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Hyundai Motors लेकर आएगी देश का सबसे बड़ा IPO, टूटेगा LIC का रिकॉर्ड

हुंडई मोटर्स (Hyundai Motors) अगले 10 साल में भारत में 32 हजार करोड़ रुपये खर्च करने का ऐलान कर चुकी है. ये पैसे जनरल मोटर्स प्लांट को अधिग्रहित करने से लेकर ईवी मैन्युफैक्चरिंग, चार्जिंग इंफ्रा तक में खर्च होंगे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

साउथ कोरियाई कंपनी हुंडई मोटर (Hyundai Motors) अपनी इंडियन यूनिट आईपीओ (IPO) के तहत 17.5 प्रतिशत तक की हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर रही है. देश के बाजार नियामक के पास शनिवार को दाखिल किए गए ड्राफ्ट पेपर से पता चला है कि यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ हो सकता है. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) को दी गई फाइलिंग के अनुसार, हुंडई मोटर आईपीओ में बिक्री के लिए कुल 812 मिलियन शेयरों में से 142 मिलियन शेयरों लेकर आएगी. आइये जानते हैं कंपनी इन रुपयों को कहां निवेश करेगी?

देश का सबसे बड़ा IPO
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार हुंडई मोटर के आईपीओ का साइज 25 हजार करोड़ रुपये हो सकता है. इसका मतलब है कि ये आईपीओ देश का सबसे बड़ा आईओ होगा. इससे पहले एलआईसी देश का सबसे बड़ा आईपीओ लेकर आई थी, जिसका साइज 21 हजार करोड़ रुपये था. खास बात तो ये है कि हुंडई आईपीओ के तहत फ्रेश शेयर लेकर नहीं आ रही है. ये आईपीओ पूरी तरह से ओएफएस बेस्ड होगा. कंपनी अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा रीटेल इन्वेस्टर्स के लिए रखेगी और बाकी का हिस्सा दूसरे इन्वेस्टर्स के लिए होगा.

तीन दशक से भारतीय बाजार में मौजूदगी

खास बात तो ये है कि देश में करीब 20 साल के बाद किसी ऑटो कंपनी का आईपीओ शेयर बाजार में आ रहा है. इससे पहले मारुति सुजुकी का आईपीओ शेयर बाजार में आया था.
भारतीय ऑटोमोबाइल मार्केट में हुंडई को करीब तीन दशक से ज्यादा का समय बीत चुका है और अब साउथ कोरियन ऑटो कंपनी कथित तौर पर भारतीय शेयर बाजार (Share Market) में लिस्ट होने का मन बना रही है. वहीं, दूसरी ओर इस सप्ताह की शुरुआत में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन कंपनी ओला इलेक्ट्रिक को आईपीओ लाने के लिए पूंजी बाजार नियामक सेबी की मंजूरी मिली है.

यहां खर्च होगा पैसा

जानकारी के अनुसार इस फंड का इस्तेमाल भारत में कैपेक्स प्लान को पूरा करने के लिए, जो अगले 10 सालों में लगभग 32,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान है. हुंडई की निवेश योजनाओं में तालेगांव में जनरल मोटर्स से नए अधिग्रहीत प्लांट के लिए 6,000 करोड़ रुपये और तमिलनाडु में अगले 10 सालों में प्रोडक्शन का विस्तार करने, एक कंपोनेंट इकोसिस्टम विकसित करने, ईवी मैन्युफैक्चरिंग, चार्जिंग इंफ्रा और स्क्ल्डि डेवलपमेंट के डेवलपमेंट के लिए 26,000 करोड़ रुपये का खर्च शामिल है.

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