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केंद्रीय बैंकों के पास क्यों होता है सोने का भंडार? किसके पास है सबसे ज्यादा सोना?

हाल ही में ट्विटर पर वर्ल्ड ऑफ स्टेटिस्टिक्स में दुनियाभर के सभी देशों के गोल्ड रिजर्व की एक लिस्ट जारी की गयी है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

मंदी की आशंकाओं और अमेरिकी डॉलर के कम होते वर्चस्व की बदौलत इस वक्त बहुत से देशों के केंद्रीय बैंक जमकर सोना खरीद रहे हैं. देश के केंद्रीय बैंकों द्वारा अपने फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व को संतुलित बनाये रखने के लिए भी सोने का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं दुनिया में सबसे ज्यादा सोना किस देश के पास है और भारत के पास कितना सोना है?

किसके पास है सबसे ज्यादा सोना?
हाल ही में ट्विटर पर वर्ल्ड ऑफ स्टेटिस्टिक्स में दुनियाभर के सभी देशों के गोल्ड रिजर्व की एक लिस्ट जारी की गयी है. ट्विटर पर जारी की गयी इस रिपोर्ट की मानें तो दुनिया में सबसे ज्यादा सोने के भंडार अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के पास हैं. अमेरिका के पास 8,133 मीट्रिक टन गोल्ड रिजर्व मौजूद है. इस लिस्ट में अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर जर्मनी का नाम आता है. रिपोर्ट के अनुसार जर्मनी के पास 3,355 मीट्रिक टन का गोल्ड रिजर्व मौजूद है. इसके बाद इस लिस्ट में इटली का नाम आता है  जिसके पास 2,452 मीट्रिक टन के गोल्ड रिजर्व मौजूद हैं. 

कहां है भारत?
भारत के पड़ोसी देश चीन की बात करें तो इसके पास 2,011 मीट्रिक टन का गोल्ड रिजर्व मौजूद है और इटली के बाद यह सबसे ज्यादा गोल्ड रिजर्व वाला दुनिया का चौथा देश है. इसके बाद लिस्ट में स्विट्जरलैंड का नाम आता है जिसके पास 1,040 मीट्रिक टन गोल्ड रिजर्व मौजूद है और स्विट्जरलैंड के बाद लिस्ट में अगला नाम जापान का है जिसके पास 846 मीट्रिक टन का  गोल्ड रिजर्व मौजूद है. अब आप सोच रहे होंगे, कि भारत कौनसे स्थान पर है? दरअसल इस लिस्ट में भारत अभी 9वें स्थान पर मौजूद है और भारत के केंद्रीय बैंक यानी RBI के पास 787 मीट्रिक टन का गोल्ड रिजर्व है. 

डॉलर बड़ा या सोना?
आपने ये तो जान लिया कि किस देश के पास कितना सोना मौजूद है लेकिन ध्यान रखें कि देशों के सोने के भंडारों में उतार चढ़ाव भी आता रहता है और इसीलिए इस लिस्ट में भी बदलाव होता रहता है. पिछले कुछ समय से मंदी के चलते सोने की कीमतों में लगातार वृद्धि देखने को मिली है. लेकिन सोने के बढ़ते दामों के बावजूद बहुत से देशों के केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं. विश्व गोल्ड परिषद की मानें तो इसका कारण डॉलर की कम होती पसंद है. दरअसल रूस और युक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के दौरान रूस पर पूरी दुनिया द्वारा आर्थिक दबाव बनाने के लिए डॉलर का इस्तेमाल किया गया था जिसकी वजह से डॉलर की पसंद कम हो गयी और इसीलिए देश के केंद्रीय बैंकों ने जमकर सोना खरीदना शुरू कर दिया. 
 

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