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ई-कॉमर्स कंपनियां कसने जा रही हैं ऐसे कस्टमर्स पर नकेल, आसानी से नहीं कर पाएंगे खरीदारी
दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनियों जैसे कि फ्लिपकार्ट और अमेजन पर रोजाना लाखों की संख्या में लोग खरीदारी करते हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्लीः दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनियों जैसे कि फ्लिपकार्ट और अमेजन पर रोजाना लाखों की संख्या में लोग खरीदारी करते हैं. हालांकि बहुत से कस्टमर्स अपने मंगाए गए सामान को रिटर्न भी करते हैं. इनमें से कुछ कस्टमर्स के सामान को रिटर्न करने के वाजिब कारण होते हैं, लेकिन कई कस्टमर्स बिना किसी कारण के भी प्रोडक्ट को मंगाकर रिटर्न कर देते हैं. कंपनियां अब ऐसे कस्टमर्स पर नकेल कसने जा रही हैं जो बिना वजह के प्रोडक्ट को मंगा कर रिटर्न करते हैं. इनको शॉपिंग करने से बेदखल करने की तैयारी की जा रही है और नियमों को सख्त किया जा रहा है, क्योंकि रिटर्न करने वाले कस्टमर्स की संख्या में बहुत ज्यादा इजाफा हो गया है.
30 फीसदी सामान होता है रिटर्न
कंपनियों के पास इस वक्त रिटर्न सामान का स्टॉक 30 फीसदी है. रिवर्स लॉजिस्टिक्स की वजह से कंपनियों के घाटे में वृद्धि हो रही है. B2B और B2C दोनों विक्रेताओं के लिए ये काफी कठिन समस्या होती जा रही है. वहीं ग्राहकों को भी सामान वापस पाने के लिए भले ही आपको बहुत मेहनत करनी पड़े, लेकिन उनको तुरंत पैसा नहीं मिलता है.
इन प्रोडक्ट्स का होता है सबसे ज्यादा रिटर्न
LogiNext के एक अध्ययन में पाया गया कि औसत निर्माता अपनी बिक्री का 5 से 20% रिटर्न पर खर्च करता है. मैनेजमेंट कंसल्टिंग फर्म किर्नी के प्रिंसिपल प्रशांत गुप्ता का कहना है कि उत्पाद के प्रकार, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और ग्राहक कहां रहता है, इसके आधार पर ग्राहक रिटर्न की संख्या 10% से 50% तक होती है. गारमेंट्स, फैशन आइटम, टेक्नोलॉजी गुड्स, रेडीमेड गारमेंट्स, महिलाओं और पुरुषों के वस्त्र, और जूते जैसे प्रोडक्ट्स में रिवर्स लॉजिस्टिक्स सबसे ज्यादा होता है.
विकल्प को समाप्त नहीं कर सकती है कंपनियां
ई-कॉमर्स में ऑनलाइन विक्रेता अब उत्पाद वापसी विकल्प को समाप्त नहीं कर सकते हैं. अगर वे आइटम वापस नहीं भेज सकते हैं, तो लोग उतनी चीजें नहीं खरीदेंगे जितना वे अब खरीदते हैं, जो पहले से ही ई-कॉमर्स ऑनलाइन व्यवसाय करने का एक सामान्य हिस्सा है. अगर रिटर्न प्रक्रिया को गंभीरता से नहीं लिया जाता है, तो एक विक्रेता जल्दी से अधिक नाखुश ग्राहकों के साथ समाप्त हो सकता है.
ऑनलाइन रिटेल मार्केट में होगी बढ़ोतरी
कंसल्टिंग फर्म RedSeer का कहना है कि भारत का ऑनलाइन रिटेल मार्केट 2021 में 45-50 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2030 तक 350 बिलियन डॉलर हो जाएगा. लॉजिस्टिक्स कंपनी शिपरॉकेट के सह-संस्थापक और सीईओ साहिल गोयल का कहना है कि रिवर्स लॉजिस्टिक्स नया नहीं है, लेकिन अब यह ई-कॉमर्स व्यवसाय का एक अनिवार्य हिस्सा है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. हालांकि इसके लिए कड़े नियम लागू करना समय की मांग है, क्योंकि ऐसे ग्राहकों की संख्या में काफी बढ़ोतरी देखने को मिली है.
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