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किसानों को आसान कर्ज, युवाओं को बैंकिंग से जोड़ने पर जोर; सीतारमण ने बैंकों को दिए निर्देश
वित्तमंत्री ने कहा कि सरकारी बैंक दलहन और तिलहन की खेती करने वाले किसानों तक अधिक ऋण पहुंचाएं. इसके साथ ही युवाओं को बैंकिंग से जोड़ने के लिए 2 अक्टूबर से विशेष अभियान शुरू करने का सुझाव भी दिया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारत को दलहन और तिलहन के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार ने सरकारी बैंकों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से दलहन और तिलहन की खेती करने वाले किसानों को दिए जाने वाले ऋण में तेजी लाने को कहा है. उनका मानना है कि इससे इन फसलों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने, आयात पर निर्भरता कम करने और कृषि क्षेत्र में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी.
वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय ‘पीएसबी कॉन्क्लेव’ के समापन सत्र में सीतारमण ने सरकारी बैंकों और सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि सरकार की कृषि और खाद्य उत्पादन से जुड़ी प्राथमिकताओं को सही रणनीति के साथ किसानों तक वित्तीय सहायता पहुंचाने में बदलना होगा.
दलहन-तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर जोर
वित्तमंत्री ने कहा कि बैंकों को विशेष रूप से दलहन और तिलहन की खेती करने वाले किसानों को अधिक ऋण देना चाहिए. इससे भारत की आयात निर्भरता कम करने के साथ मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार और कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल सकता है.
सरकार पहले ही दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष मिशन पर काम कर रही है. वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में घोषित दलहन मिशन का लक्ष्य 2031 तक घरेलू उत्पादन को 350 लाख टन तक पहुंचाना और खेती का रकबा 310 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाना है.
धन धान्य कृषि योजना वाले जिलों पर विशेष फोकस
सीतारमण ने बैंकों से प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना के अंतर्गत आने वाले जिलों में ऋण उपलब्धता बढ़ाने का सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाने, फसल विविधीकरण और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों तरह के कृषि ऋण की जरूरत है. इसके अलावा सिंचाई, फसल कटाई के बाद भंडारण और कृषि से जुड़े बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए भी पर्याप्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया.
प्राथमिकता क्षेत्र ऋण में तेजी लाने की जरूरत
वित्तमंत्री ने बैंकों से प्राथमिकता क्षेत्र ऋण के तहत अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रयास तेज करने को भी कहा. उन्होंने बैंक प्रमुखों से कहा कि प्राथमिकता क्षेत्र में ऋण की कमी को केवल अन्य संस्थानों के माध्यम से पूरा करने के बजाय बैंक खुद अपनी क्षमता बढ़ाएं.
उन्होंने कहा कि प्राथमिकता क्षेत्र को केवल लक्ष्य पूरा करने के रूप में नहीं, बल्कि औपचारिक ऋण के विस्तार, नए ग्राहकों को जोड़ने, उद्यमों को मजबूत बनाने और व्यापक आर्थिक विकास के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए.
युवाओं के लिए शुरू हो सकता है ‘बैंकिंग फॉर यूथ’ अभियान
बैठक में वित्तमंत्री ने युवाओं को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने के लिए भी एक नई पहल का सुझाव दिया. उन्होंने सरकारी बैंकों से 2 अक्टूबर से एक महीने तक चलने वाला ‘बैंकिंग फॉर यूथ’ अभियान शुरू करने का आग्रह किया.
यह अभियान 16 वर्ष से अधिक आयु के युवाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया जा सकता है. सीतारमण ने कहा कि बैंकों को युवाओं के शाखाओं में आने का इंतजार करने के बजाय कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, कौशल विकास संस्थानों और अन्य परिसरों तक पहुंचना चाहिए.
उन्होंने कहा कि खाता खोलने, वित्तीय जागरूकता और बैंकिंग उत्पादों की जानकारी के जरिए युवाओं के साथ सीधा जुड़ाव बढ़ाया जा सकता है. वित्तमंत्री ने बैंक शाखाओं में युवाओं की मदद के लिए समर्पित ‘युवा कियोस्क’ या ‘युवा बैंकिंग मित्र’ जैसी व्यवस्था बनाने का सुझाव भी दिया.
12 सरकारी बैंकों को अलग रणनीति बनाने की सलाह
सीतारमण ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के सभी 12 बैंकों को अपनी क्षेत्रीय मौजूदगी, उत्पादों और संस्थागत क्षमताओं के आधार पर युवाओं को आकर्षित करने और उनसे जुड़ने की अलग रणनीति तैयार करनी चाहिए. सरकार का फोकस एक ओर किसानों तक औपचारिक ऋण की पहुंच बढ़ाने पर है, तो दूसरी ओर नई पीढ़ी को बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं से अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ने पर भी है.
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