल्यू की तरह काम करता है जबकि यूपीआई के ट्रांजैक्शन करने के लिए आपके अकाउंट में पैसे होने जरूरी है, जिसके बाद ही आप यूपीआई और अलग-अलग तरह की ऐप जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर से अपने पैसे को ट्रांसफर करते हैं.


टैग्स
सम्बंधित खबरें

भारत में कारोबार बढ़ाने की तैयारी में डुमारे, EV और AI टेक्नोलॉजी पर रहेगा फोकस

डुमारे ग्रुप भारत में अपने कारोबार का विस्तार करने के साथ इंजन की दक्षता बढ़ाने, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कंट्रोल सिस्टम और क्लीन मोबिलिटी सॉल्यूशंस पर काम कर रहा है.

4 hours ago

बच्चों पर सोशल मीडिया के असर को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, मेटा के फेसबुक-इंस्टाग्राम पर उठे सवाल

याचिका में आरोप लगाया गया है कि फेसबुक और इंस्टाग्राम के एल्गोरिदम बच्चों को लंबे समय तक स्क्रीन पर सक्रिय रहने के लिए प्रेरित करते हैं. याचिकाकर्ता ने बच्चों की मानसिक सेहत, निजता और ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर भारत में विशेष सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग की है.

5 hours ago

टाटा ग्रुप के विवाद पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की सलाह, आपसी बातचीत से सुलझाएं मतभेद

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टाटा ग्रुप के नेतृत्व से आंतरिक मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने और समूह में सामान्य स्थिति बहाल करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि टाटा ग्रुप भारतीय अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है और इस विवाद का सार्वजनिक रूप से जारी रहना ठीक नहीं है.

5 hours ago

2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन का लक्ष्य, 50 हजार करोड़ रुपये के निर्यात पर सरकार की नजर

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- सेना के आधुनिकीकरण और स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने पर है जोर, रक्षा बजट बढ़कर रिकॉर्ड 7.85 लाख करोड़ रुपये हुआ

5 hours ago

SBI के मुनाफे में 14.28% की बढ़ोतरी, दूसरी तिमाही में ₹23,038 करोड़ का शुद्ध लाभ

नेट इंटरेस्ट इनकम में 14.69% का उछाल, बढ़कर ₹49,143 करोड़ हुई; बैंक की एसेट क्वालिटी में भी सुधार

5 hours ago


बड़ी खबरें

SBI के मुनाफे में 14.28% की बढ़ोतरी, दूसरी तिमाही में ₹23,038 करोड़ का शुद्ध लाभ

नेट इंटरेस्ट इनकम में 14.69% का उछाल, बढ़कर ₹49,143 करोड़ हुई; बैंक की एसेट क्वालिटी में भी सुधार

5 hours ago

बच्चों पर सोशल मीडिया के असर को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, मेटा के फेसबुक-इंस्टाग्राम पर उठे सवाल

याचिका में आरोप लगाया गया है कि फेसबुक और इंस्टाग्राम के एल्गोरिदम बच्चों को लंबे समय तक स्क्रीन पर सक्रिय रहने के लिए प्रेरित करते हैं. याचिकाकर्ता ने बच्चों की मानसिक सेहत, निजता और ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर भारत में विशेष सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग की है.

5 hours ago

टाटा ग्रुप के विवाद पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की सलाह, आपसी बातचीत से सुलझाएं मतभेद

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टाटा ग्रुप के नेतृत्व से आंतरिक मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने और समूह में सामान्य स्थिति बहाल करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि टाटा ग्रुप भारतीय अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है और इस विवाद का सार्वजनिक रूप से जारी रहना ठीक नहीं है.

5 hours ago

2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन का लक्ष्य, 50 हजार करोड़ रुपये के निर्यात पर सरकार की नजर

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- सेना के आधुनिकीकरण और स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने पर है जोर, रक्षा बजट बढ़कर रिकॉर्ड 7.85 लाख करोड़ रुपये हुआ

5 hours ago

रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन ने पकड़ी रफ्तार, 12 साल में तीन गुना बढ़ा आंकड़ा; 99.7% नेटवर्क हुआ इलेक्ट्रिक

आंकड़ों के मुताबिक, 1950 तक देश के केवल 0.7 फीसदी रेल नेटवर्क का विद्युतीकरण हुआ था. 1961 में यह आंकड़ा 1.3 फीसदी और 2001 तक 23.6 फीसदी पहुंचा. इसके बाद भी रफ्तार सीमित रही, लेकिन 2014 के बाद इलेक्ट्रिफिकेशन के काम में तेजी आई.

10 hours ago