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ये कैसा बायकॉट? भारत ने चीन से की जमकर खरीदारी, लेकिन ड्रैगन बना रहा 'कंजूस'
चीन के सीमा शुल्क विभाग के अनुसार, 2022 के पहले नौ महीनों में दोनों देशों के बीच व्यापार 100 अरब अमेरिकी डॉलर को पार कर गया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
चीनी सामान के बहिष्कार को लेकर अभियान चलते रहते हैं. खासकर फेस्टिवल सीजन में इन अभियानों में एकदम से तेजी आ जाती है. दिवाली से पहले भी लोगों से चीन में बने प्रोडक्ट्स से दूर रहने की अपील की गई, लेकिन इसके बावजूद चीनी LED और दूसरे डेकोरेशन उत्पादों की जबरदस्त डिमांड देखी गई. चीनी कंपनियों ने अप्रैल से ही इस मांग को पूरा करने के लिए भारतीय क्लाइंट्स को सामान भेजना शुरू कर दिया था. बात केवल LED या दूसरे चुनिंदा प्रोडक्ट्स की ही नहीं है, अलग-अलग सेक्टर्स में चीन से हमारी खरीदारी लगातार बढ़ती जा रही है.
100 अरब डॉलर का व्यापार
मीडिया रिपोर्ट्स में चीन के सीमा शुल्क विभाग के हवाले से बताया गया है कि 2022 के पहले नौ महीनों में दोनों देशों के बीच व्यापार 100 अरब अमेरिकी डॉलर को पार कर गया है. वैसे तो दो मुल्कों के बीच व्यापार बढ़ना अच्छी बात है, लेकिन जब इसमें एक देश का हिस्सा ज्यादा हो, तो स्थिति थोड़ी अलग हो जाती है. भारत और चीन के बीच बढ़ रहे व्यापार में चीन का पलड़ा भारी है. दूसरे शब्दों में कहें तो हम चीन से जमकर खरीदारी कर रहे हैं, लेकिन चीन इस मामले में कंजूस है.
व्यापार घाटा 75 अरब डॉलर
दोनों देशों के व्यापार में इस अंतर की वजह से भारत का व्यापार घाटा 75 अरब डॉलर से अधिक पहुंच गया है. चीनी सीमा शुल्क विभाग के आंकड़े बताते हैं कि 2022 के पहले नौ महीनों में कुल द्विपक्षीय व्यापार 103.63 अरब डॉलर तक चला गया, जो पिछले साल इसी अवधि के मुकाबले 14.6 प्रतिशत ज्यादा है. इसमें भारत को चीन का निर्यात 31 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 89.66 अरब डॉलर पर रहा. जबकि इन नौ महीनों में भारत का निर्यात 36.4 प्रतिशत की गिरावट के साथ 13.97 अरब डॉलर पर आ गया. इसके चलते उसका कुल व्यापार घाटा 75.69 अरब डॉलर से अधिक हो गया.
क्या होता है व्यापार घाटा?
पिछले साल भारत-चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार रिकॉर्ड 125 अरब डॉलर के स्तर को पार कर गया था. इस दौरान, भारत को चीन का निर्यात 46.2 प्रतिशत बढ़कर 97.52 अरब डॉलर हो गया था और चीन को भारत का निर्यात 34.2 प्रतिशत बढ़कर 28.14 अरब डॉलर रहा था. 2021 में भारत का व्यापार घाटा 69.38 अरब डॉलर था. व्यापार घाटा का मतलब है कि भारत ने चीन को जितना सामान बेचा है, उससे ज़्यादा खरीदा है.
ज्यादा नुकसान नहीं हुआ
जून 2020 में गलवान घाटी हिंसा में 20 भारतीय जवानों के शहीद होने के बाद भारत में चीनी सामानों के बहिष्कार की मांग तेज हो गई थी. भारत सरकार ने सौ से ज्यादा चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिए थे. लेकिन, उसके बाद भी भारत का व्यापार चीन के साथ बढ़ रहा है. कहने का मतलब है कि भारत के साथ टेंशन से चीन को आर्थिक मोर्चे पर कोई बड़ा नुकसान नहीं दिखाई देता. उल्टा उसकी कंपनियां भारत की जरूरतों को पूरा करके मोटा मुनाफा कमा रही हैं. लिहाजा, ये कहना गलत नहीं होगा कि चीनी सामानों के बहिष्कार का अभियान खास असर नहीं छोड़ पाया.
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