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गणेशोत्सव 2025 : गणपति बप्पा के साथ बाजार में बूम, 28,000 करोड़ का कारोबार तय
गणेश चतुर्थी केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भारत की लोकल और स्वदेशी अर्थव्यवस्था के लिए विकास का एक अवसर बन चुका है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago
देशभर में गणेश चतुर्थी की धूम के साथ बाजारों में भी जबरदस्त रौनक है. इस वर्ष व्यापारियों को गणेशोत्सव से 28,000 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार की उम्मीद है. कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के अनुसार, विदेशी वस्तुओं को छोड़कर व्यापारियों ने इस बार पूरी तरह से स्वदेशी उत्पादों पर जोर दिया है.
21 लाख से अधिक पंडाल, 10,500 करोड़ का खर्च सिर्फ सजावट पर
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गणेश चतुर्थी पर इस बार देशभर में लगभग 21 लाख गणेश पंडाल लगाए जा रहे हैं. महाराष्ट्र में सबसे अधिक करीब 7 लाख पंडाल, कर्नाटक में 5 लाख, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और मध्य प्रदेश में 2-2 लाख, गुजरात में 1 लाख और अन्य राज्यों में 2 लाख से अधिक पंडाल स्थापित किए जा रहे हैं. अगर प्रत्येक पंडाल पर कम-से-कम 50,000 रुपये का खर्च मानें, तो सिर्फ पंडाल सजावट, मूर्ति स्थापना और ध्वनि व्यवस्था पर ही लगभग 10,500 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.
मूर्तियों, फूलों और मिठाइयों में हजारों करोड़ की बिक्री
गणेश प्रतिमाओं का व्यापार 600 करोड़ रुपये से अधिक का अनुमानित है. पूजा सामग्री फूल, माला, धूप, नारियल, फल आदि की बिक्री लगभग 500 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है. गणपति को प्रिय मोदक और अन्य मिठाइयों की बिक्री इस वर्ष 2,000 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है. वहीं कैटरिंग और स्नैक्स उद्योग को 3,000 करोड़ रुपये के कारोबार की उम्मीद है.
लॉजिस्टिक्स से लेकर गहनों तक, हर सेक्टर को मिलेगा लाभ
पर्यटन और परिवहन (बस, टैक्सी, ट्रेन, होटल) से 2,000 करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार हो सकता है. कपड़े, सजावट, गिफ्ट जैसी रिटेल वस्तुएं 3,000 करोड़ रुपये तक बिक सकती हैं. इवेंट मैनेजमेंट सेवाएं (सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, लॉजिस्टिक्स आदि) अब आधुनिक पंडालों का हिस्सा बन चुकी हैं, जिससे 5,000 करोड़ रुपये का कारोबार होने का अनुमान है. वहीं, आभूषणों (सोना-चांदी) की खरीदारी, भेंट में चांदी की मूर्तियां व सिक्कों से 1,000 करोड़ रुपये का व्यापार संभव है.
बीमा सेक्टर को भी मिल रहा बड़ा लाभ
गणेश पंडालों में बढ़ती भीड़ और महंगी मूर्तियों को देखते हुए बीमा कंपनियों को भी लाभ मिल रहा है. इस वर्ष 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का बीमा कारोबार होने का अनुमान है.
त्योहारी सीजन से भारतीय अर्थव्यवस्था को मिलेगी गति
कैट के राष्ट्रीय मंत्री शंकर ठक्कर के अनुसार, “गणेश चतुर्थी भारत का प्रमुख त्योहार है. यह रक्षाबंधन से शुरू हो रहे त्योहारों के मौसम की दिशा तय करता है. नवरात्रि, दशहरा, दिवाली, छठ और विवाह सीजन तक यह प्रवाह जारी रहता है. यही भारत की सनातन अर्थव्यवस्था की स्थिरता और ताकत को दर्शाता है.”
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