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चीनी की कीमतों में अचानक क्यों आ रही उछाल, जानिए मीलों की क्या है स्ट्रैटजी?
ट्रेड हाउस ने पहले प्रति टन 34,000 रुपये की चीनी बेची थी, लेकिन अब कीमतों में उछाल आ चुकी है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
मुंबई: सरकार द्वारा इस साल चीनी के निर्यात कोटा में कटौती के बाद कीमतों में आई उछाल के कारण भारतीय चीनी मिलें विदेशी खरीदारों को 4,00,000 टन चीनी की आपूर्ति करने के लिए अनुबंध पर फिर से बातचीत कर रही हैं. दुनिया के दूसरे सबसे बड़े चीनी निर्यातक भारत में मिलों द्वारा फिर से बातचीत करने से वैश्विक कीमतों को समर्थन मिल सकता है. ऐसा पांच डीलरों ने बताया है.
6 मिलियन टन के निर्यात कोटा को मंजूरी
मिलों ने अगस्त के अंत में ट्रेड हाउस को चीनी बेचना शुरू किया और नई दिल्ली द्वारा इस महीने की शुरुआत में 6 मिलियन टन के निर्यात कोटा को मंजूरी देने से पहले ही निर्यात के लिए लगभग 2 मिलियन टन चीनी की आपूर्ति करने के लिए सौदों पर हस्ताक्षर किए.
कमजोर मिलें दे रहीं धमकी
ग्लोबल ट्रेड हाउस के मुंबई स्थित एक डीलर ने कहा, "कुछ कमजोर मिलें जिन्होंने पहले ही सौदों पर हस्ताक्षर कर दिए थे, वे कॉन्ट्रैक्ट्स का सम्मान नहीं कर रही हैं. जब तक खरीदार उच्च कीमतों पर फिर से बातचीत करने के लिए तैयार नहीं होते हैं, तब तक वे डिफॉल्ट करने की धमकी दे रहे हैं."
चीनी की कीमतें प्रति टन बढ़ गईं
मुंबई स्थित एक अन्य डीलर ने बताया कि दो महीने पहले पश्चिमी राज्य महाराष्ट्र और पड़ोसी राज्य कर्नाटक में मिलों ने ट्रेड हाउस को प्रति टन लगभग 34,000 रुपये की चीनी बेची थी, लेकिन अब कीमतें 37,000 रुपये से ऊपर चली गई हैं, जिससे कुछ मिलों को समझौतों से दूर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा है.
चीनी की कीमतों में क्यों हुई वृद्धि
रुपये में रिकॉर्ड गिरावट के कारण भारतीय चीनी की कीमतों में वृद्धि हुई और वैश्विक कीमतों इसलिए उछाल आया, क्योंकि भारत ने अपना निर्यात कोटा 11 मिलियन से घटाकर 6 मिलियन टन कर दिया. नई दिल्ली स्थित एक ग्लोबल ट्रेड हाउस के डीलर ने कहा कि ट्रेड हाउस ने मिलों के साथ खरीद समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद विदेशी खरीदारों को चीनी बेची. उन्होंने बताया, "ट्रेड हाउस अब फंस चुके हैं. वे मिलों की तरह फिर से बातचीत या डिफॉल्ट नहीं कर सकते. उनकी प्रतिष्ठा है और इसे बनाए रखने के लिए उन्हें इन सौदों पर नुकसान उठाना पड़ता है."
ट्रेड हाउस को क्यों होना पड़ा मजबूर?
डीलरों ने बताया कि जब महाराष्ट्र में मिलों ने डिफॉल्ट कर दिया तो ट्रेड हाउस को उत्तरी राज्य उत्तर प्रदेश की मिलों से खरीदारी करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि भारतीय मिलों ने नवंबर से फरवरी तक 40 लाख टन चीनी निर्यात करने के कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किए हैं.
भारतीय चीनी अभी भी दुनिया में सबसे सस्ती
मुंबई स्थित एक डीलर ने बताया कि वैश्विक स्तर पर कीमतों में उछाल के बाद भी भारतीय चीनी अभी भी दुनिया में सबसे सस्ती है. भारत मुख्य रूप से इंडोनेशिया, बांग्लादेश, इराक, मलेशिया, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और अफ्रीकी देशों को चीनी निर्यात करता है. नई दिल्ली स्थित एक अन्य डीलर ने बताया कि कई मिलों ने अपने आवंटित निर्यात कोटा का आधा बेचने के बाद निर्यात सौदों पर हस्ताक्षर करना बंद कर दिया है, क्योंकि उन्हें कीमतों में और उछाल की उम्मीद है."
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