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Zomato, Flipkart जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों के कर्मचारियों को भी मिलेगी सोशल सिक्योरिटी, जानिए कैसे?
सरकार की ओर से Zomato,Flipkart जैसे प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले कर्मचारियों को सोशल सिक्योरिटी देने के लिए उनका ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराया जाएगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
जोमैटो (Zomato), स्विगी (Swiggy), फ्लिपकार्ट (Flipkart) जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों में काम करने वालों के लिए एक अच्छी खबर है. दरअसल, सरकार गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सोशल सिक्योरिटी देने के उपायों पर काम कर रही है, जिसके तहत इनका ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराया जाएगा. तो चलिए आपको सरकार के इस महत्वपूर्ण पहल की पूरी जानकारी देते हैं.
कौन होते हैं गिग वर्कर?
आपको बता दें, मुख्य रूप से सर्विस सेक्टर में अस्थायी तौर पर काम करने वालों और ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए खाने-पीने की चीजों सहित दूसरी वस्तुओं की डिलीवरी करने वालों को गिग वर्कर कहा जाता है. इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन की एक रिपोर्ट के अनुसार, गिग इकॉनमी के मामले में भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर है और एशिया-प्रशांत क्षेत्र के सभी गिग वर्कर्स में से 56 प्रतिशत भारत में काम करते हैं.
ऐसे होगा रजिस्ट्रेशन
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार लेबर मिनिस्टर मनसुख मांडविया ने गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सोशल सिक्योरिटी बेनेफिट मुहैया कराने के उपायों पर एक समीक्षा बैठक की. उन्होंने कहा है कि सामाजिक सुरक्षा के कदमों को लागू करने के लिए ई-श्रम पोर्टल पर इन वर्कर्स का रजिस्ट्रेशन कराया जाएगा. गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स की नियोक्ताओं यानी एग्रीगेटर्स से कहा जाएगा कि वे इस पोर्टल पर अपने वर्कर्स के रजिस्ट्रेशन की अगुवाई करें. इसके लिए एग्रीगेटर्स को एक ऑनलाइन विंडो दी जाएगी, जिससे रजिस्ट्रेशन प्रोसेस में दिक्कत न हो.
मिलेंगे सोशल बेनेफिट्स
लेबर मिनिस्टर मनसुख मांडविया के अनुसार सरकार गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. ये उनकी वर्कफोर्स का महत्वपूर्ण अंग हैं, इसलिए सरकार इन्हें सोशल सिक्योरिटी बेनेफिट्स दिलाने के कई उपायों पर काम कर रही है. भारत में पहली बार सोशल सिक्योरिटी कोड के तहत गिग और प्लैटफॉर्म वर्कर्स की परिभाषा तय की गई है. देश अर्थव्यवस्था में इन वर्कर्स की भूमिका को औपचारिक स्वरूप देने की दिशा में यह सरकार महत्वपूर्ण कदम है.
काम के घंटे ज्यादा और कमाई कम
दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, हैदराबाद, बेंगलुरु, कोलकाता, जयपुर और इंदौर में 5302 कैब ड्राइवरों और 5028 डिलीवरी ब्वॉय के बीच किए गए एक सर्वे के अनुसार भारत में ऐप बेस्ड कैब ड्राइवरों में से 83 प्रतिशत से अधिक ऐसे हैं, जो प्रतिदिन 10 घंटे से ज्यादा काम कर रहे हैं. लगभग 60 प्रतिशत ऐसे हैं, जो 12 घंटे से ज्यादा काम कर रहे हैं और 31 प्रतिशत ड्राइवर तो प्रतिदिन 14 घंटे से अधिक काम कर रहे हैं. फिर भी लगभग आधे ड्राइवर तमाम तरह की लागत घटाने के बाद महीने में 15 हजार रुपये भी नहीं कमा पा रहे हैं. वहीं, हर दिन 10 घंटे से अधिक काम करने वाले ऐप बेस्ड डिलीवरी पर्संस की महीने की कमाई 10 हजार रुपये से भी कम है.
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