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अमेरिकी टैरिफ झटके का असर अभी सीमित, लेकिन लंबे समय में चुनौतियां बढ़ेंगी : वित्त मंत्रालय
मासिक आर्थिक समीक्षा में कहा गया – वैश्विक व्यापार सुस्त होने की आशंका, पर भारत का निर्यात जुलाई में 4.5% बढ़ा
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago
वित्त मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ का तात्कालिक असर भले ही सीमित दिख रहा हो, लेकिन इसका पूरा प्रभाव धीरे-धीरे सामने आएगा और अर्थव्यवस्था के लिए द्वितीयक और तृतीयक चुनौतियां खड़ी कर सकता है.
मंत्रालय की नवीनतम मासिक आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि वाशिंगटन के साथ चल रही व्यापार वार्ताएं अहम होंगी. रिपोर्ट के अनुसार अगर अनिश्चितता लंबी खिंचती है तो यह भारतीय उद्योग पर दबाव डाल सकती है क्योंकि अमेरिकी बाजार भारत के निर्यात के लिए अत्यधिक महत्व रखता है.
रिपोर्ट ने उल्लेख किया कि नए शुल्कों से 2025 की दूसरी छमाही और 2026 में वैश्विक व्यापार की रफ्तार धीमी पड़ सकती है. बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अस्थिर व्यापार वातावरण पहले से ही कारोबारी भरोसे, निवेश भावना और सप्लाई चेन पर दबाव बना रहे हैं.
हालांकि, इस पृष्ठभूमि के बावजूद भारत का बाहरी क्षेत्र लचीला साबित हुआ. जुलाई में भारत का वस्तु और सेवा निर्यात साल-दर-साल आधार पर 4.5% बढ़कर 68.3 अरब डॉलर पर पहुंच गया. माल निर्यात में 7.3% की वृद्धि हुई जिसमें गैर-पेट्रोलियम और गैर-रत्न-आभूषण शिपमेंट्स में 12.7% की तेज उछाल शामिल रही. इस दौरान आयात 6.1% बढ़कर 80 अरब डॉलर रहा जिससे व्यापार घाटा 10.1 अरब डॉलर से बढ़कर 11.7 अरब डॉलर हो गया.
मंत्रालय ने कहा कि संतुलित और सोच-समझकर बनाई गई व्यापार नीति टैरिफ झटकों के खिलाफ बफर का काम कर सकती है. हाल ही में लागू हुए भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CETA) से 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना होने की उम्मीद है और संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा भी होगी. इसी तरह यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के साथ समझौता और यूरोपीय संघ तथा अमेरिका के साथ चल रही वार्ताएं व्यापक विविधीकरण रणनीति का हिस्सा हैं.
घरेलू स्तर पर जुलाई में आर्थिक गतिविधियां मजबूत रहीं. ई-वे बिल जनरेशन ने रिकॉर्ड बनाया. मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 16 महीने के उच्च स्तर पर पहुंचा जबकि सर्विसेज पीएमआई ने स्थिर विस्तार का संकेत दिया. एफएमसीजी बिक्री, यूपीआई लेन-देन और मजबूत ऑटो मांग से उपभोक्ता खर्च बढ़ा. अनुकूल मानसून से ग्रामीण भावना में सुधार आया. इस बीच खाद्य कीमतों में नरमी से जुलाई में मुद्रास्फीति घटकर 1.6% पर आ गई जो आरबीआई की निचली सहनशीलता सीमा से भी नीचे है.
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