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ब्रिटिश गृह मंत्री की अपमानजनक टिप्पणी के बावजूद भारत-UK FTA की उम्मीदें बरकरार!
इस समझौते को लेकर उम्मीदें अभी खत्म नहीं हुई हैं, कई मीडिया रिपोर्ट्स में ये दावा किया जा रहा है कि इस FTA को लेकर दोनों देश अब भी गंभीर हैं
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्ली: ब्रिटेन की गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन (UK home secretary Suella Braverman) के बयानों के बाद भारत और यूके के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) खटाई में पड़ता दिख रहा है, भारत ने ब्रेवरमैन के बयानों पर कड़ी आपत्ति जाहिर की है. दिवाली तक इस समझौते पर दस्तखत होने थे, लेकिन अब ये मुश्किल लग रहा है.
भारत-ब्रिटेन FTA की संभावनाएं बाकी
लेकिन इस समझौते को लेकर उम्मीदें अभी खत्म नहीं हुई हैं, कई मीडिया रिपोर्ट्स में ये दावा किया जा रहा है कि इस FTA को लेकर दोनों देश अब भी गंभीर हैं और इस पर जल्द ही दस्तखत होंगे. भारतीय प्रवासियों पर ब्रेवरमैन की टिप्पणियों के बाद दोनों देशों के बीच इस डील को लेकर जो खटास पैदा हुई, उसके बाद दोनों तरफ के अधिकारियों का कहना है कि वो जल्द ही भारत-यूके FTA की रूपरेखा तैयार करने की उम्मीद करते हैं. उनका कहना है कि इस दिवाली के बाद अक्टूबर के अंत तक नहीं, तो जल्द ही ये समझौता हो जाएगा. बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नवंबर की शुरुआत में ब्रिटेन के दौरे पर जाएंगे. वहां पर प्रंधानमंत्री मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री लिज ट्रस फ्रेमवर्क FTA पर दस्तखत करेंगे. बाकी मुद्दों को बाद में निपटाया जाएगा.
दोनों देशों के हित शामिल, तभी समझौता
एक न्यूज एजेंसी हवाले से, बुधवार को यह पूछे जाने पर कि क्या ब्रिटिश सरकार को अभी भी दीपावली (24 अक्टूबर) तक सौदे को पूरा करने की उम्मीद है. इसके जवाब में ब्रिटिश प्रधानमंत्री के प्रवक्ता ने कहा, "बिल्कुल हम इस मुक्त व्यापार सौदे पर काम कर रहे हैं जो यूके को भारत के बढ़ते मध्यम वर्ग की आपूर्ति में सबसे आगे रखेगा. ब्रिटेन का कहना है कि ये एक ऊंची महत्वाकांक्षाओं वाला समझौता है, इस पर तभी हस्ताक्षर होंगे, जब दोनों देशों के हित शामिल हों.
सुएला ब्रेवरमैन ने क्या कहा
इस डील के ऊपर खतरे के बादल मंडराने लगे थे, जब ब्रिटेन की गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन ने कहा कि उन्हें डर है कि भारत के साथ एक व्यापार समझौते से ब्रिटेन में प्रवासियों की संख्या बढ़ेगी, जबकि भारत पहले से ही वीजा ओवरस्टेयर के सबसे बड़े समूह हैं. उन्होंने कहा कि मेरी कुछ आपत्तियां हैं. इस देश में प्रवासियों को देखिए- यहां पर जो समूह वीजा अवधि बीत जाने के बाद भी रुका हुआ है, उसमें सबसे ज्यादा संख्या भारतीयों की है.
उन्होंने ‘The Spectator’ नाम की एक मैगजीन को दिये इंटरव्यू में कहा कि मुझे भारत के साथ एक खुली सीमा प्रवास नीति (open borders migration policy) के बारे में चिंता है, क्योंकि मुझे नहीं लगता कि लोगों ने ब्रेक्सिट के लिए वोट दिया है. हमने इस संबंध में बेहतर सहयोग को प्रोत्साहित करने और सुविधा देने के लिए पिछले साल भारत सरकार के साथ एक समझौता भी किया था. जरूरी नहीं कि इसने बहुत अच्छा काम किया हो.
ब्रेवरमैन के बयान पर भारत की प्रतिक्रिया
नई ब्रिटिश गृह मंत्री ब्रेवरमैन के इस बयान के बाद से भारत नाराज है. UK के अखबार The Times के मुताबिक भारत में मंत्री ब्रेवरमैन द्वारा की गई "अपमानजनक" टिप्पणी से "हैरान और निराश" हैं. रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने कहा ब्रिटेन को लेकर हमारी सोच अब भी अच्छी है, लेकिन इस तरह के लोग बने रहेंगे तो बातचीत पर असर पड़ेगा. भारत ने मांग की है कि ब्रिटेन की प्रधानमंत्री को सार्वजनिक रूप से अपनी गृहमंत्री के बयान से खुद को अलग करना चाहिए ताकि ट्रेड डील में रुकावट न आए.
क्या है भारत-UK FTA
मुक्त व्यापार समझौता दोनों देशों के लिये काफी अहम है. इस डील जरिये प्रधानमंत्री लिज ट्रस मंदी की दरवाजे पर खड़ी ब्रिटेन की इकोनॉमी को पार लगाना चाहती हैं. इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच उत्पादों और सेवाओं के आयात और निर्यात में रुकावटों को कम किया जाएगा. इस डील के बाद दोनों देश एक दूसरे के प्रोडक्ट्स पर इंपोर्ट ड्यूटी से देंगे. इस तरह से दोनों देश एक दूसरे के उत्पाद पर इंपोर्ट ड्यूटी नहीं लगाएंगे. साथ ही FTA वाले देशों को गैर-FTA वाले देशों के मुकाबले प्राथमिकता भी मिलेगी. दोनों देशों में निवेश बढ़ेगा, जिसका फायदा दोनों देशों को होगा. इंपोर्ट ड्यूटी नहीं मिलने का फायदा ये होगा कि दोनों देशों में एक दुसरे की वस्तुएं सस्ती मिलेंगी.
इस डील के बाद भारत के लिए ब्रिटेन सबसे बड़ा आयातक देश होगा. इस समझौते से ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था 2035 तक 3 बिलियन पाउंड होने की उम्मीद है. भारत इस मुक्त व्यापार समझौते में ब्रिटेन से भारतीयों को वर्क और स्टडी वीजा की संख्या बढ़ाने की मांग कर रहा है. इसके अलावा भारत ने अलग वीजा की भी मांग की है, जिससे 35 साल से कम उम्र के लोग तीन साल के लिए ब्रिटेन में रह सकते हैं.
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