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एक डॉक्टर, एक वकील और पागलपन...ऐसे शुरू हुई बिसलेरी के ‘Bisleri’ बनने की कहानी
बिसलेरी ने इंडियन मार्केट में मिनरल वॉटर और सोडा के साथ एंट्री ली. उन दिनों आम आदमी के लिए पानी की बोतल खरीदना भले ही संभव नहीं था, लेकिन अमीरों के बीच यह ब्रांड एकदम से लोकप्रिय हो गया.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
पैकेज्ड वॉटर कंपनी 'बिसलेरी' टाटा समूह की होने जा रही है. बोतलबंद पानी की दुनिया में 'बिसलेरी' सबसे जाना-पहचान और प्रतिष्ठित ब्रांड है. इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हर पानी की बोतल को 'बिसलेरी' ही कहा जाता है. कुछ वक्त पहले कंपनी ने लोगों को यही बताने के लिए एक विज्ञापन जारी किया था कि 'हर पानी की बोतल बिसलेरी नहीं होती'. भारतीय बाजार में 'बिसलेरी' की सफलता ने कई कंपनियों को पानी बेचने के लिए आकर्षित किया और आज इस सेक्टर में कई बड़े ब्रांड मौजूद हैं.
इटली में हुई थी शुरुआत
बिसलेरी के 'बिसलेरी' बनने की असल कहानी शुरू हुई थी, भारत को आजादी मिलने के कुछ समय बाद. हालांकि, इससे पहले ही पैकेज्ड वॉटर के रूप में बिसलेरी का जन्म हो चुका था. दरअसल, इटली के बिजनेसमैन Signor Felice Bisleri ने 'बिसलेरी' की स्थापना की थी. उन्होंने अल्कोहल रेमिडी के इरादे से इसे शुरू किया था. Signor Felice के बेहद करीबी दोस्त और फैमिली डॉक्टर थे रॉसी. 1921 में Signor Felice की मौत के बाद बिसलेरी कंपनी डॉक्टर रॉसी के हाथों में आ गई.
शायद पढ़ लिया था भविष्य
डॉक्टर रॉसी ने वकील खुशरू संतकू के साथ मिलकर भारत में बिसलेरी लॉन्च की. उस वक़्त पानी को बेचने की बात करना किसी पागलपन से कम नहीं था. डॉक्टर रॉसी को भी लोगों ने पागल करार दिया, उन्हें समझाया गया कि इसमें पैसे की बर्बादी के सिवा कुछ हासिल नहीं होगा. लेकिन डॉक्टर रॉसी ने शायद भविष्य पढ़ लिया था. 1965 में उन्होंने मुंबई के ठाणे में पहला 'बिसलेरी वॉटर प्लांट' स्थापित किया. उस दौर में पानी की आज जितनी समस्या तो नहीं थी, लेकिन पीने के पानी की गुणवत्ता बहुत खराब थी. लिहाजा रॉसी और संतूक को पता था कि बिसलेरी अमीर और विदेशी पर्यटकों के लिए के वरदान साबित होगी और हुआ भी यही.
पानी और सोडा के साथ एंट्री
बिसलेरी ने इंडियन मार्केट में मिनरल वॉटर और सोडा के साथ एंट्री ली. उन दिनों आम आदमी के लिए पानी की बोतल खरीदना भले ही संभव नहीं था, लेकिन अमीरों के बीच यह ब्रांड एकदम से लोकप्रिय हो गया. शुरुआत में केवल पांच सितारा होटलों और महंगे रेस्टोरेंट में ही बिसलेरी की बोतल उपलब्ध थी. लेकिन ब्रांड को बड़ा बनाने के लिए उसकी पहुंच से 'सीमित' का टैग हटाना ज़रूरी थी. डॉक्टर रॉसी शायद इतनी गहराई में उतरने के लिए तैयार नहीं थे, इसलिए उन्होंने कंपनी को बेचने का फैसला लिया.
4 लाख रुपए में हुआ था सौदा
चूंकि रॉसी और संतूक का पागलपन लोगों के दिलोदिमाग पर छा गया था, इसलिए बिसलेरी को खरीदने वालों की लाइन लग गई. लेकिन इस यूनिक आइडिया को अपना बनाया पारले कंपनी के रमेश चौहान ने. उन्होंने चार लाख रुपए में बिसलेरी खरीदी और आज यह करोड़ों की कंपनी बन गई है. रमेश चौहान के पास अब बिसलेरी के तौर पर एक फेमस ब्रांड था, अब ज़रूरत थी उसे आम आदमी तक पहुंचाना. कुछ ऐसा करना जिससे पानी की बोतल ला जिक्र आते ही हर जुबां पर बिसलेरी का ही नाम आए. उन्होंने अपनी टीम के साथ इस पर दिन-रात काम किया. धीरे-धीरे कंपनी का नाम हर जुबां पर चढ़ता गया. शहर से लेकर गांवों तक इसकी पहुंच बन गई.
टाटा की क्यों जागी दिलचस्पी?
अब सवाल ये उठता है कि आखिर टाटा पानी के बिज़नेस में क्यों उतर रहा है? इसका जवाब है, मुनाफे की ज़बरदस्त संभावना. साफ पानी आज भी भारत में एक बड़ा मुद्दा है. रेस्टोरेंट-होटल आदि में जाने वाले मिनरल बोतल लेना ही पसंद करते हैं. देश में पैकेज्ड वॉटर का मार्केट करीब 20,000 करोड़ रुपए का है और इस बाजार में बिसलेरी की हिस्सेदारी 32% है. कंपनी के पास 122 ऑपरेशनल प्लांट हैं, 4500 डिस्ट्रीब्यूटर और करीब 5000 डिस्ट्रीब्यूशन ट्रक हैं. बिसलेरी के रूप में टाटा को एक जमा-जमाया ब्रांड मिल रहा है, जो आगे मुनाफा ही कमाकर देगा.
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