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CAG के राडार पर आईं डीटीएच कंपनियां, लाइसेंस फीस में हेराफेरी करने का आरोप
देश में कार्यरत चार प्रमुख डीटीएच कंपनियां सीएजी के राडार पर आ गई हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्लीः देश में कार्यरत चार प्रमुख डीटीएच कंपनियां सीएजी के राडार पर आ गई हैं. इन कंपनियों ने सरकार को सालाना तौर पर दी जाने वाली लाइसेंस फीस में हेराफेरी की है. सीएजी ने इन सभी डीटीएच कंपनियों के स्पेशल ऑडिट की मांग की है. फिलहाल सरकार को डीटीएच कंपनियों को अपने वार्षिक सकल राजस्व का 8% लाइसेंस फीस के रूप में देना होता है.
सरकार को संदेह है कि राजस्व गणना अपेक्षित तर्ज पर इन कंपनियों ने नहीं की है. एयरटेल डिजिटल टीवी, टाटा प्ले, डिश टीवी और सन डायरेक्ट अभी सक्रिय हैं, जबकि बिग टीवी और वीडियोकॉन का D2H अब चालू नहीं है.
मंत्रालय ने लिखा था सीएजी को पत्र
केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने इस सप्ताह भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) को पत्र लिखकर सभी डीटीएच सेवा प्रदाताओं के अपने स्थापना के वर्ष या सरकार द्वारा लाइसेंस प्रदान करने के लिए एक गहन ऑडिट के लिए कहा है. यह कदम डीटीएच सेवा प्रदाताओं द्वारा राजस्व गणना में संदिग्ध विसंगतियों पर है.
कंपनियों ने मांगी है छूट
ओटीटी कंपनियों के आगमन के बाद से डीटीएच कंपनियों की रेवेनयू पर काफी असर पड़ा है, क्योंकि ग्राहकों की संख्या काफी कम हो गई है. इन कंपनियों ने मई में सरकार से लाइसेंस फीस में छूट की मांग की थी. 2003 से 2007 के बीच केवल छह कंपनियों को डीटीएच सेवा के लिए लाइसेंस दिया गया था, जिनमें से चार कंपनियां फिलहाल चल रही हैं.
68 मिलियन ग्राहक
मुफ्त डीटीएच प्रदाता - डीडी फ्री डिश, जो सरकार के स्वामित्व वाले दूरदर्शन द्वारा संचालित है, के अलावा चार कंपनियों के कुल 68 मिलियन से अधिक ग्राहक हैं. डीटीएच सेवा प्रदाताओं को अपने राजस्व का एक हिस्सा केंद्र को लाइसेंस शुल्क के रूप में देना होगा. यह कंपनी के ऑडिट किए गए खातों में दर्ज वार्षिक सकल राजस्व के 8% पर निर्धारित है. हालांकि, सरकारी अधिकारियों के बीच चिंता है कि विभिन्न ऑपरेटरों द्वारा दर्ज की गई राजस्व गणना गिर रही है और अपेक्षित स्तर के साथ नहीं है.
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