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बजट की तैयारियों में जुटी सरकार को IMF ने दी सलाह, जानें क्या कहा
IMF का कहना है कि भारत में राजकोषीय घाटा कम करने की सुस्त रफ्तार का मतलब है कि उसका कर्ज मौजूदा स्तर के आसपास बना रहेगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत सरकार को आगाह किया है कि उसे राजकोषीय घाटा कम करने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए. IMF का कहना है कि मध्यम अवधि में कर्ज स्थायित्व सुनिश्चित करने के लिए भारत को राजकोषीय घाटा कम करने का अधिक महत्त्वाकांक्षी खाका तैयार करना होगा. आईएमएफ की सलाह ऐसे समय में आई है, जब सरकार वित्त वर्ष 2024 के लिए बजट तैयार करने में जुटी है.
GDP और कर्ज का अनुपात बढ़ेगा
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, IMF ने अपनी वार्षिक परामर्श रिपोर्ट में कहा है कि वित्त वर्ष 2021 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) और कर्ज का अनुपात 89% के उच्चतम स्तर पर था, जो मध्यम अवधि में और बढ़ सकता है. आईएमएफ का अनुमान है कि फाइनेंशियल इयर (FY) 2024 में यह अनुपात FY 2023 के 83.4 फीसदी से बढ़कर 83.9 प्रतिशत हो सकता है.
इससे जोखिम में भी आएगी कमी
आईएमएफ का कहना है कि भारत में राजकोषीय घाटा कम करने की धीमी रफ्तार का मतलब है कि उसका कर्ज मौजूदा स्तर के आसपास बना रहेगा और वित्त वर्ष 2026 से ही इसमें धीरे-धीरे कमी आनी शुरू होगी. लिहाजा, मध्यम अवधि में राजकोषीय स्थायित्व करने के लिए घाटा कम करने के ज्यादा महत्त्वाकांक्षी और बेहतर अनुपालन की जरूरत है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि घाटा कम करने के उपायों की घोषणा से अनिश्चितता कम होगी और जोखिम भी घटेगा.
RBI के प्रयासों को भी मिलेगा बल
IMF की रिपोर्ट कहती है कि राजकोषीय घाटा कम करने से अल्पावधि में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मुद्रास्फीति नियंत्रण के प्रयासों को भी मदद मिलेगी. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब FY-2024 के लिए बजट तैयार किया जा रहा है. सरकार इस दुविधा में है कि अगले वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा तेजी से कम करने पर जोर दिया जाए या बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच वृद्धि को सहारा देने के लिए इसमें नरमी बरती जाए.
कार्यकारी निदेशक ने नकारी रिपोर्ट
बता दें कि वित्त मंत्रालय ने राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम में संशोधन पहले ही टाल दिया है. हालांकि, उसने वित्त वर्ष 2026 में राजकोषीय घाटे को कम कर GDP के 4.5 फीसदी पर सीमित करने की बात जरूर कही है. जबकि FY 2023 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 6.4 प्रतिशत रखा गया है. वहीं, IMF में भारत के कार्यकारी निदेशक केवी सुब्रमणयन ने भारत की राजकोषीय स्थिति पर जोखिम के आईएमएफ के आकलन को नकार दिया है. उनका कहना है कि प्रशासन कर्मचारियों के इस विचार से सहमत नहीं है कि भारत की राजकोषीय स्थिति जोखिम में है. वृद्धि की अनुकूल गति और घाटा कम करने के मजबूत संकल्प के बीच सार्वजनिक कर्ज सही दायरे में है.
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