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रोटी के बजाए खाने हैं पराठे? ज्यादा जेब ढीली करने के लिए रहें तैयार
गुजरात की एपीलेट अथॉरिटी ऑफ एडवांस रूलिंग (AAAR) का मानना है कि रोटी और पराठे में काफी अंतर है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
महंगाई के मौसम में कुछ और भी महंगा हो गया है. पराठे का शौक रखने वालों को अब अपनी जेब कुछ ज्यादा ढीली करनी होगी. दरअसल, गुजरात की एपीलेट अथॉरिटी ऑफ एडवांस रूलिंग (AAAR) का मानना है कि रोटी और फ्रोजन पराठे में काफी अंतर है. इसलिए रोटी पर जहां पांच प्रतिशत GST लगता है. वहीं, पराठे पर 18 फीसदी GST लगेगा. यह फैसला अहमदाबाद की कंपनी वाडीलाल इंडस्ट्रीज की अपील पर आया है.
कंपनी ने दी थी ये दलील
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वाडीलाल इंडस्ट्रीज कई तरह के फ्रोजन पराठे बनाती है, यानी रेडी टू कुक पराठे. कंपनी की दलील थी कि रोटी और पराठे में ज्यादा अंतर नहीं है. दोनों आटे से ही बनते हैं, इसलिए पराठे पर भी पांच फीसदी जीएसटी लगना चाहिए. उसका कहना था कि न केवल दोनों को बनाने की प्रक्रिया एक जैसी है, बल्कि इनके इस्तेमाल और उपभोग का तरीका भी समान है. लेकिन AAR ने कंपनी की इस दलील को खारिज करते हुए साफ किया कि पराठे पर 18 फीसदी जीएसटी लगेगा.
क्या है पूरा मामला?
अथॉरिटी फॉर एडवांस रूलिंग्स (AAR) की अहमदाबाद बेंच ने व्यवस्था दी थी कि रेडी टू कुक पराठे पर 18 फीसदी जीएसटी लगेगा. कंपनी ने इसके खिलाफ एपीलेट अथॉरिटी ऑफ एडवांस रूलिंग (AAAR) में अपील की थी. लेकिन एपीलेट अथॉरिटी ने AAR के फैसले को सही ठहराया है. अथॉरिटी का कहना है कि वाडीलाल इंडस्ट्रीज जो पराठे बनाती है, उसमें 36 से 62 फीसदी तक आटा होता है. साथ ही इसमें आलू, मूली और प्याज के अलावा वेजिटेबल ऑयल और नमक होता है. जबकि सादी रोटी या चपाती में केवल आटा और पानी होता है. इसलिए पराठे पर 18% GST का फैसला सही है.
अलग-अलग फैसले
इससे पहले महाराष्ट्र AAR ने व्यवस्था दी थी कि पराठे पर पांच फीसदी जीएसटी लगना चाहिए. जबकि केरल और गुजरात एएआर का कहना था कि रोटी और पराठे में काफी अंतर है, इसलिए GST भी अलग-अलग होना चाहिए. टैक्स मामलों से जुड़े एक्सपर्ट्स का कहना है कि अलग-अलग तरह की रूलिंग से स्थिति और जटिल हो जाएगी. जीएसटी काउंसिल को इस मामले में पहल करनी चाहिए. वहीं, पराठे पर 18 फीसदी टैक्स लगाने के फैसले पर सोशल मीडिया यूजर्स अपने-अपने तरीके से रिएक्शन दे रहे हैं.
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