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IndiGo ने आखिर क्यों 30 एयरक्राफ्ट किए ग्राउंडेड! ये कोई प्लानिंग है या आने वाला संकट?
इंडिगो अकेली एयरलाइन नहीं है जो नए विमानों का इंतजार करने की बजाय अपनी क्षमता को हासिल करने के लिए लीज-बेस्ड मॉडल पर गई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्ली: देश की टॉप एयरलाइन IndiGo ने अपने 30 एयरक्राफ्ट ग्राउंडेड कर दिए हैं, जो कि उसके बेड़े का 10 परसेंट हिस्सा है. ग्लोबल सप्लाई चेन में दिक्कतों के चलते ये फैसला किया गया है, एयरलाइन को चलाने वाली को Interglobe Aviation ने ये जानकारी दी है. सितंबर के अंत तक एयरलाइन के पास 279 विमानों का बेड़ा था.
ग्लोबल संकट को देखते हुए फैसला
Interglobe Aviation की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि "हालांकि हमारे ग्राहकों की सेवा के लिए पर्याप्त क्षमता को तैनात करना हमारी तत्काल प्राथमिकता है, हम अपने OEM (original equipment manufacturer) भागीदारों के साथ सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं ताकि हमारे नेटवर्क और ऑपरेशन को जारी रखा जा सके." कंपनी ने कहा कि हमारी कोशिश है कि वैश्विक संकट की वजह से हम 30 एयरक्राफ्ट को ग्राउंडेड करके उसके आर्थिक असर को कुछ कम कर सकें. IndiGo ने कहा कि वह लीज एक्सटेंशन के जरिए री-डिलीवरी को धीमा करने, बेड़े में विमानों को फिर से शामिल करने की खोज और रुकावटों को कम करने के लिए 'वेट लीज विकल्पों' का मूल्यांकन कर रही है. 'वेट लीज' व्यवस्था में, विमान और चालक दल देते समय लीज पर देने वाला उड़ानों का परिचालन नियंत्रण रखता है.
कितना होगा इसका असर
एविएशन कंसल्टेंसी फर्म CAPA इंडिया ने हाल ही में कहा कि एविएशन इंडस्ट्री को रखरखाव और इंजन से जुड़े मुद्दों के कारण 75 विमानों या बेड़े के 10-12% के ग्राउंडिंग के बाद गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. इंडिगो, जिसके पास 57.7% मार्केट शेयर है और उसके बेड़े में 279 विमान हैं, एक विमान के बंद होने पर भी काफी बड़े व्यवधान का सामना करना पड़ता है, यह देखते हुए कि यह 74 घरेलू और 26 अंतरराष्ट्रीय डेस्टिनेशन को जोड़ने वाली 1,600 से ज्यादा दैनिक उड़ानें ऑपरेट करता है. एयरलाइन ने सितंबर तिमाही में अपनी तीसरी सीधी तिमाही में ₹1,583.3 करोड़ का नुकसान दर्ज किया. इंडिगो ने बताया कि वो सप्लाई चेन में व्यवधान, ऊंची ईंधन की कीमतों और एक्सचेंज रेट में अस्थिरता को लेकर चिंतित है.
लीज मॉडल पर एयरलाइंस
इंडिगो अकेली एयरलाइन नहीं है जो नए विमानों का इंतजार करने की बजाय अपनी क्षमता को हासिल करने के लिए लीज-बेस्ड मॉडल पर गई है. एयर इंडिया, विस्तारा और स्पाइसजेट ने भी छोटी से मध्यम अवधि की क्षमता की जरूरतों को पूरा करने के लिए विमानों को लीज पर लेने का विकल्प चुना है. एयर इंडिया ने 15 महीने की योजना बनाई है जिसके तहत उसे 30 विमान लीज पर मिलेंगे. सप्लाई चेन संकट की वजह से एयरलाइंस को क्षमता पर दबाव झेलना पड़ता है, एक्स्पर्ट्स मानते हैं कि ईंधन की कीमतों में अस्थिरता और रुपये की कमजोरी से संकट और बढ़ेगा.
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