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भारत में जेनेरिक दवाओं की बिक्री में इजाफा, एक्सपोर्ट करने में भी मारी बाजी
भारत में न केवल देश के अंदर जेनेरिक दवाओं की बिक्री में इजाफा देखने को मिला है, बल्कि विश्व भर में इन दवाओं को एक्सपोर्ट करने में बाजी मार ली है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्लीः भारत में न केवल देश के अंदर जेनेरिक दवाओं की बिक्री में इजाफा देखने को मिला है, बल्कि विश्व भर में इन दवाओं को एक्सपोर्ट करने में बाजी मार ली है. पीएम जन औषधि परियोजना के जरिए सस्ती और सही दवाओं की बिक्री बढ़ने से देशवासियों को भी 4 हजार करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई है.
इतनी रही है जेनेरिक दवाओं की बिक्री
दवाओं की बिक्री चालू वित्त वर्ष में 814.21 करोड़ रुपये रही, जिससे नागरिकों को लगभग 4,800 करोड़ रुपये की अनुमानित बचत हुई है. सस्ती कीमतों पर गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लॉन्च किया गया था. योजना के तहत 28 फरवरी 2022 तक लगभग 8,689 प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्र कार्य कर रहे थे. इस बात पर जोर देते हुए कि जन औषधि दवाएं ब्रांडेड दवाओं के बाजार मूल्य से 50-90 फीसदी कम है, सरकार इनको छोटे कस्बों और गांवों में भी ज्यादा से ज्यादा संख्या में खोल रही है.
1.8 ट्रिलियन डॉलर की दवाएं की एक्सपोर्ट
वित्त वर्ष 2021 के दौरान भारत से जेनेरिक दवाओं का एक्सपोर्ट बढ़कर 19.53% हो गया, जो कि वित्त वर्ष 2020 में INR1.4 ट्रिलियन की तुलना में INR1.8 ट्रिलियन से अधिक के मूल्य तक पहुंच गया. फरवरी 2022 तक, देश ने 22 बिलियन अमेरीकी डॉलर से अधिक के फार्मास्यूटिकल्स का निर्यात किया है. संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप जैसे देशों से मजबूत मांग ने भारत की जेनेरिक दवाओं, विशेष रूप से एंटीवायरल और एंटीबायोटिक दवाओं की बढ़ती बिक्री में योगदान दिया.
123 देशों में गई भारत से दवाएं
2020 में, भारत ने संयुक्त राज्य अमेरिका को लगभग 50 मिलियन हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन टैबलेट का निर्यात किया. इसके अलावा, विदेश मंत्रालय ने जर्मनी, ब्राजील, स्पेन, नेपाल, भूटान, बहरीन, मालदीव सहित 123 देशों को अन्य आवश्यक दवाओं की आपूर्ति जारी रखी.
इस तरह से बढ़ गया है देश में जेनेरिक दवाओं का उपयोग
भारत में निरंतर आय वृद्धि और बढ़े हुए बीमा कवरेज के कारण दवा की सामर्थ्य में वृद्धि जारी रहने की उम्मीद है. इसके अलावा, सरकार द्वारा स्वास्थ्य देखभाल पर बढ़ते खर्च और दवाओं की पहुंच और सामर्थ्य को बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न नीतियों की शुरूआत कुछ ऐसे कारक हैं जिनसे भारत के जेनेरिक दवाओं के बाजार के विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
फॉर्मा इंडस्ट्री में आ गया है बूम
एक्सपोर्ट बढ़ने के साथ ही देश में इन दवाओं की खपत बढ़ने के साथ ही देशी फॉर्मा कंपनियों को काफी लाभ पहुंचा है, जो जेनेरिक दवाओं का निर्माण और उनकी बिक्री व एक्सपोर्ट कर रही हैं. संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप भारत से जेनेरिक दवाओं के प्रमुख आयातक हैं.
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