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भारत बना विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की वापसी शुरू
EY की हालिया रिपोर्ट के अनुसार 2025 की पहली छमाही में FPI निवेशकों ने सतर्क रहते हुए भारतीय बाजारों में वापसी की है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago
भारत की अर्थव्यवस्था में जबरदस्त उछाल और नियामकीय सुधारों के चलते साल 2025 की पहली छमाही में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय इक्विटी और ऋण बाजारों में शुद्ध निवेश किया है. EY (अर्न्स्ट एंड यंग) की एक वित्तीय रिपोर्ट के अनुसार, इस बढ़ते भरोसे ने भारत को वैश्विक निवेश मानचित्र पर एक बार फिर प्रमुख स्थान दिलाया है.
रिपोर्ट में बताया गया है कि इस वर्ष भारत का सांकेतिक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) जापान को पार कर सकता है, जिससे भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की अप्रैल 2025 की रिपोर्ट में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि दर 6.5% अनुमानित की गई है, जो वैश्विक औसत 2.8% से काफी अधिक है. वित्त वर्ष 2025 की अंतिम तिमाही में भारत की GDP 7.4% की दर से बढ़ी.
निवेश में लौटे विदेशी निवेशक
साल की शुरुआत में निवेश प्रवाह थोड़े सुस्त थे, लेकिन अप्रैल से जून 2025 के बीच FPI निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजारों में लगभग 4.5 अरब डॉलर का शुद्ध निवेश किया. ऋण बाज़ार में भी 1.54 अरब डॉलर का निवेश हुआ, जो मुख्यतः फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के तहत सरकारी प्रतिभूतियों में किया गया.
EY की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा किए गए नीतिगत सुधारों से निवेशकों के आत्मविश्वास को मजबूती मिली है. इन सुधारों में शॉर्ट टर्म निवेश और कॉरपोरेट ऋण में सीमा नियंत्रणों में ढील, और सरकारी बॉन्ड में निवेश करने वाले FPI के लिए अनुपालन आवश्यकताओं को कम करना शामिल है.
रिपोर्ट के अनुसार, “इन ढीलों से निवेशकों को पोर्टफोलियो संरचना में अधिक लचीलापन मिला है, जो अस्थिर बाजार स्थितियों में लाभदायक सिद्ध हो सकता है.”
बाजार पूंजीकरण और म्यूचुअल फंड में तेज वृद्धि
जून 2025 तक भारत के शेयर बाजार का पूंजीकरण बढ़कर 5.3 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो गया, जिससे यह दुनिया के सबसे बड़े बाज़ारों में शामिल हो गया है. म्यूचुअल फंड उद्योग की कुल परिसंपत्तियाँ मई 2025 में साल-दर-साल 22% बढ़कर 840 अरब डॉलर तक पहुंच गईं, जिसमें 18% निवेश देश के टियर 1 से नीचे के शहरों से आया.
SEBI ने विशेषीकृत निवेश फंड (SIF) के लिए नई व्यवस्था शुरू की है, जिससे हाई नेटवर्थ और संस्थागत निवेशकों को सह-निवेश विकल्प मिल सकें. इसके अतिरिक्त, विदेशी वेंचर कैपिटल निवेशक (FVCI) फ्रेमवर्क को जनवरी 2025 में FPI व्यवस्था के साथ जोड़ा गया है.
आगे की राह और संभावनाएं
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 की दूसरी छमाही में भारत का बाजार परिदृश्य आशाजनक बना हुआ है, हालांकि वैश्विक वस्तु कीमतों में उतार-चढ़ाव, ब्याज दरों में बदलाव और भू-राजनीतिक जोखिमों से यह प्रभावित हो सकता है. भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते में प्रगति और SEBI द्वारा डेरिवेटिव्स पर रुख भी निवेश व्यवहार को प्रभावित करेंगे.
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